

Maharashtra Political Controversy: राजनीति की रणभूमि में जब ज़ुबानें तलवार बनती हैं, तो अक्सर चिंगारी से आग लग जाती है। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष के एक बयान ने ऐसी ही आग लगाई है, जिसने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है।
महाराष्ट्र में राजनीतिक घमासान: इस बयान से गहराया Maharashtra Political Controversy
सपकाल के बयान पर Maharashtra Political Controversy का बवंडर
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने एक भड़काऊ घोषणा कर सियासी पारा चढ़ा दिया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की “जूँ काटने” वाले को 10 लाख रुपये का इनाम देने का ऐलान किया है। यह घोषणा सपकाल द्वारा टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से करने के बाद आई है, जिसने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
यह विवादास्पद बयान अहिल्यानगर स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज स्मारक के सामने आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान दिया गया। भाजपा नेता और कार्यकर्ता सपकाल के बयान की कड़ी निंदा करने के लिए एकजुट हुए थे। उनका आरोप था कि यह तुलना पूजनीय मराठा योद्धा की विरासत का अपमान है और यह मराठा गौरव को ठेस पहुंचाने का प्रयास है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। विरोध प्रदर्शन के दौरान, पार्टी कार्यकर्ताओं ने जूते दिखाए, गगनभेदी नारे लगाए और सपकाल की तस्वीर को एक सार्वजनिक स्थान पर रखकर पैरों से रौंद दिया, जो उनके गुस्से को दर्शाता था।
इसी विरोध स्थल पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने खुले तौर पर घोषणा की कि जो कोई भी सपकाल की ज़ुबान काटेगा, उसे अहिल्यानगर भाजपा इकाई द्वारा 10 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। इस तरह के विवादास्पद बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
विपक्षी दलों की कड़ी निंदा और लोकतांत्रिक संवाद पर सवाल
एक भाषण में पार्टी पदाधिकारी ने सपकाल की टिप्पणियों की तीखी आलोचना की और नकद पुरस्कार की घोषणा करते हुए बेहद कठोर भाषा का इस्तेमाल किया। इस बयान की विपक्षी नेताओं ने व्यापक निंदा की है, जिन्होंने इसे “खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना” बताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी न केवल तनाव बढ़ा सकती है बल्कि लोकतांत्रिक संवाद और स्वस्थ राजनीतिक बहसों को भी कमजोर कर सकती है, जो किसी भी समाज के लिए ठीक नहीं है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सपकाल ने मालेगांव नगर निगम में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने को लेकर हुए एक अलग विवाद पर अपनी राय दी थी। अपने रुख का बचाव करते हुए सपकाल ने स्पष्ट किया था कि जिस प्रकार छत्रपति शिवाजी महाराज ने लोगों में साहस और स्वतंत्रता की भावना को प्रेरित किया, उसी प्रकार टीपू सुल्तान ने भी अंग्रेजों के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी थी और उन्हें प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में देखा जाना चाहिए। यह उनका निजी विचार था, लेकिन इसने भाजपा कार्यकर्ताओं को भड़का दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



