

India Middle East Mediation: मध्य पूर्व के आकाश में युद्ध के काले बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में भारत को उम्मीद की किरण बनकर सामने आना चाहिए, जहां कूटनीति की शक्ति से समाधान की राह तलाशी जा सके।
संघर्ष विराम की उम्मीद: India Middle East Mediation में भारत निभा सकता है निर्णायक भूमिका, मुस्लिम धर्मगुरु ने पीएम मोदी से की अपील
India Middle East Mediation: धर्मगुरु मौलाना रज़वी का पीएम मोदी से आग्रह
अखिल भारतीय मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक महत्वपूर्ण अपील की है। उन्होंने भारत के अमेरिका, इज़राइल और ईरान के साथ स्थापित सुदृढ़ संबंधों का हवाला देते हुए आग्रह किया कि प्रधानमंत्री मोदी को मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता करनी चाहिए। उत्तर प्रदेश के बरेली में बोलते हुए, मौलाना रज़वी ने दृढ़ता से कहा कि युद्ध कभी भी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, बल्कि संघर्षों के निवारण के लिए बातचीत और संवाद ही एकमात्र मार्ग है।
उन्होंने ईरान के हालिया रुख की सराहना करते हुए कहा कि ईरान ने झुकने से इनकार कर अमेरिका के गौरव और इज़राइल के अहंकार को चूर-चूर कर दिया है। मौलाना रज़वी ने जोर देकर कहा कि इस जवाबी कार्रवाई से अमेरिका क्रोधित है और इज़राइल दहशत में है, जिसके चलते वे ईरान में सत्ता परिवर्तन चाहते हैं, जो कि संभव नहीं है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
भारत के इन सभी युद्धरत देशों के साथ संतुलित राजनयिक संबंधों को देखते हुए, मौलाना रज़वी ने प्रधानमंत्री मोदी से तत्काल हस्तक्षेप करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “मैं प्रधानमंत्री मोदी से कहना चाहता हूं कि उनके अमेरिका, इज़राइल और ईरान के साथ अच्छे संबंध हैं, और इन संबंधों के आधार पर उन्हें इस बढ़ते मध्य पूर्व तनाव को समाप्त करने के लिए मध्यस्थता करनी चाहिए।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और इज़राइल के बीच मध्य पूर्व में तनाव खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है, जिससे व्यापक संघर्ष की आशंका गहरा गई है। इस गंभीर मध्य पूर्व तनाव के बीच, भारत की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, जो आपको हर पल की अपडेट से रूबरू कराता है।
ईरान में शोक और क्षेत्रीय अस्थिरता
इस बीच, ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक मनाया जा रहा है, जिसके चलते देश भर में व्यापक शोक और विरोध प्रदर्शन देखे जा रहे हैं। सर्वोच्च नेता के कार्यालय ने राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है, जिसके तहत राष्ट्रीय ध्वज आधे झुकाए गए हैं और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सार्वजनिक सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। खामेनेई, जिन्होंने क्रांति के संस्थापक रुहोल्लाह खुमैनी का स्थान लिया था, 1989 से पश्चिमी प्रभावों के खिलाफ अपने अटूट प्रतिरोध के साथ ईरान का नेतृत्व कर रहे थे।



