

AI Conference Delhi: जब दिल्ली की धरती पर तकनीक और कूटनीति का संगम हुआ, तब भविष्य के नए अध्याय लिखे जा रहे थे। यह एक ऐसा मंच था जहां दुनिया के कोने-कोने से दिग्गज जुटे, मानव सभ्यता के अगले बड़े कदम पर मंथन करने।
भारत मंडपम इन दिनों वैश्विक कूटनीति और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का अनूठा केंद्र बना हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, तकनीकी विशेषज्ञ और नीति निर्माता एक साथ आ रहे हैं। इसी क्रम में, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान बुधवार को दिल्ली पहुँचे। उनका यह दौरा इंडिया एआई इंपैक्ट समिट में भाग लेने के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात उन्नत तकनीक के क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदार हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। केंद्रीय ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया।
हाल के वर्षों में भारत और यूएई के बीच रणनीतिक साझेदारी, निवेश, रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, और AI को दोनों देशों के भविष्य के सहयोग का एक प्रमुख स्तंभ माना जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसी दिन संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी नई दिल्ली पहुंचे, जिनका स्वागत केंद्रीय कॉरपोरेट कार्य तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने किया। विदेश मंत्रालय ने इस दौरे को बहुपक्षवाद, सतत विकास और वैश्विक शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करने वाला बताया।
AI Conference Delhi: वैश्विक नेताओं का जमावड़ा और द्विपक्षीय वार्ताएं
शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें कीं। इनमें क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेनकोविक, सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो और स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज़ शामिल थे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुन्दर पिचाई से भी मुलाकात की, जहाँ AI नवाचार और डिजिटल अवसंरचना पर गहन चर्चा हुई।
अन्य प्रमुख प्रतिनिधियों में मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम, सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्ले और स्वीडन की उपप्रधानमंत्री एब्बा बुश भी उपस्थित रहे। यह सम्मेलन, जो 16 फरवरी से 20 फरवरी 2026 तक भारत मंडपम में आयोजित हो रहा है, नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तकों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को एक मंच पर ला रहा है। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर AI के जिम्मेदार उपयोग, इसके नियमन, नवाचार और साझेदारी को बढ़ावा देना है। भारत वैश्विक मंच पर अपनी तकनीकी कूटनीति को मजबूती से प्रस्तुत कर रहा है।
भारत लंबे समय से डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, एक मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम और डेटा-आधारित शासन मॉडल को विश्व के सामने प्रस्तुत करता रहा है। ऐसे में यह शिखर सम्मेलन देश के लिए तकनीकी नेतृत्व स्थापित करने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिहाज से एक महत्वपूर्ण अवसर है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
भविष्य की तकनीक और भारत की वैश्विक भूमिका
इस आयोजन में विभिन्न देशों के नेता और विशेषज्ञ AI के नैतिक पहलुओं, डेटा सुरक्षा, रोजगार पर इसके प्रभाव और सामाजिक समावेशिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। भारत का लक्ष्य AI के क्षेत्र में एक अग्रणी भूमिका निभाना है, जहाँ नवाचार के साथ-साथ मानव-केंद्रित दृष्टिकोण भी हो। यह शिखर सम्मेलन न केवल तकनीकी प्रगति को गति देगा बल्कि विभिन्न देशों के बीच सहयोग के नए द्वार भी खोलेगा, जिससे एक सुरक्षित और समावेशी डिजिटल भविष्य का निर्माण हो सके। इस तकनीकी कूटनीति के माध्यम से भारत अपनी वैश्विक स्थिति को और मजबूत कर रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





