

Union Budget 2026: देश की चुनावी सियासत का अखाड़ा बना बजट, सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी। मोदी सरकार के आखिरी पूर्ण बजट पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने साधा निशाना, कहा- दूरदर्शिता और इच्छाशक्ति का अभाव।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के केंद्रीय बजट पर रविवार को तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट देश की गंभीर आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक नीतिगत दूरदर्शिता और राजनीतिक इच्छाशक्ति से पूरी तरह वंचित है। खरगे ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ की क्या स्थिति है और दावा किया कि विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 13% पर स्थिर है।
Union Budget 2026: क्यों बेजान दिखा खरगे को यह बजट?
खरगे ने किसानों के प्रति सरकार के रवैये पर भी गहरी निराशा जताई। उन्होंने कहा कि हमारे अन्नदाता किसान आज भी सार्थक कल्याणकारी सहायता या किसी ठोस आय सुरक्षा योजना की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन बजट में उनके लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं दिखता। कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि देश में असमानता ब्रिटिश राज के स्तर को भी पार कर चुकी है। हैरत की बात यह है कि इस गंभीर मुद्दे का बजट में उल्लेख तक नहीं है, और न ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग व अल्पसंख्यक समुदायों के लिए कोई विशेष सहायता प्रदान की गई है।
खरगे ने तीखे शब्दों में कहा कि मोदी सरकार के पास अब कोई नए विचार नहीं बचे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह बजट भारत की अनेक आर्थिक चुनौतियां, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का एक भी समाधान प्रस्तुत नहीं करता। उनके अनुसार, ‘मिशन मोड’ अब ‘चुनौती मार्ग’ बन गया है, और ‘सुधार एक्सप्रेस’ शायद ही किसी ‘सुधार’ जंक्शन पर रुकती है। यह स्पष्ट नीतिगत दूरदृष्टि और राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव को दर्शाता है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार पर गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही राज्य सरकारों को राहत प्रदान करने में विफल रहने का भी आरोप लगाया। उन्होंने वित्त आयोग की सिफारिशों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये सिफारिशें राज्यों को कोई खास मदद देती नहीं दिखतीं। खरगे ने चेतावनी दी कि इस प्रकार संघवाद को भारी नुकसान हो रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। विनिर्माण क्षेत्र में कोई पुनरुद्धार रणनीति नहीं दिखती, और यह अब भी 13% पर अटका हुआ है। ‘मेक इन इंडिया’ की बात कहाँ गई?
खरगे ने रोजगार सृजन और कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार की किसी “गंभीर योजना” के अभाव पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि सामाजिक सुरक्षा और कल्याण पर कोई ठोस घोषणाएं नहीं की गई हैं, और मनरेगा की जगह लागू किए गए नए कानून के लिए भी बजट में कोई आवंटन नहीं किया गया है। ये सभी पहलू भारत की वर्तमान आर्थिक चुनौतियां को और गहरा कर रहे हैं, जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकती।
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इससे पहले, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण पर विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि वित्त मंत्री का भाषण आम आदमी के हितों और देश के विकास पर केंद्रित था। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष हर राष्ट्रीय मुद्दे पर सिर्फ राजनीति करना चाहता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट देश की मौजूदा आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों के समाधान के बजाय एक नए राजनीतिक टकराव का मैदान बन गया है। जहां सरकार इसे विकसित भारत की नींव बता रही है, वहीं विपक्ष इसे निराशाजनक और दिशाहीन करार दे रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच आम जनता को बजट से कितनी राहत मिल पाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




