

राहुल गांधी न्यूज: राजनीति के अखाड़े में बयानों के बाण कब किसकी ढाल तोड़ दें, कहना मुश्किल। संसद का हर सत्र अपनी मर्यादाओं और हंगामों के लिए याद किया जाता है, और इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेता के तौर-तरीकों पर तंज कसा है, जिसकी गूंज पूरे सियासी गलियारे में सुनाई दे रही है।
केंद्रीय मंत्री रिजिजू का राहुल गांधी पर तंज: क्या परिपक्व विपक्ष से ही समृद्ध होगा लोकतंत्र?
संसदीय गरिमा और राहुल गांधी: रिजिजू के बयान के मायने
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में कांग्रेस नेता उन पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि एक परिपक्व विपक्ष का नेता सदन के सुचारू संचालन और संसदीय लोकतंत्र को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनकी ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब संसद में विपक्ष की भूमिका और उसकी कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी पोस्ट में पूर्व विदेश मंत्री और विपक्ष की दिवंगत नेता सुषमा स्वराज को भी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने स्वराज को सशक्त वाक्पटुता, संवेदनशीलता और सेवा का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनकी स्मृति और आदर्श सदा हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह बयान सुषमा स्वराज की जयंती के अवसर पर दिया गया।
रिजिजू की ये टिप्पणियां उस वक्त सामने आई हैं जब बजट सत्र के पहले चरण में लोकसभा में खासा हंगामा देखने को मिला। विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के संस्मरण से उद्धरण देने के प्रयास ने विवाद खड़ा कर दिया था। इसके अलावा, लोकसभा में ‘एपस्टीन फाइल्स’ और भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते पर उनकी टिप्पणियों को लेकर भी सत्ताधारी भाजपा ने कड़ी आलोचना की थी, जिसमें आरोपों को निराधार बताया गया था। यह सब संसदीय मर्यादा को बनाए रखने के लिए एक चुनौती बन गया था।
विशेषाधिकार प्रस्ताव और सरकार का रुख
इससे पहले, शुक्रवार को किरेन रिजिजू ने घोषणा की थी कि सरकार ने कांग्रेस सांसद उनके खिलाफ प्रस्तावित विशेषाधिकार प्रस्ताव को वापस लेने का फैसला किया है। उन्होंने मीडिया को बताया कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा विपक्ष के नेता के खिलाफ सदन में एक सारगर्भित प्रस्ताव पेश करने के बाद केंद्र ने इस प्रस्ताव को वापस लिया है। सरकार अब अध्यक्ष से परामर्श करके यह तय करेगी कि मामले को विशेषाधिकार समिति या आचार समिति को भेजा जाए, या सीधे सदन में चर्चा के लिए लिया जाए। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस पूरे घटनाक्रम पर सियासी गलियारों की पैनी नजर है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
रिजिजू ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने प्रस्ताव लाने का निर्णय इसलिए किया था क्योंकि उन्होंने नियमों का उल्लंघन करते हुए एक अप्रकाशित पुस्तक का उल्लेख किया था। उन्होंने यह भी बताया कि विपक्षी नेता ने अपने बजट भाषण में ‘देश बिक गया’ और प्रधानमंत्री के लिए कई ‘बेतुकी बातें’ कही थीं, जिस पर सरकार उन्हें नोटिस देना चाहती थी। निशिकांत दुबे के ठोस प्रस्ताव के बाद, सरकार ने अपना प्रस्ताव फिलहाल वापस ले लिया है, ताकि मामले की गहन समीक्षा हो सके और संसदीय मर्यादा का उल्लंघन न हो। इस बीच, विपक्षी नेता ने गुरुवार को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को उनके खिलाफ “विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने” की चुनौती दी और किसानों के लिए लड़ने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

