
Bihar Politics: बिहार की सियासी बिसात पर हर चाल एक नई कहानी गढ़ती है, और जब खिलाड़ी नीतीश कुमार हों, तो हर मोड़ पर चौंकाने वाले फैसले ही उम्मीद की जाती है। सूबे के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने और नए मंत्रिमंडल को पूर्ण समर्थन देने के फैसले ने प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला दिया है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
Bihar Politics: बिहार की सियासी गलियों में इन दिनों गर्मागर्मी का माहौल है। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर सबको चौंका दिया है। इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख नीतीश कुमार ने 2025 में पांचवीं बार चुनाव जीता था, जब एनडीए ने बिहार में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया था। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में दसवीं बार शपथ ली थी, लेकिन अब उनका यह कदम भविष्य की नई इबारत लिखने की ओर इशारा कर रहा है।
बिहार पॉलिटिक्स: नीतीश के फैसले पर कांग्रेस का तीखा हमला
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने नीतीश कुमार के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य नेताओं ने बार-बार यह बात दोहराई थी कि नीतीश कुमार बिहार में ज्यादा दिन तक टिकने वाले नहीं हैं। रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि जब वह मुख्यमंत्री बने थे, तब भी उनका कार्यकाल लंबा नहीं चला। यह बिहार की जनता के भरोसे के साथ धोखा है, क्योंकि यह जनादेश नीतीश कुमार को दोबारा मुख्यमंत्री बनाने के लिए ही दिया गया था। उन्होंने इस स्थिति की तुलना अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के साथ किए गए व्यवहार से की।
जयराम रमेश ने आगे कहा कि नीतीश कुमार ने अपने लिए वोट मांगे थे, न कि अपने बेटे या सम्राट चौधरी के लिए। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा ने महाराष्ट्र में एनसीपी और शिवसेना जैसी पार्टियों को तोड़ दिया। अब शायद चंद्रबाबू नायडू को भी राज्यसभा में आने के लिए कहेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने राज्यपालों की भूमिका पर भी सवाल उठाए, यह कहते हुए कि अब राज्यपाल भाजपा के अधिकारी बन गए हैं। वे दिन चले गए जब राज्यपाल निष्पक्ष हुआ करते थे; केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के राज्यपालों की स्थिति को देख लीजिए। उन्होंने एक उदाहरण दिया कि कैसे नागालैंड से एक व्यक्ति को तमिलनाडु भेजा गया, और जब वहां की सरकार तंग आ गई, तो उसे बिहार भेज दिया गया।
जनता का आक्रोश: नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद पर देखना चाहते हैं समर्थक
इसी बीच, जनता दल (यूनाइटेड) के समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता पटना में मुख्यमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वे इस बात पर यकीन करने को तैयार नहीं हैं कि नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने का फैसला कर लिया है। एक जेडीयू कार्यकर्ता ने नीतीश कुमार के एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट की पुष्टि पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “हो सकता है कि उनका अकाउंट हैक हो गया हो।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
एक अन्य समर्थक ने भावनात्मक रूप से कहा, “नीतीश कुमार जनता के जनादेश का अपमान नहीं कर सकते। उन पर एक बड़ी साजिश के तहत भारी दबाव है।” उन्होंने आगे कहा कि “यह दिल तोड़ने वाला है। बिहार की जनता उन्हें अपना परिवार मानती है। नीतीश कुमार के अलावा कोई और यहां मुख्यमंत्री नहीं बन सकता। हम चाहते हैं कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने रहें।” देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। बिहार की इस राजनीतिक उथल-पुथल ने निश्चित रूप से राज्य के भविष्य पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब आने वाला समय ही देगा।






