



Emergency Landing Facility: असम की धरती पर अब आसमान के महारथी भी उतर सकेंगे, जब डिब्रूगढ़ का मोरान बाईपास केवल एक सड़क नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा और आपातकालीन तैयारियों का नया अध्याय लिखेगा।
असम में भारत की सुरक्षा को मिलेगी नई उड़ान: PM मोदी करेंगे Emergency Landing Facility का उद्घाटन, पूर्वोत्तर को मिलेगी पहली ऐसी सुविधा
पूर्वोत्तर को मिली पहली Emergency Landing Facility: सामरिक महत्व और भविष्य की तैयारी
पूर्वोत्तर भारत के असम राज्य में 14 फरवरी का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। डिब्रूगढ़ जिले के मोरान बाईपास पर एक आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ELF) का उद्घाटन किया जाएगा, जो इस क्षेत्र में अपनी तरह की पहली ऐसी सुविधा होगी। देश के प्रधानमंत्री स्वयं इसका उद्घाटन कर इसे राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जो भारत की सामरिक क्षमताओं को एक नई ऊंचाई देगा। यह कदम हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर ऐसे समय में जब देश तेजी से अपनी बुनियादी ढांचागत क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।
यह अत्याधुनिक सुविधा राजमार्ग के एक चिन्हित खंड को आपात स्थिति में वैकल्पिक रनवे के रूप में उपलब्ध कराएगी। यह लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों की आपातकालीन लैंडिंग और टेक-ऑफ संचालन को कुशलतापूर्वक संभालने में सक्षम होगी। इसके अतिरिक्त, यह दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) अभियानों के दौरान भी एक जीवन रेखा के रूप में काम करेगी, जिससे तेजी से मदद पहुंचाई जा सकेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री के साथ-साथ रक्षा मंत्री, असम के राज्यपाल और मुख्यमंत्री सहित कई वरिष्ठ नागरिक और सैन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। यह समारोह देश की रक्षा तैयारियों और आपदा प्रबंधन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
रणनीतिक महत्त्व और परीक्षण की सफलता
इस पहल के तहत, भारतीय वायु सेना के एक लड़ाकू विमान ने गुरुवार को मोरान राजमार्ग पर स्थित Emergency Landing Facility पर सफलतापूर्वक परीक्षण लैंडिंग की। विमान की गगनभेदी गर्जना ने पूरे क्षेत्र में जबरदस्त उत्साह और गर्व का माहौल पैदा कर दिया। इस सफल परीक्षण से पहले, सुविधा के सभी तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं की गहन जाँच की गई थी। पूरे कार्यक्रम के दौरान, पुलिस और वायु सेना द्वारा एक सख्त सुरक्षा घेरा बनाया गया था, ताकि किसी भी प्रकार की बाधा से बचा जा सके और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
हालांकि आम जनता को इस ऐतिहासिक क्षण के करीब आने की अनुमति नहीं थी, फिर भी बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और विभिन्न स्थानों से आए पर्यटकों ने दूर से इस अद्भुत नजारे को देखा और देश की प्रगति पर खुशी व्यक्त की। यह 4.2 किलोमीटर लंबा राजमार्ग अब केवल एक सड़क नहीं रहेगा, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर एक मजबूत रनवे के रूप में भी कार्य करेगा, जो देश की रक्षा पंक्ति में एक नया आयाम जोड़ेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें


