
Allahabad High Court News: न्याय के तराजू पर जब प्रशासन का पसीना छूटने लगे, तो पीठ कानून का डंडा ऐसे चलाती है कि व्यवस्था की नींव हिल जाती है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संभल जिले की एक मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने वाले प्रशासनिक आदेश को रद्द कर दिया है, साथ ही अधिकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने पर पद छोड़ने की नसीहत भी दी।
Allahabad High Court News: उच्च न्यायालय का सख्त रुख, कहा- कानून-व्यवस्था न संभाल सको तो पद छोड़ो!
Allahabad High Court News: ‘अधिकारी इस्तीफा दें या तबादला मांगें’, उच्च न्यायालय की कड़ी टिप्पणी
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शनिवार को संभल जिले की एक मस्जिद में नमाज अदा करने वाले लोगों की संख्या सीमित करने वाले प्रशासनिक आदेश को रद्द कर दिया। इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए, न्यायालय ने एक तीखी टिप्पणी की कि यदि स्थानीय प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने में असमर्थ है, तो संबंधित अधिकारियों को अपने पद छोड़ देने चाहिए। यह फैसला देश में धार्मिक स्वतंत्रता और प्रशासन की जवाबदेही के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करता है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन और न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि पुलिस अधीक्षक (एसपी) और जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) को लगता है कि मस्जिद परिसर में बड़ी संख्या में लोगों के नमाज अदा करने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है, तो उन्हें या तो अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए या संभल से बाहर स्थानांतरण की मांग करनी चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। न्यायालय ने जोर देकर कहा कि यदि अधिकारी महसूस करते हैं कि वे कानून का पालन सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए, इस बात पर बल देते हुए कि सभी परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करना राज्य का परम कर्तव्य है। इस संभल मस्जिद मामले में उच्च न्यायालय का यह रुख प्रशासनिक ढिलाई पर एक सीधा प्रहार है।
**निजी संपत्ति पर पूजा के अधिकार पर भी न्यायालय का स्पष्टीकरण**
पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि उसने पहले एक अन्य मामले में यह टिप्पणी की थी कि निजी संपत्ति पर पूजा या प्रार्थना करने के लिए सरकार की पूर्व अनुमति की कोई आवश्यकता नहीं है। यह टिप्पणी धार्मिक स्थलों पर इकट्ठा होने के अधिकार को और पुष्ट करती है, जब तक कि इससे सार्वजनिक शांति भंग न हो। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
इस मामले की सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार के वकील ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। वहीं, याचिकाकर्ता, मुनाज़िर खान, ने प्रार्थना स्थल को दर्शाने के लिए तस्वीरें और राजस्व अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए समय की मांग की। मुनाज़िर खान द्वारा दायर इस याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार के साथ-साथ संभल के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को भी पक्षकार बनाया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अदालत ने मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख दी है। इस मामले में न्यायालय का अगला कदम देखना महत्वपूर्ण होगा।




