

Pune Land Deal: महाराष्ट्र की सियासत में भूमाफियाओं का मकड़जाल एक बार फिर सुर्खियों में है, जब पुणे की जमीन का एक सौदा 1800 करोड़ की जमीन को 300 करोड़ में निपटाने की कहानी कहता है। इस मामले में आई जांच रिपोर्ट ने कई सवालों के जवाब दिए हैं, और कुछ नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
Pune Land Deal: पुणे में 1800 करोड़ की जमीन 300 करोड़ में? पार्थ पवार को क्लीन चिट, दो अधिकारी बर्खास्त!
Pune Land Deal: क्या है पुणे भूखंड घोटाला?
पुणे के मुंधवा इलाके में एक 44 एकड़ का भूखंड, जिसकी बाजार कीमत कथित तौर पर 1,800 करोड़ रुपये थी, उसे मात्र 300 करोड़ रुपये में खरीद लिया गया। इस सौदे के बाद उपजे विवाद की जांच के लिए गठित सरकारी समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, लगभग 1,000 पृष्ठों की इस विस्तृत रिपोर्ट में पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार को क्लीन चिट दे दी गई है। हालांकि, रिपोर्ट में कथित प्रक्रियात्मक चूकों के लिए दो सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
आईएएस अधिकारी विकास शंकर खरागे, जो वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) के पद पर कार्यरत हैं, की अध्यक्षता वाली समिति ने यह रिपोर्ट तैयार की है। इसे चंद्रशेखर बावनकुले के नेतृत्व वाले राजस्व विभाग को सौंप दिया गया है और अब इसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष पेश किए जाने की उम्मीद है। समिति का गठन एमएस अमेडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी से जुड़े भूमि विक्रय मामले की जांच के लिए किया गया था। इस फर्म का संचालन पार्थ पवार करते हैं। उल्लेखनीय है कि पार्थ पवार की माता सुनेत्रा पवार वर्तमान में उपमुख्यमंत्री हैं और राज्य उत्पाद शुल्क, अल्पसंख्यक विकास, खेल एवं युवा मामलों के विभागों का कार्यभार संभाल रही हैं।
अवैध हस्तांतरण और अधिकारियों पर गाज
यह पूरा मामला मुंधवा स्थित 44 एकड़ भूमि के अवैध हस्तांतरण से जुड़ा है। यह भूखंड फिलहाल भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बीएसआई) को पट्टे पर दिया गया है। शीतल तेजवानी और दिग्विजय पाटिल, जिनके पास इस भूमि के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी थी, पर अभिलेखों में हेराफेरी करने और स्वामित्व अधिकारों को अवैध रूप से अमेडिया एंटरप्राइजेज को हस्तांतरित करने का आरोप है। दिग्विजय पाटिल, पार्थ पवार के चचेरे भाई हैं। जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, हवेली रजिस्ट्रार कार्यालय के सब-रजिस्ट्रार रविंद्र तारू और तहसीलदार सूर्यकांत येओले नामक दो सरकारी अधिकारियों को बर्खास्त करने की सिफारिश की गई है। यह विवादास्पद भूमि लेनदेन कई दिनों से चर्चा का विषय बना हुआ है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/ । इस मामले में आगे की कार्रवाई मुख्यमंत्री के निर्णय पर निर्भर करेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





