
Jammu and Kashmir News: देवभूमि में दहशतगर्दी की जड़ों पर एक और चोट, सरकारी तंत्र में छिपे गद्दारों पर गिरी गाज। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व में आतंकियों के नापाक मंसूबों पर निर्णायक वार। जम्मू-कश्मीर में सरकारी तंत्र में व्याप्त आतंकी गतिविधियों और राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ एक बड़ी और सख्त कार्रवाई की गई है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को कथित आतंकी संबंधों के आरोप में पांच सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इन सक्रिय सहयोगियों को आतंकी संगठनों और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा सरकारी महकमों में शामिल किया गया था। इन्होंने पिछले कई दशकों में प्रशासन में घुसपैठ कर सरकारी तंत्र को अंदर से खोखला किया और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा किया।
जम्मू और कश्मीर में आतंकी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई: 5 कर्मचारी सेवामुक्त
इन पांचों कर्मचारियों को संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (सी) के तहत बर्खास्त किया गया है, जिसके तहत सरकार को किसी जांच या सुनवाई की आवश्यकता नहीं होती यदि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा हो। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में एक ऐसा शिक्षक भी शामिल है, जो जांचकर्ताओं के मुताबिक, पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैबा (एलईटी) के लिए काम कर रहा था। सूत्रों ने बताया कि उसे अप्रैल 2022 में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पुलिस के खिलाफ अपनी योजना को अंजाम देने से पहले ही धर दबोचा था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अन्य कर्मचारियों में हिजबुल मुजाहिदीन (एचएम) से कथित तौर पर जुड़ा एक लैब तकनीशियन, लश्कर-ए-तैबा से संबंधित एक सहायक लाइनमैन, एचएम से कथित तौर पर जुड़ा वन विभाग का एक फील्ड वर्कर और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग का एक ड्राइवर शामिल हैं। इन सभी पर गंभीर आतंकी संबंध के आरोप हैं, जो उनकी सेवा समाप्ति का आधार बने।
LG सिन्हा का ‘आतंक मुक्त जम्मू-कश्मीर’ अभियान
सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 2021 में आतंकी तंत्र को बेनकाब करने और उसकी नींव तोड़ने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया था। वित्तपोषकों से लेकर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं तक, सभी राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ उनकी निर्णायक और ठोस कार्रवाई ने आतंकी ढांचे को काफी हद तक ध्वस्त कर दिया है। 2021 से अब तक, जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल ने ऐसे 85 से अधिक सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं, जो आतंकवादी समूहों के लिए काम करते पाए गए थे।
सूत्रों ने संकेत दिया है कि यह कार्रवाई सरकारी व्यवस्था से आतंकवादी प्रभाव को पूरी तरह से खत्म करने के उद्देश्य से की गई है। सूत्रों का कहना है, “सिन्हा द्वारा की गई सख्त कार्रवाई से सरकारी तंत्र शुद्ध होगा और उसकी अखंडता मजबूत होगी।” यह घटना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा गुरुवार को जम्मू-कश्मीर पर उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने के बाद हुई है। शाह ने सभी सुरक्षा बलों को “आतंकवादी ढांचे और आतंकवाद वित्तपोषण को निशाना बनाते हुए आतंकवाद विरोधी अभियान मिशन मोड में जारी रखने” के निर्देश दिए थे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
गृह मंत्री ने सभी सुरक्षा एजेंसियों को “सतर्क रहने और अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद हासिल की गई उपलब्धियों को बनाए रखने और ‘आतंकवाद मुक्त जम्मू-कश्मीर’ के लक्ष्य को जल्द से जल्द प्राप्त करने के लिए तालमेल से काम करते रहने” का भी निर्देश दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी, जिसके आतंकी संबंध हों, वह अब इस व्यवस्था का हिस्सा नहीं रहेगा।





