

Union Budget: जब देश की आर्थिक नब्ज टटोलने की बात आती है, तो सियासी गलियारों में बहस छिड़ना लाजिमी है। एक तरफ सरकार विकास के नए अध्याय लिखने का दावा करती है, तो दूसरी ओर विपक्ष जमीनी हकीकत का आइना दिखाता है।
Union Budget: कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी ने हाल ही में पेश हुए केंद्रीय बजट 2026-2027 पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह बजट देश के वास्तविक संकटों को दरकिनार कर रहा है और सुधारों की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाता। लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने आरोप लगाया कि वर्तमान में विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट देखी जा रही है, निवेशक अपनी पूंजी वापस खींच रहे हैं और घरेलू बचत में भारी कमी आ रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने किसानों की बदहाली को भी प्रमुखता से उठाया।
Union Budget पर विपक्ष का तीखा वार
राहुल गांधी ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि देश का युवा आज भी रोजगार की तलाश में भटक रहा है, जबकि विनिर्माण क्षेत्र लगातार कमजोर हो रहा है। निवेशकों का विश्वास डगमगा रहा है और वे बाजार से पूंजी निकाल रहे हैं। घरेलू बचत का गिरता स्तर एक चिंताजनक संकेत है और हमारे अन्नदाता किसान गहरे संकट से जूझ रहे हैं। इन सबके ऊपर वैश्विक संकटों का खतरा भी लगातार मंडरा रहा है। गांधी ने जोर देकर कहा कि इन सभी गंभीर मुद्दों को बजट में नजरअंदाज किया गया है, और यह ऐसा बजट है जो देश के वास्तविक संकटों को समझते हुए भी सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाता। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में यह बजट पेश किया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस बजट को ‘फीका’ और ‘दिशाहीन’ करार दिया। उन्होंने टिप्पणी की कि बजट भाषण में सरकार की प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए किए गए बजटीय आवंटन का कोई स्पष्ट ब्योरा नहीं दिया गया। रमेश ने कहा कि हालांकि विस्तृत दस्तावेजों का अध्ययन आवश्यक है, लेकिन 90 मिनट के बजट भाषण से ही यह साफ हो गया कि बजट 2026-27 उस प्रचार के अनुरूप बिल्कुल भी नहीं है, जो इसके लिए किया गया था। यह पूरी तरह से नीरस और अपारदर्शी था, क्योंकि इसमें महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के लिए वित्तीय आवंटन का उल्लेख नहीं था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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बजट पर कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी बजट पर अपनी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह बजट देश के सामने मौजूद गंभीर आर्थिक चुनौतियों, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक नीतिगत दूरदर्शिता और राजनीतिक इच्छाशक्ति दोनों से रहित है। खरगे के अनुसार, मोदी सरकार के पास अब कोई नए विचार नहीं बचे हैं, और बजट 2026 भारत की अनेक आर्थिक चुनौतियों, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का कोई भी समाधान प्रस्तुत नहीं करता है।


