

India Foreign Policy: कूटनीति के बिसात पर कौन कितना माहिर, यह समय बताता है। जब दावे बड़े हों और जमीनी हकीकत कुछ और, तब सवाल उठना लाज़मी है।
भारत की विदेश नीति: कांग्रेस ने उठाए सवाल, कहा ‘पूरी तरह बेनकाब’
मोदी सरकार की विदेश नीति पर गहराते सवाल
India Foreign Policy: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा प्रहार करते हुए इसे पूरी तरह बेनकाब करार दिया है। उन्होंने अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों, चीन से निपटने की रणनीति और हालिया ईरान संकट जैसे मुद्दों पर सरकार की विफलताओं को उजागर किया। सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट में रमेश ने दावा किया कि ‘स्वयंभू विश्वगुरु’ के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति की वास्तविक स्थिति सामने आ चुकी है, भले ही प्रधानमंत्री के समर्थक इसे कितना भी बढ़ा-चढ़ाकर पेश करें। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ अपने घनिष्ठ संबंध बनाए हुए है, और आतंकी हमलों व क्षेत्रीय तनाव के संदर्भ में की गई टिप्पणियों पर चिंता व्यक्त की।
अमेरिकी प्रेम प्रसंग और भारत की चुप्पी
रमेश ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिकी राष्ट्रपति पाकिस्तान के साथ अपने ‘प्रेम संबंध’ जारी रखे हुए हैं, और बार-बार उसी व्यक्ति की प्रशंसा कर रहे हैं जिनकी भड़काऊ टिप्पणियों ने 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि तैयार की थी। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के सैन्य अभियानों का खुलकर समर्थन किया है। रमेश ने मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने में अमेरिकी नेतृत्व की भूमिका के दावों पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाया और कहा कि प्रधानमंत्री ने इन दावों पर सार्वजनिक रूप से कोई जवाब नहीं दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कांग्रेस नेता ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कम से कम सौ बार यह दावा किया है कि उन्होंने भारत के अमेरिकी निर्यात पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी देकर 10 मई, 2025 को ऑपरेशन सिंदूर को रुकवाया था। लेकिन प्रधानमंत्री अमेरिकी राष्ट्रपति के इन दावों पर पूरी तरह से खामोश रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर को रोकने की पहली घोषणा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 10 मई, 2025 को शाम 5:37 बजे की थी। यह भारत के अमेरिका-पाकिस्तान संबंध के बीच की जटिलताओं को दर्शाता है।
व्यापार समझौते पर उठते प्रश्नचिन्ह
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर टिप्पणी करते हुए रमेश ने कहा कि 2 फरवरी, 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की थी कि प्रधानमंत्री मोदी के अनुरोध पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम रूप ले चुका है और यह तत्काल प्रभाव से लागू हो रहा है। उन्होंने इसे मोदी का एक ‘हताशा भरा कदम’ बताया, जिसका उद्देश्य संसद में राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दों से ध्यान भटकाना था।
उन्होंने आगे कहा कि अठारह दिन बाद, अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने घोषणा की कि राष्ट्रपति ट्रंप की वह टैरिफ नीति, जो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की नींव थी, अवैध और असंवैधानिक है। इस फैसले की व्यापक रूप से उम्मीद थी, लेकिन मोदी ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए राष्ट्रपति ट्रंप पर व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने का दबाव डाला, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। रमेश ने व्यापार समझौते की और आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि यह एकतरफा था और भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका से संबंधित ठोस आश्वासनों के बिना आयात पर महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं की थीं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
यह दर्शाता है कि भारत की विदेश नीति और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समझौतों को लेकर सरकार को कई सवालों का सामना करना पड़ रहा है, खासकर जब बात अमेरिका-पाकिस्तान संबंध और भारत के हितों की हो। कांग्रेस का कहना है कि सरकार की चुप्पी और एकतरफा समझौते देश के दीर्घकालिक हितों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

