back to top
⮜ शहर चुनें
फ़रवरी, 13, 2026
spot_img

Manipur Violence: सुप्रीम कोर्ट ने राहत समिति का कार्यकाल 2026 तक बढ़ाया, जानें पूरी रिपोर्ट

spot_img
- Advertisement - Advertisement

Manipur Violence: मणिपुर में शांति की तलाश में न्यायपालिका का एक और कदम, जहां जातीय हिंसा की आग में झुलसी ज़मीन पर उम्मीदों के बीज बोने की कोशिश जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने उस उच्च-स्तरीय समिति का कार्यकाल बढ़ा दिया है, जो राहत और पुनर्वास कार्यों की निगरानी कर रही है।

- Advertisement -

Manipur Violence: सुप्रीम कोर्ट ने राहत समिति का कार्यकाल 2026 तक बढ़ाया, जानें पूरी रिपोर्ट

Manipur Violence: पीड़ितों को राहत पहुंचाने की कवायद

मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य में राहत और पुनर्वास उपायों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए गठित सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की उच्च-स्तरीय समिति का कार्यकाल 31 जुलाई, 2026 तक बढ़ा दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले के तथ्यों की गंभीरता को देखते हुए समिति की निरंतरता को आवश्यक बताया और उससे निर्धारित अवधि के भीतर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने का आग्रह किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

- Advertisement -

समिति की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता विभा दत्ता मखीजा ने अदालत को सूचित किया कि समिति ने अभी तक अपना निर्धारित कार्य पूरा नहीं किया है। उन्होंने बताया कि समिति अब तक 32 रिपोर्टें प्रस्तुत कर चुकी है और कई और रिपोर्टें प्रक्रियाधीन हैं, साथ ही जुलाई 2025 के बाद से इसे कोई विस्तार नहीं दिया गया था। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरामानी भी उपस्थित थे। पीठ ने इन बातों पर ध्यान देते हुए टिप्पणी की, “हमारा मानना है कि समिति का कार्य जारी रखना आवश्यक है और इसे 31 जुलाई, 2026 तक का अतिरिक्त समय दिया जाता है। हम समिति से अनुरोध करते हैं कि वह निर्धारित अवधि के भीतर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने का प्रयास करे।”

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: Kashmir Horticulture के लिए वरदान या अभिशााप?

जनजातीय कुकी समुदाय और प्रभावशाली मैतेई समुदाय के बीच बड़े पैमाने पर हुई जातीय हिंसा के बाद मणिपुर में मानवीय सहायता और राहत और पुनर्वास कार्य के प्रयासों की निगरानी के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अगस्त 2023 में एक समिति का गठन किया गया था। इस पूर्णतः महिला समिति में तीन पूर्व उच्च न्यायालय न्यायाधीश शामिल हैं – जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय की पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल; बॉम्बे उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति शालिनी पी जोशी; और दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आशा मेनन। इस समिति को महिलाओं के विरुद्ध हिंसा, राहत शिविरों में रहने वालों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य और पीड़ितों को मुआवजे के भुगतान जैसे संवेदनशील मुद्दों की जांच करने का कार्य सौंपा गया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

समिति की उपलब्धियां और आगे की चुनौतियां

पिछले दो वर्षों में, इस पैनल ने मानवीय संकट के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को संबोधित करते हुए विभिन्न रिपोर्टें प्रस्तुत की हैं। इनमें राहत शिविरों में आवश्यक आपूर्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करना, विस्थापित व्यक्तियों के लिए चिकित्सा देखभाल तक पहुंच बनाना, क्षतिग्रस्त धार्मिक स्थलों की बहाली, दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में मारे गए लोगों के शवों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार और प्रभावितों को मुआवजे का वितरण शामिल है। यह समिति निरंतर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रही है, जिसका उद्देश्य मणिपुर में स्थिरता और सामान्य स्थिति बहाल करने में मदद करना है, खासकर राहत और पुनर्वास कार्य में। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

एयर इंडिया पर DGCA का 1 करोड़ का जुर्माना: Aviation Safety में बड़ी चूक

Aviation Safety Aviation Safety: भारतीय विमानन नियामक DGCA ने हाल ही में एयर इंडिया पर...

पासकी (Passkey) से अपने गूगल अकाउंट को कैसे बनाएं अभेद्य?

Passkey: आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन अकाउंट्स की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन...

Suryakumar Yadav की नोरा फतेही के डांस पर यह प्रतिक्रिया हुई वायरल, ईशान और अर्शदीप भी नहीं रोक पाए हंसी!

Suryakumar Yadav: टी20 वर्ल्ड कप का खुमार अभी से फैंस के सिर चढ़कर बोल...

ये रिश्ता क्या कहलाता है: अरमान का भयंकर गुस्सा और अभिरा के अतीत का दर्दनाक खुलासा!

Yeh Rishta Kya Kehlata Hai News: टीवी के पॉपुलर शो 'ये रिश्ता क्या कहलाता...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें