



PMO new building: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया, जो एक ऐसी नवीन इमारत है जहाँ अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और मंत्रिमंडल सचिवालय एक साथ संचालित होंगे। केंद्र सरकार के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह नई संरचना भारत की प्रशासनिक शासन व्यवस्था का नया चेहरा है और प्रधानमंत्री की आधुनिक, कुशल, सुलभ एवं नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली के निर्माण की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
दशकों से, विभिन्न मंत्रालय सेंट्रल विस्टा के पुराने और अलग-अलग भवनों से काम कर रहे थे। इस बिखराव के कारण अक्सर समन्वय में कमी, लॉजिस्टिक्स संबंधी चुनौतियाँ और रखरखाव की उच्च लागत जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती थीं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। नए परिसरों का मुख्य उद्देश्य इन समस्याओं का समाधान करना है। इन्हें भविष्य के लिए तैयार बुनियादी ढाँचे के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जहाँ प्रमुख प्रशासनिक विभागों को एक साथ लाकर निर्बाध समन्वय सुनिश्चित किया जा सके। सरकार को उम्मीद है कि इस एकीकरण से निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी, परिचालन लागत में कमी आएगी और समग्र पारदर्शिता बढ़ेगी।
PMO new building: ‘सेवा तीर्थ’: एक छत के नीचे देश की प्रशासनिक धुरी
‘सेवा तीर्थ’ परिसर में तीन प्रमुख कार्यकारी संस्थान – प्रधानमंत्री कार्यालय (सेवा तीर्थ-1), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (सेवा तीर्थ-2) और मंत्रिमंडल सचिवालय (सेवा तीर्थ-3) – एक ही स्थान पर स्थित होंगे। पहले ये सभी अलग-अलग जगहों से काम करते थे। इनके एक छत के नीचे आने से सरकार के उच्चतम स्तर पर रणनीतिक समन्वय और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है। यह कदम व्यापक Central Vista project का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका लक्ष्य देश की प्रशासनिक क्षमता को सुदृढ़ करना है।
कर्तव्य भवन: मंत्रालयों का नया ठिकाना और बेहतर समन्वय
इसके अतिरिक्त, कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कॉर्पोरेट मामले, शिक्षा, संस्कृति, विधि एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण, कृषि एवं किसान कल्याण, रसायन एवं उर्वरक और जनजातीय मामलों सहित कई प्रमुख मंत्रालयों के कार्यालय होंगे। यह समेकन अंतर-मंत्रालयी समन्वय को बेहतर बनाने और जनता के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुँच को सुगम बनाने में सहायक होगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
नए परिसरों में डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यालय, सुव्यवस्थित सार्वजनिक संपर्क क्षेत्र और केंद्रीकृत स्वागत सुविधाएँ उपलब्ध हैं। ये सभी तत्व दक्षता और नागरिक सहभागिता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्नत डिजिटल अवसंरचना ई-गवर्नेंस और पारदर्शी प्रशासन को सशक्त बनाने में सहायक होगी। ये परिसर 4-स्टार जीआरआईएचए (GRIHA) मानकों के अनुसार निर्मित किए गए हैं, जिनमें नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियाँ, जल संरक्षण उपाय, अपशिष्ट प्रबंधन समाधान और ऊर्जा-कुशल भवन डिज़ाइन शामिल हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, ये उपाय परिचालन प्रदर्शन में सुधार करते हुए पर्यावरणीय प्रभाव को कम करेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



