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फ़रवरी, 22, 2026
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Puducherry Politics: पुडुचेरी की राजनीति में कांग्रेस का दांव, DMK को साधने की तैयारी, नारायणसामी ने ठोका नेतृत्व का दावा

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Puducherry Politics: भारतीय सियासत का अखाड़ा, जहाँ गठबंधन की बिसात पर मोहरें हर चाल के साथ बदलती हैं, अब पुडुचेरी में कांग्रेस और DMK के बीच शक्ति संतुलन की नई जंग छिड़ गई है। 2026 के विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने कांग्रेस के लिए गठबंधन के नेतृत्व की दावेदारी ठोक दी है, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है।

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पुडुचेरी की राजनीति: नेतृत्व की रेस में कौन आगे?

नारायणसामी की यह दावेदारी आकस्मिक नहीं है, बल्कि हालिया चुनावी प्रदर्शन और मजबूत वोट शेयर के आंकड़ों पर आधारित है। राजनीति में संख्याबल ही सर्वोच्च होता है, और इस कसौटी पर कांग्रेस का पलड़ा भारी दिखाई देता है। पार्टी का स्पष्ट दावा है कि उनके पास 26% का एक सुदृढ़ वोट बैंक है, जबकि गठबंधन सहयोगी DMK फिलहाल 8% वोट शेयर के साथ काफी पीछे खड़ी है। इन्हीं आंकड़ों के दम पर नारायणसामी का तर्क है कि जिस पार्टी की जड़ें जनता में अधिक गहरी हैं, गठबंधन के नेतृत्व का हक भी उसी का बनता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में कांग्रेस का एक लंबा और प्रभावशाली राजनीतिक इतिहास रहा है। यहां की सत्ता की चाबी अक्सर उसी दल के हाथ में रही है जो स्थानीय जनभावनाओं को दिल्ली की राजनीति के साथ सफलतापूर्वक जोड़ सके। कांग्रेस को लगता है कि पिछले कुछ चुनावों के उतार-चढ़ाव के बाद अब वह समय आ गया है जब उसे ‘जूनियर पार्टनर’ की छवि से बाहर निकलकर गठबंधन में प्रमुख भूमिका निभानी चाहिए।

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यह भी पढ़ें:  PM Modi का कांग्रेस पर तीखा वार: 'कपड़े उतारने की क्या ज़रूरत?' मेरठ से भरी हुंकार

DMK के लिए अग्निपरीक्षा, गठबंधन पर असर

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या DMK इस मांग के आगे झुकेगी? तमिलनाडु में अपनी मजबूत स्थिति रखने वाली DMK के लिए पुडुचेरी में कांग्रेस की शर्तों पर समझौता करना आसान नहीं होगा। इस फैसले को कई महत्वपूर्ण कारक प्रभावित करेंगे। क्या DMK के समर्थक नेतृत्व छोड़ने के फैसले को आसानी से स्वीकार कर पाएंगे? और क्या विपक्षी दलों (NR कांग्रेस और भाजपा गठबंधन) को मात देने के लिए दोनों सहयोगी दल अपनी अहम् को एक तरफ रख पाएंगे?

यह फैसला केवल एक छोटे से केंद्र शासित प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह ‘इंडिया’ गठबंधन के भविष्य के समीकरणों की दिशा भी तय करेगा। वी. नारायणसामी का यह रुख महज एक बयान नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीतिक दबाव है। 2026 के चुनावों की छाया में, कांग्रेस और DMK के बीच की यह सौदेबाजी भारतीय गठबंधन राजनीति के बदलते स्वरूप को दर्शाती है। यदि कांग्रेस नेतृत्व हथियाने में सफल रहती है, तो यह पार्टी के पुनरुत्थान के लिए एक बड़ा बूस्टर शॉट साबित होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

आने वाले महीनों में होने वाली वार्ताएं न केवल पुडुचेरी का राजनीतिक भविष्य तय करेंगी, बल्कि पूरे देश में यह संदेश भी देंगी कि क्षेत्रीय गठबंधन में ‘शक्ति संतुलन’ किस करवट बैठ रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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