

राजनीति की बिसात पर इस्तीफों का खेल नया नहीं, लेकिन असम कांग्रेस में जो कुछ घटा, वह किसी हाई-वोल्टेज ड्रामा से कम नहीं। एक इस्तीफा, फिर उस पर मंथन और अंततः वापसी, यह सब पार्टी के भीतर चल रहे गहरे मंथन को दर्शाता है। Assam Congress: पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोराह के इस्तीफे और फिर उसे वापस लेने के घटनाक्रम ने असम की राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जिसमें कांग्रेस हाईकमान का सीधा दखल सामने आया है।
असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोराह ने सोमवार को अपने इस्तीफे के फैसले पर पुनर्विचार के लिए पार्टी हाईकमान से अतिरिक्त समय की मांग की है। इस नाटकीय मोड़ के बीच, असम कांग्रेस इकाई के प्रमुख गौरव गोगोई ने पुष्टि की है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने स्वयं भूपेन बोराह से बातचीत की है और पार्टी हाईकमान ने उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया है। दिन की शुरुआत में, बोराह ने अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा था कि उन्होंने अपना इस्तीफा केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया है, हालांकि उन्होंने उस समय इसके पीछे के कारणों का खुलासा नहीं किया था।
असम के कांग्रेस प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैं भूपेन बोराह को अपना इस्तीफा वापस लेने के लिए धन्यवाद देता हूं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भूपेन बोराह कांग्रेस परिवार के एक महत्वपूर्ण सदस्य हैं। उन्होंने अपना त्यागपत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को प्रेषित किया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सिंह ने स्वीकार किया कि कभी-कभी कांग्रेस परिवार में आंतरिक मतभेद उभर आते हैं, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष ने उनका इस्तीफा अस्वीकार कर दिया।
उन्होंने आगे बताया कि राहुल गांधी सहित पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने बोराह के साथ विस्तृत बातचीत की। इस बातचीत के माध्यम से, इस नेतृत्व विवाद को सफलतापूर्वक सुलझा लिया गया है। भंवर जितेंद्र सिंह ने यह भी याद दिलाया कि भूपेन बोराह पिछले तीन दशकों से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं, जो पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है।
गौरव गोगोई ने भूपेन कुमार बोराह को पार्टी की ‘संपत्ति’ बताते हुए कहा कि वे बुराई के खिलाफ मजबूती से लड़ रहे हैं। गोगोई ने पिछले तीन घंटों से बोराह के साथ हुई बातचीत का उल्लेख किया और उन्हें कांग्रेस का एक सशक्त नेता बताया। उन्होंने भावनात्मक रूप से यह भी कहा कि यदि कोई गलती हुई है, तो वे एक भाई होने के नाते बोराह से माफी मांगते हैं। राहुल गांधी ने भी भूपेन कुमार बोराह से व्यक्तिगत रूप से बात की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वहीं, बोराह ने मीडिया से कहा कि जब उन्हें आवश्यक लगेगा, तब वे विस्तृत जानकारी साझा करेंगे। उन्होंने कहा, ‘मुझे अपने इस्तीफे के कारणों पर बोलने की आवश्यकता नहीं लगती। मैंने निश्चित रूप से इस्तीफा दे दिया था और अपना इस्तीफा उच्च कमान को भेज दिया था… जब भी मुझे आवश्यक लगेगा, मैं आपको फोन करूंगा और विस्तार से बात करूंगा।’ इस नेतृत्व विवाद ने एक बार फिर कांग्रेस की आंतरिक चुनौतियों को उजागर किया है।
असम कांग्रेस में एकजुटता का संदेश: हाईकमान की पहल
अपने निर्णय के पीछे के कारणों पर अधिक विस्तार से बताने से बचते हुए, बोराह ने संकेत दिया कि ये घटनाक्रम बेहाली प्रकरण से शुरू हुए आंतरिक मुद्दों से उपजे हैं। यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर कुछ गहरे मसले रहे हैं जिन्हें सुलझाने की आवश्यकता है।
भाजपा का खुला निमंत्रण: हिमंता बिस्वा सरमा की पेशकश
इस बीच, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार को एक बड़ा राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने कहा कि भूपेन बोराह के लिए भाजपा के दरवाजे खुले हैं और अगर बोराह भाजपा में शामिल होते हैं, तो वे उन्हें किसी ‘सुरक्षित सीट’ से चुनाव जितवाने का पूरा प्रयास करेंगे। यह पेशकश कांग्रेस के लिए एक चुनौती के रूप में देखी जा रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
बोराह ने 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था और पिछले साल उनकी जगह गौरव गोगोई को नियुक्त किया गया था। बोराह असम में दो बार विधायक भी रह चुके हैं, जो राज्य की राजनीति में उनके अनुभव और पकड़ को दर्शाता है। इस पूरी घटना ने असम की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।





