Maharashtra Civic Polls: लोकशाही के मंदिर में जब आस्था डगमगाने लगे, और वोट की स्याही भी फरेब का रंग ओढ़ ले, तो सवाल उठना लाजिमी है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में चल रहे स्थानीय निकाय चुनावों में बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली का आरोप लगाकर राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है।
Maharashtra Civic Polls: उद्धव ठाकरे का सनसनीखेज आरोप, लोकतंत्र खतरे में, स्याही हटाई जा रही है!
Maharashtra Civic Polls में धांधली के गंभीर आरोप
ठाकरे ने एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि मतदान के बाद मतदाताओं की उंगलियों पर लगाई जाने वाली अमिट स्याही को नेल पॉलिश रिमूवर और सैनिटाइजर से आसानी से हटाया जा रहा है। इस गंभीर आरोप से यह संदेह गहरा गया है कि कुछ लोग एक से अधिक बार मतदान कर पा रहे हैं, जो चुनावी प्रक्रिया की शुचिता पर सीधा हमला है। उन्होंने इस स्थिति को सत्ताधारी महायुति गठबंधन और राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) के बीच “मिलीभगत” का स्पष्ट प्रमाण बताया।
यह शायद पहला ऐसा चुनाव है जिसमें स्याही के तुरंत हटने की इतनी शिकायतें सामने आ रही हैं। चुनाव आयोग और सत्ताधारी दल के बीच मिलीभगत के संकेत मिल रहे हैं, और कई मतदान अनियमितताएं सामने आ रही हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग पर तीखा कटाक्ष करते हुए सवाल किया कि क्या उन्होंने स्याही को इतनी आसानी से हटाने के लिए किसी सैनिटाइजर एजेंसी को काम पर रखा था? उन्होंने चुनाव आयुक्त के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की, और उनके पिछले नौ वर्षों के कार्यकाल पर सवाल उठाया।
ठाकरे ने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग एक सेवक है, राजा नहीं, और उसका काम निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। उन्होंने सभी मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान करने का आग्रह किया, और यह भी बताया कि कई मतदाताओं को अपने मतदान केंद्र की जानकारी नहीं होने से भी समस्याएं आ रही हैं।
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चुनाव आयोग पर सीधा हमला
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, उद्धव ठाकरे ने अपने मोबाइल पर कथित सबूत दिखाए, जिसमें सैनिटाइजर या नेल पॉलिश रिमूवर से स्याही आसानी से हटती दिख रही थी। उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि यहां लोकतंत्र की हत्या की जा रही है।” उन्होंने आगे सवाल किया कि चुनाव आयुक्त पिछले नौ सालों से क्या कर रहे हैं, जब बीएमसी चुनाव इतने लंबे समय बाद हो रहे हैं? यह जनता का पैसा है और ऐसा लगता है कि हमारे कर्मचारियों को हर दिन चुनाव आयुक्त के कार्यालय में जाकर उनसे उनके काम का हिसाब पूछना पड़ेगा, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इन आरोपों ने मतदाता धोखाधड़ी के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की आवश्यकता पर फिर से बहस छेड़ दी है। उद्धव ठाकरे के इन बयानों के बाद, राज्य चुनाव आयोग और सत्ताधारी महायुति की प्रतिक्रिया देखना महत्वपूर्ण होगा, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
लोकतंत्र की हत्या का दावा
ठाकरे का यह आरोप ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है। स्थानीय निकाय चुनाव राज्य की राजनीति में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, और इन पर लगे धांधली के आरोपों से चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग और संबंधित प्राधिकारी इन आरोपों पर क्या कदम उठाते हैं और मतदाताओं का विश्वास कैसे बहाल करते हैं।

