

भारत-चीन सीमा विवाद: संसद में हंगामा कोई नई बात नहीं, पर जब बात देश की सुरक्षा से जुड़ जाए तो माहौल और भी गरमा जाता है। ऐसा ही कुछ इन दिनों भारतीय राजनीति के गलियारों में देखने को मिल रहा है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने गुरुवार को एक तीखी चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि अगर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को 2020 में चीन के साथ हुए सीमा गतिरोध पर संसद में अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दी गई, तो सदन के सुचारू रूप से चलने की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समय विपक्ष को परेशान करने वाला सबसे बड़ा मुद्दा यही है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका जा रहा है। राज्यसभा में भी विपक्ष के नेता ने इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिसके परिणामस्वरूप आज कई विपक्षी सांसद सदन से वॉकआउट कर गए।
भारत-चीन सीमा विवाद पर विपक्ष की एकजुटता
रमेश ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी विपक्षी दल इस बात पर एकमत हैं कि अगर लोकसभा के इस महत्वपूर्ण सांसद को बोलने का अवसर नहीं दिया जाता, तो सदन का कामकाज चलाना बेहद मुश्किल होगा। कांग्रेस ने संसद के भीतर कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया है, और इनमें से एक प्रमुख मुद्दा पूर्वी लद्दाख में 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद से संबंधित जनरल एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों से जुड़ा है। कांग्रेस का आरोप है कि राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे (सेवानिवृत्त) के उद्धरणों का जिक्र करने से कई बार रोका गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके बचाव में, भाजपा नेताओं ने तर्क दिया है कि यह सदन के नियमों का उल्लंघन है और इससे सशस्त्र बलों का मनोबल गिरने का खतरा है।
संसद में लगातार जारी संसदीय गतिरोध के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में भाग न लेने का निर्णय लिया है। जयराम रमेश ने इस संदर्भ में जून 2004 की घटना को याद दिलाया, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव में इसलिए भाग नहीं लिया था क्योंकि उन्हें जवाब देने से रोका गया था। उन्होंने आगे कहा कि मनमोहन सिंह ने 2005 में राष्ट्रपति को दो बार धन्यवाद दिया था, क्योंकि वे 2004 में धन्यवाद नहीं दे पाए थे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव: मनमोहन सिंह का उदाहरण
उन्होंने प्रधानमंत्री और भाजपा को याद दिलाया कि जून 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब इसीलिए नहीं दिया था क्योंकि उन्हें उस समय जवाब देने से रोका गया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके एक साल बाद, 2005 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति को दो बार धन्यवाद दिया था, क्योंकि वे 2004 में ऐसा नहीं कर पाए थे। बुधवार शाम 5 बजे राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री मोदी के जवाब की उम्मीद थी। हालांकि, विपक्षी सदस्यों द्वारा लगातार व्यवधान और नारेबाजी के बाद, अध्यक्ष को लोकसभा स्थगित करनी पड़ी। यह संसदीय गतिरोध अब एक बड़ी बहस का मुद्दा बन गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


