
Assam CM News: राजनीति का अखाड़ा, जहां दांव-पेंच और रणनीति ही सबसे बड़े हथियार हैं, वहां कुछ चेहरे ऐसे उभरते हैं जो विरोधियों को धूल चटाकर अपनी बादशाहत कायम करते हैं। ऐसे ही एक करिश्माई नेता हैं असम के वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, जो आज अपना 57वां जन्मदिन मना रहे हैं। साल 2021 से असम के 15वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत सरमा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी। आज वह भारतीय जनता पार्टी के उन चुनिंदा नेताओं में से एक हैं, जिनकी पहचान किसी एक राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पटल पर एक दमदार रणनीतिकार के तौर पर बनी है। उनके जन्मदिन के इस ख़ास मौके पर, आइए जानते हैं उनके जीवन और राजनीतिक सफर से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें, जो उन्हें पूर्वोत्तर की राजनीति का एक बड़ा खिलाड़ी बनाती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा: एक कद्दावर राजनेता का उदय
हिमंत बिस्वा सरमा का जन्म 01 फरवरी 1969 को असम के जोरहाट में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा असम में ही पूरी की। अपनी अकादमिक यात्रा के दौरान, उन्होंने 1990 में गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज से राजनीतिक विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद, 1992 में उन्होंने इसी विषय में परास्नातक (एम.ए) किया और फिर कानून में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। शिक्षा के प्रति उनकी लगन यहीं नहीं थमी; 2006 में उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि भी अर्जित की।
कांग्रेस में राजनीति का ‘पहला पाठ’
हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1991 में कांग्रेस पार्टी के साथ की। उनकी प्रतिभा और सक्रियता ने उन्हें जल्द ही पार्टी के भीतर पहचान दिलाई। वर्ष 2001 में, उन्हें पहली बार जालुकबारी विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने का मौका मिला और उन्होंने शानदार जीत दर्ज की। इसके बाद उन्होंने 2006 और 2011 के विधानसभा चुनावों में भी लगातार जीत हासिल की, जिससे उनकी राजनीतिक पकड़ और मजबूत हुई। 2011 का चुनाव कांग्रेस के साथ उनका अंतिम विधानसभा चुनाव साबित हुआ। उस दौर में, वे तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की सरकार में शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्त और कृषि जैसे कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों के प्रभारी थे। असम की राजनीति में वे कांग्रेस के सबसे प्रभावी और लोकप्रिय चेहरों में से एक गिने जाते थे, जिनकी प्रशासनिक क्षमता और जमीनी पकड़ बेमिसाल थी।
बदलते समीकरण: कांग्रेस से बगावत का रास्ता
हालांकि, 2011 के बाद हिमंत बिस्वा सरमा और तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बीच मतभेद बढ़ने लगे। सरमा का मानना था कि गोगोई की पार्टी पर पकड़ कमजोर हो रही थी और नेतृत्व नई पीढ़ी को आगे लाने से हिचकिचा रहा था। यह आंतरिक खींचतान लंबे समय तक चली, जिससे पार्टी के भीतर भी उथल-पुथल मची रही। आखिरकार, वर्ष 2015 में, उन्होंने कांग्रेस पार्टी का साथ छोड़ने का बड़ा फैसला लिया। यह फैसला असम की राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ।
भाजपा में नया अध्याय और पूर्वोत्तर के रणनीतिकार
23 अगस्त 2015 को हिमंत बिस्वा सरमा भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। उनकी यह एंट्री न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत की राजनीतिक समीकरणों को बदलने वाली साबित हुई। भाजपा ने उनके अनुभव और जनसमर्थन का भरपूर लाभ उठाया। 2016 के विधानसभा चुनाव में, उन्होंने भाजपा उम्मीदवार के तौर पर फिर से जालुकबारी सीट से जीत दर्ज की और सर्बानंद सोनोवाल की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। उनकी रणनीतिक कुशलता ने उन्हें जल्द ही भाजपा के पूर्वोत्तर अभियान का मुख्य रणनीतिकार बना दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनकी दूरदर्शिता और संगठनात्मक क्षमता का ही परिणाम था कि भाजपा ने पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी अपनी पैठ बनाई। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/ उनकी मेहनत और निष्ठा का फल उन्हें 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद मिला।
असम के मुख्यमंत्री के रूप में कमान
2021 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की शानदार वापसी के बाद, हिमंत बिस्वा सरमा को विधायक दल का नेता चुना गया और वे असम के मुख्यमंत्री बने। आज वे भाजपा के लिए पूर्वोत्तर की राजनीति में सबसे बड़ा चेहरा हैं, जिनकी गिनती देश के सबसे प्रभावशाली मुख्यमंत्रियों में होती है। उनका जन्मदिन हमें उनके असाधारण राजनीतिक सफर और असम के विकास में उनके योगदान को याद दिलाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।








