

Israel-Iran Conflict: दुनिया एक नाज़ुक मोड़ पर खड़ी है, जहाँ आग की लपटें किसी भी पल भयानक रूप ले सकती हैं। ऐसे में भारत का मौन कई सवाल खड़े कर रहा है। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने इजरायल-ईरान संघर्ष में भारत के रुख पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या हम इस विवाद में भागीदार हैं या सच बोलने की हिम्मत नहीं करते?
इजरायल-ईरान संघर्ष: भारत की विदेश नीति पर कांग्रेस का हमला
खुर्शीद ने भाजपा सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि “हमारे प्रधानमंत्री इजरायल गए। उनके दौरे के तुरंत बाद इजरायल ने ईरान के खिलाफ शत्रुतापूर्ण कार्रवाई करने का फैसला किया। ईरान के साथ हमारे भी संबंध हैं… चाहे ईरान से बात हो या इजरायल से, हम क्यों नहीं बोल रहे हैं? हमारी आवाज कहां है?…” उन्होंने आगे कहा, “या तो हम जो कुछ भी हो रहा है उसमें भागीदार हैं, या हम सच बोलने की हिम्मत नहीं करते। जो भी हो, यह हमारे लिए बुरा है… यह दुनिया के लिए बुरा हो रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।”
कांग्रेस पार्टी ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने केंद्र सरकार से पश्चिम एशिया में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। कांग्रेस सांसद और संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना करते हुए ईरान के साथ परमाणु समझौते की बातचीत को “ढोंग” बताया। उन्होंने इन हमलों में अमेरिकी संलिप्तता का कारण इजरायल को उकसाना बताया।
जयराम रमेश ने अपने बयान में लिखा कि “राष्ट्रपति ट्रंप हफ्तों से ईरान के साथ कूटनीति और बातचीत का ढोंग करते रहे। इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू और अमेरिका के कट्टरपंथियों के उकसावे पर उन्होंने सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य से सैन्य हमला शुरू किया है।” पोस्ट में आगे लिखा गया कि कांग्रेस इन हमलों की निंदा करती है और भारत सरकार से शत्रुता को तत्काल समाप्त करने में मदद करने का आह्वान करती है। भारत सरकार को पश्चिम एशिया क्षेत्र में रहने और काम करने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने चाहिए। इस West Asia crisis पर भारत को अपना रुख स्पष्ट करना होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
हमले और बढ़ते तनाव का लेखा-जोखा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर एक संयुक्त सैन्य हमला किया था, जिसे ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ कोडनेम दिया गया था। इस हमले में सैन्य ठिकानों, मिसाइल उत्पादन सुविधाओं और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय के पास के इलाकों को निशाना बनाया गया। दक्षिणी तेहरान के कई मंत्रालयों पर भी हमले हुए, और निवासियों ने जोरदार धमाकों की आवाजें सुनीं। इजरायल द्वारा किए गए इस पूर्व-नियोजित सैन्य हमले के बाद क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है, जिसमें राजधानी समेत कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया था। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/।
कांग्रेस का मानना है कि इस West Asia crisis में भारत की चुप्पी न केवल उसकी वैश्विक साख को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि पश्चिम एशिया में रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर रही है। भारत जैसे बड़े और प्रभावशाली देश का ऐसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर स्पष्ट और दृढ़ रुख अपनाना अत्यंत आवश्यक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





