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जनवरी, 7, 2026

कल्याण सिंह की विरासत: जब सत्ता से बढ़कर था राम मंदिर का सम्मान

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Kalyan Singh: राजनीति के अखाड़े में ऐसे कुछ ही वीर होते हैं, जिनकी निष्ठा पहाड़-सी अटल और निर्णय गंगा-से पवित्र होते हैं। बाबूजी कल्याण सिंह उन्हीं विरले व्यक्तित्वों में से एक थे, जिन्होंने सत्ता को राम काज के आगे तुच्छ समझा और अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।

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कल्याण सिंह की विरासत: जब सत्ता से बढ़कर था राम मंदिर का सम्मान

कल्याण सिंह: राम भक्तों के सम्मान में सत्ता का बलिदान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को उनकी 94वीं जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री योगी ने सोमवार को कहा कि कल्याण सिंह का कार्यकाल हमेशा सुशासन, विकास और राष्ट्रवादी मिशन को आगे बढ़ाने के लिए याद किया जाएगा। कल्याण सिंह ने राम भक्तों और संतों की भावनाओं का सम्मान करते हुए अपनी सत्ता का बलिदान करने में जरा भी संकोच नहीं किया। जब उनकी सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा था और अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन अपने चरम पर पहुँच रहा था, तब बाबूजी ने प्रभु श्री राम के प्रति अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानते हुए सत्ता त्याग दी। उन्होंने गुलामी के प्रतीक ढांचे को हटाने के जिस संकल्प के साथ राम भक्त आगे बढ़ रहे थे, उसकी सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर ली और भगवान राम के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में तनिक भी देर नहीं लगाई।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि कल्याण सिंह भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री थे जिन्होंने 1991 में उत्तर प्रदेश की बागडोर संभाली थी। उस समय प्रदेश में अव्यवस्था, अराजकता और गुंडागर्दी चरम पर थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आतंकवादी गतिविधियाँ सिर उठा रही थीं और सरकारी योजनाओं का लाभ गाँव, गरीब, किसान, नौजवान और महिलाओं तक नहीं पहुँच पा रहा था। एक तरफ जहाँ कुव्यवस्था का राज था, वहीं दूसरी ओर हिन्दू समाज 500 वर्षों की गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति पाने के लिए छटपटा रहा था। इन विषम परिस्थितियों में बाबूजी ने उत्तर प्रदेश की कमान संभाली।

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उनके मुख्यमंत्री बनते ही कुछ ही महीनों में लोगों के मन में यह विश्वास जागृत होने लगा कि उत्तर प्रदेश अब सुशासन की राह पर चलकर विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में श्रद्धेय बाबूजी का कार्यकाल उनके अतुलनीय सुशासन, चहुंमुखी विकास और राष्ट्रवाद के प्रति उनके अटूट समर्पण के लिए सदैव अविस्मरणीय रहेगा। यही कारण है कि आज हर भारतवासी उन्हें इस रूप में याद करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

एक साधारण किसान से सशक्त राष्ट्र नायक तक का सफर

योगी आदित्यनाथ ने बताया कि एक सामान्य किसान परिवार में जन्मे कल्याण सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पाठशाला में राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ा। उन्होंने आजीवन इस राष्ट्रवाद को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाकर निरंतर कार्य किया। उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भले ही आज वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन एक विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और राज्यपाल के रूप में उनकी राष्ट्र सेवा पूरे देशवासियों के लिए हमेशा अविस्मरणीय रहेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनकी दूरदर्शिता और जनसेवा के प्रति उनका समर्पण सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

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