

Middle East Conflict: रणभूमि बनी दुनिया की राजनीति में, जहां हर चाल एक नए युद्ध का पैगाम लाती है, अजमेर शरीफ दरगाह के प्रमुख ने मध्य पूर्व के बिगड़ते हालातों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उनकी आवाज सिर्फ एक टिप्पणी नहीं, बल्कि एक करारी चोट है उन ताकतों पर जो अपने स्वार्थों के लिए वैश्विक शांति को दांव पर लगा रही हैं।
Middle East Conflict: अजमेर शरीफ प्रमुख ने अमेरिकी-इजरायली ‘तानाशाही’ को घेरा, खामेनेई की हत्या पर भड़का मुस्लिम जगत
Middle East Conflict: ‘यह युद्ध नहीं, तानाशाही है’
सोमवार को अजमेर शरीफ दरगाह के प्रमुख सैयद ज़ैनुल आबेदीन ने ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच चल रहे टकराव को ‘युद्ध’ मानने से इनकार करते हुए इसे ‘तानाशाही का कृत्य’ करार दिया। आबेदीन ने स्पष्ट शब्दों में अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह अपने हितों की पूर्ति के लिए दुनिया के नेताओं को बंधक बना रहा है। उन्होंने हाल ही में अमेरिकी-इज़राइल के संयुक्त सैन्य अभियान में मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई को केवल ईरान का सर्वोच्च नेता ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के शिया मुसलमानों का आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी बताया। उनकी मृत्यु पर पूरी दुनिया के शिया समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है। सैयद ज़ैनुल आबेदीन की यह बेबाक टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक गंभीर बहस को जन्म दे सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अजमेर शरीफ प्रमुख ने जोर देकर कहा कि ईरान और इज़राइल के बीच जो कुछ भी हो रहा है, उसे युद्ध का नाम नहीं दिया जा सकता। यह सीधे तौर पर एक तानाशाही है, जहां एक महाशक्ति अपने एजेंडे को थोपने का प्रयास कर रही है। इधर, अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के विरोध में भारत भर में शिया मुसलमानों द्वारा बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए गए। इस गंभीर Ayatollah Khamenei death पर अखिल भारतीय शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने घोषणा की कि दिवंगत नेता के सम्मान में व्यवसाय बंद रहेंगे और शोक स्वरूप काले झंडे फहराए जाएंगे।
जानकारी के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हमलों का शिकार हुए, जिसमें उनकी बेटी, पोते, बहू और दामाद भी मारे गए। मौलाना यासूब अब्बास ने बताया कि सभी व्यवसाय तीन दिनों तक बंद रहेंगे और लोगों के घरों पर काले झंडे फहराए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, उनके निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए विशेष सभाएं आयोजित की जाएंगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
एक दिन पहले, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी शिया समुदाय के सदस्यों ने छोटे इमामबाड़ा में ईरानी सर्वोच्च नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा के दौरान, शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद ने स्पष्ट घोषणा की कि ईरान के लोग किसी के सामने नहीं झुकेंगे और इजरायल व अमेरिका को अंततः हार का सामना करना पड़ेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसी कड़ी में, अलीगढ़ में, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के छात्रों ने भी ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या की निंदा करते हुए एक विशाल मोमबत्ती मार्च निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सामूहिक रूप से खामेनेई के लिए अंतिम संस्कार की प्रार्थना की।
वैश्विक शिया समुदाय में शोक और आक्रोश
इस Ayatollah Khamenei death ने वैश्विक स्तर पर तनाव को और बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना के दीर्घकालिक परिणाम होंगे जो मध्य पूर्व की भू-राजनीति को नया आयाम देंगे। दुनिया भर के शिया मुसलमान अपने आध्यात्मिक नेता की इस तरह की हत्या से स्तब्ध और आक्रोशित हैं, और इसका असर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर साफ देखा जा सकेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




