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Middle East Crisis: पश्चिम एशिया संकट से निपटने के लिए भारत की राष्ट्रीय एकता और सहयोग क्यों है जरूरी?

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जब भूमध्य सागर से लाल सागर तक आग सुलग रही हो, और उसकी आंच भारत तक महसूस की जा रही हो, तब एकजुटता ही ढाल बनती है। Middle East Crisis: राष्ट्रीय हितों की रक्षा और उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच राष्ट्रीय एकता और सहयोग ही एकमात्र मार्ग है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसी महत्व पर शनिवार को जोर दिया, जब उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से पैदा हुई जटिलताओं को रेखांकित किया। उनकी यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई बैठक के ठीक एक दिन बाद आई है, जहाँ क्षेत्र में हुए हालिया घटनाक्रमों और भारत पर उनके संभावित प्रभावों के मद्देनजर तैयारियों की समीक्षा की गई थी।

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Middle East Crisis: राष्ट्रीय एकता और साझा हित की प्राथमिकता

थरूर ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक मतभेद एक तरफ, लेकिन राष्ट्रीय हित हमेशा सर्वोपरि रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित के मामले में हम सब एक हैं। यदि आज केरल में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की सरकार बनती है, तो भी हम केंद्र से अलग नहीं होंगे; हमें राष्ट्रीय हित का ध्यान रखना होगा। केरल देश के बाकी हिस्सों से गहराई से जुड़ा हुआ है, और राज्य स्तर के फैसले व्यापक राष्ट्रीय नीतियों के अनुरूप ही होने चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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उन्होंने सहकारी संघवाद की आवश्यकता पर भी बल दिया, यह बताते हुए कि शासन में केंद्र और राज्य दोनों की साझा जिम्मेदारियां हैं। इन मामलों पर केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करना हमारा कर्तव्य है। इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि हमें चुनावों के दौरान राजनीतिक रूप से सहमत होना पड़े। यह सहयोग पारस्परिक संघवाद का एक उदाहरण होना चाहिए, जहाँ दोनों पक्ष देश के लिए मिलकर काम करें।

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वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल के बीच, भारत के राजनयिक प्रयास सराहनीय हैं। प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत को थरूर ने एक सकारात्मक घटनाक्रम बताया। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि अमेरिका के राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री आपस में बातचीत कर रहे हैं। वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में हमें प्रमुख देशों से संपर्क बनाए रखना चाहिए। भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा जी7 देशों के साथ जारी राजनयिक प्रयासों को भी उन्होंने एक महत्वपूर्ण कदम बताया। यह सुनिश्चित करना कि हर राज्य केंद्र के साथ मिलकर काम करे, देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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वैश्विक अनिश्चितता और भारत की सक्रिय भूमिका

इस सप्ताह की शुरुआत में, प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में बिगड़ती स्थिति पर चर्चा करने के लिए ट्रंप से फोन पर बातचीत की थी। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजारों और समुद्री सुरक्षा पर इस क्षेत्र की लगातार बदलती परिस्थितियों के प्रभावों को समझना और उनसे निपटने के तरीकों पर विचार करना था। भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। सभी राज्यों का सहयोग इस दिशा में एक महत्वपूर्ण आधारशिला है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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