Shashi Tharoor News: राजनीति के गलियारों में अक्सर कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जिनके हर कदम पर निगाहें टिकी रहती हैं। इन दिनों ऐसा ही एक चेहरा है कांग्रेस के कद्दावर नेता शशि थरूर का, जिनके पाले में गेंद किधर लुढ़केगी, यह हर कोई जानना चाहता है।
Shashi Tharoor News: कांग्रेस में थरूर की ‘गैर-मौजूदगी’ ने फिर छेड़ी अटकलें, क्या है अंदरूनी खेल?
कांग्रेस की बैठकों से Shashi Tharoor News: अनुपस्थिति का बढ़ता सिलसिला
तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर और कांग्रेस आलाकमान के बीच कथित अनबन की चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। भारतीय जनता पार्टी के प्रति उनकी बढ़ती सहजता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक प्रशंसा ने इन अफवाहों को और हवा दी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि, थरूर ने स्वयं कई बार इन अटकलों को खारिज किया है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। राहुल गांधी द्वारा बुलाई गई कांग्रेस लोकसभा सांसदों की महत्वपूर्ण बैठक में शशि थरूर की अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर हलचल मचा दी है। पिछले तीन हफ्तों में यह लगातार तीसरी ऐसी कांग्रेस बैठक है, जिससे थरूर ने दूरी बनाए रखी है।
शुक्रवार सुबह, राहुल गांधी ने कांग्रेस के 99 सांसदों के साथ एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सांसदों के अब तक के प्रदर्शन का आकलन किया गया और संसद के शीतकालीन सत्र के 19 दिसंबर को समाप्त होने से पहले भाजपा पर अपने हमलों को और धार देने की रणनीति पर विमर्श हुआ। ऐसे में सवाल उठता है कि शशि थरूर की अनुपस्थिति का क्या कारण था? चौंकाने वाली बात यह है कि उनके चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी भी इस महत्वपूर्ण कांग्रेस बैठक में मौजूद नहीं थे। पार्टी के मुख्य सचेतक ने भी थरूर की गैर-मौजूदगी पर अनभिज्ञता जाहिर की, जिससे राजनीतिक गलियारों में अटकलें और तेज हो गईं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
पहले भी गैर-मौजूदगी ने मचाई थी हलचल
यह पहली बार नहीं है जब थरूर की अनुपस्थिति ने कांग्रेस हलकों में चिंता पैदा की है। इससे पहले नवंबर में भी वे दो महत्वपूर्ण बैठकों से नदारद रहे थे। इनमें से पहली बैठक 30 नवंबर को सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई एक रणनीति बैठक थी। आपको बता दें कि अगस्त 2020 में भी थरूर और कुछ अन्य नेताओं ने सोनिया गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। हालांकि, 30 नवंबर की अनुपस्थिति पर उन्होंने पत्रकारों से सफाई दी थी कि वे केरल से दिल्ली के लिए उड़ान भर रहे थे। उनके कार्यालय ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि वे अपनी 90 वर्षीय मां के साथ पुनर्निर्धारित उड़ान से यात्रा कर रहे थे, जिसके कारण उनका बैठक में शामिल होना संभव नहीं हो पाया। संयोगवश, उस बैठक में कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता, केसी वेणुगोपाल भी अनुपस्थित थे।
दूसरी बैठक 18 नवंबर को आयोजित की गई थी, जिसमें पार्टी द्वारा विवादास्पद विशेष गहन संशोधन (मतदाता पुनर्सत्यापन) के विरोध पर गहन चर्चा हुई थी। इस कांग्रेस बैठक की अध्यक्षता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने संयुक्त रूप से की थी। इस बार थरूर ने अपनी गैर-मौजूदगी का कारण खराब स्वास्थ्य बताया था। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि इस बैठक से ठीक एक दिन पहले, वे एक निजी कार्यक्रम में शामिल हुए थे जहाँ प्रधानमंत्री ने भाषण दिया था। केरल के इस सांसद द्वारा प्रधानमंत्री के भाषण की प्रशंसा में किया गया एक ट्वीट तब भी विवादों का सबब बन गया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन लगातार अनुपस्थितियों और प्रधानमंत्री की तारीफों ने कांग्रेस के भीतर शशि थरूर की भूमिका पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।


