



Urban Decay: कहीं बदहाल सड़कें, कहीं कचरे का ढेर और कहीं पानी में डूबी गलियां। भारत के शहरों का यह चेहरा अब कोई अजूबा नहीं, बल्कि एक कड़वी हकीकत बन चुका है। इसी “शहरी सड़न” पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया है कि देश में लालच की महामारी तेजी से फैल रही है और इसी वजह से समाज मर रहा है। उनकी मानें तो “शहरी बदहाली” को अब एक सामान्य बात मान लिया गया है, जो बेहद चिंताजनक है।
राहुल गांधी ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए एक पत्रकार का वीडियो साझा किया, जिसमें दिल्ली के किराड़ी इलाके की बदहाली साफ दिख रही थी। वीडियो में कई घरों के सामने पानी और कचरा जमा होने की भयावह स्थिति का जिक्र था। यह दृश्य देखकर हर कोई सोचने को मजबूर हो जाएगा कि आखिर महानगरों में नागरिक सुविधाएँ किस हाल में हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Urban Decay: शहरों में बुनियादी ढांचे की बिगड़ती सूरत
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तल्ख लहजे में कहा कि आज हर आम भारतीय की जिंदगी एक नारकीय यातना बन गई है। उन्होंने सीधे तौर पर सिस्टम पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सत्ता के सामने यह सिस्टम बिक चुका है। उनका कहना था कि सब एक-दूसरे की पीठ थपथपाते हैं और मिलकर जनता को रौंदने का काम करते हैं। यह बयान देश की राजनीतिक गलियारों में गरमाहट पैदा कर सकता है।
उन्होंने आगे कहा, “देश में लालच की महामारी पैर पसार चुकी है, जिसका सबसे डरावना चेहरा यह शहरी सड़न है। हमारा समाज इसलिए मर रहा है क्योंकि हमने इस सड़न को ‘न्यू नॉर्मल’ मान लिया है, हम सुन्न, निशब्द और बेपरवाह हो चुके हैं।” राहुल गांधी ने जनता से अपील की कि वे जवाबदेही की मांग करें, अन्यथा यह बदहाली हर दरवाजे तक पहुंच जाएगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/ आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई बड़े शहर मानसून के दौरान जलभराव और गंदगी की समस्या से जूझ रहे हैं। यह सिर्फ दिल्ली की बात नहीं, बल्कि देश के अनेक महानगरों की हकीकत है, जहाँ मूलभूत नागरिक सुविधाएँ भी ठीक से मुहैया नहीं हो पा रही हैं। अब देखना यह है कि राहुल गांधी के इन आरोपों पर सत्ता पक्ष की क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या वाकई शहरों की यह ‘सड़न’ दूर हो पाती है या नहीं।


