Jammu Spy Pigeon: सरहद पर हर हलचल पर पैनी नज़र रखने वाले सुरक्षा बलों के लिए, कभी-कभी सबसे छोटा और मासूम दिखने वाला प्राणी भी बड़ा सवाल बन जाता है। क्या यह महज़ एक परिंदा है या इसके परों में छिपी है कोई गहरी साज़िश? Jammu Spy Pigeon: जम्मू के अखनूर सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास एक अग्रिम गांव में शनिवार को पकड़े गए एक संदिग्ध कबूतर ने सुरक्षा एजेंसियों को एक बार फिर चौकन्ना कर दिया है।
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस हल्के भूरे रंग के संदिग्ध कबूतर को शनिवार सुबह खराह गांव में 13 वर्षीय आर्यन नामक लड़के ने पकड़ा। इस कबूतर के प्रत्येक पंख पर दो काली धारियां हैं, और इसके पैरों में लाल व पीले रंग के छल्ले बंधे हुए मिले, जिन पर ‘रहमत सरकार’ और ‘रिजवान 2025’ के साथ कुछ संख्याएं अंकित हैं। इसके पंखों पर भी एक मुहर लगी पाई गई है। इस बरामदगी के बाद इलाके में हलचल तेज हो गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह संदिग्ध कबूतर अब पल्लनवाला पुलिस को जांच के लिए सौंप दिया गया है। सीमावर्ती इलाकों में इस तरह के मामले नए नहीं हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इन्हें बेहद गंभीरता से लेती हैं, खासकर जब कोई वस्तु असामान्य हो। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
जम्मू स्पाई पिजन: क्या यह जासूसी का नया पैंतरा?
सीमापार से अक्सर संदेश भेजने या जासूसी के लिए प्रशिक्षित पक्षियों के इस्तेमाल का संदेह बना रहता है। इस तरह के ‘संदिग्ध कबूतर’ पहले भी कई बार पकड़े जा चुके हैं। हालाँकि, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में ‘कबूतरबाजी’ एक लोकप्रिय शौक है, जहाँ लोग अपने कबूतरों की पहचान के लिए उनके पैरों में छल्ले और पंखों पर मुहर लगाते हैं। इस संभावना को भी खारिज नहीं किया जा सकता।
जासूसी का संदेह:
• पाकिस्तान की ओर से अक्सर संदेश भेजने या जासूसी के लिए प्रशिक्षित पक्षियों का उपयोग किया जाता रहा है।
कबूतरबाजी का खेल:
• पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में ‘कबूतरबाजी’ एक लोकप्रिय शौक है। लोग अक्सर अपने कबूतरों की पहचान के लिए उनके पैरों में छल्ले और पंखों पर मुहर लगाते हैं।
जांच एजेंसियों की कड़ी निगरानी: क्या कोई सुराग मिलेगा?
कबूतर को पकड़ने के बाद तुरंत पल्लनवाला पुलिस स्टेशन के हवाले कर दिया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि छल्लों पर लिखे नंबरों और कोड का कोई गहरा अर्थ है या यह केवल किसी कबूतर क्लब की पहचान मात्र है। यह एक संवेदनशील मामला है और जांच जारी है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



