

Delhi Pollution: दिल्ली की हवा इन दिनों एक ऐसी जहरीली चादर में लिपटी है, जिससे निजात पाना दशकों की उपेक्षा का परिणाम है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे पिछली सरकारों की विरासत बताया है और व्यापक समाधान का वादा किया है।
Delhi Pollution: दिल्ली में वायु और यमुना प्रदूषण: विरासत की समस्या और समाधान की नई पहल
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण और यमुना नदी का प्रदूषण पिछली आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार की वर्षों की उपेक्षा और अल्पकालिक नीतियों के कारण उपजी समस्याएं हैं। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि उनकी सरकार इन दोनों गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक और दीर्घकालिक रणनीति अपना रही है।
Delhi Pollution: पूर्ववर्ती नीतियों पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का प्रहार
एक विशेष साक्षात्कार में, गुप्ता ने जीआरएपी, ऑड-ईवन प्रणाली, कृत्रिम वर्षा और प्रदूषण रोधी यंत्रों जैसे अस्थायी उपायों की विफलता की आलोचनाओं को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये कदम कभी भी स्थायी समाधान के लिए नहीं थे, बल्कि तात्कालिक राहत के लिए अपनाए गए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण पिछली सरकारों की लापरवाही का सीधा नतीजा है। यदि हम प्रदूषण को केवल इस दृष्टिकोण से देखेंगे कि हवा साफ होनी चाहिए, तो हमें स्थायी नतीजे नहीं मिलेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हमें धूल, हवा और पानी पर एक साथ, एक समग्र दृष्टिकोण के साथ काम करना होगा।
पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए, मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि उन्होंने ढांचागत सुधारों को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए केवल अस्थायी राहत उपायों और प्रचार पर ही अत्यधिक भरोसा किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्प्रिंकलर, एंटी-स्मॉग गन और कृत्रिम धुंध जैसे उपाय केवल थोड़े समय के लिए ही राहत प्रदान करते हैं। उनका मानना है कि वास्तविक कार्य धूल नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में सुधार और दूरगामी योजना पर केंद्रित होना चाहिए था।
मुख्यमंत्री ने दिल्ली के वायु प्रदूषण के मुख्य कारणों के रूप में वाहनों से निकलने वाले धुएं, सड़क की धूल और कचरा प्रबंधन में मौजूद खामियों को उजागर किया, जिनकी वजह से सर्दियों के महीनों में भी शहर की वायु गुणवत्ता अक्सर ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी रहती है। उन्होंने यह भी बताया कि वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत माना जाता है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को उस स्तर तक विकसित नहीं किया गया, जिसकी वास्तव में आवश्यकता थी।
सार्वजनिक परिवहन का कायाकल्प और दीर्घकालिक समाधान
गुप्ता ने जानकारी दी कि उनकी सरकार ने दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को शून्य उत्सर्जन की ओर ले जाने के लिए एक चरणबद्ध और महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। उन्होंने कहा कि जब उनकी सरकार सत्ता में आई, तो उन्होंने यह योजना बनाई थी कि सार्वजनिक परिवहन 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ईंधन पर आधारित होना चाहिए। आज दिल्ली में लगभग 3,600 बसें हैं। सत्ता में आने के बाद, हमने 1,700 और बसें जोड़ीं, और दिसंबर 2026 तक यह संख्या 7,700 तक पहुंच जाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
हमारी आवश्यकता कुल 11,000 बसों की है, जिसे हम 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखते हैं। उन्होंने आगे बताया कि मेट्रो विस्तार परियोजनाओं, मेट्रो स्टेशनों के पास इलेक्ट्रिक वाहनों, ई-बाइकों और साइकिलों के माध्यम से अंतिम-मील कनेक्टिविटी को मजबूत करने, साथ ही अनुपयुक्त और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए पर्याप्त धन पहले ही स्वीकृत किया जा चुका है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
मुख्यमंत्री ने अपने बयान का समापन करते हुए कहा, “सरकार को हर मोर्चे पर चौतरफा बदलाव लाने होंगे। प्रदूषण की समस्या से स्थायी रूप से निपटने के लिए हर पहलू पर गंभीरता से काम करना अनिवार्य है।”




