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फ़रवरी, 28, 2026
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हाथी पर सवार होकर नवजोत सिंह सिद्धू ने किया महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन…सुप्रीम कोर्ट ने कहा-पहले एक साल काटो जेल में

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सुप्रीम कोर्ट से कांग्रेस नेता नवजोत सिद्धू को बड़ा झटका लगा। कोर्ट ने 1988 के रोडरेज मामले में सिद्धू की सजा बढ़ाकर एक साल की कठोर यानी सश्रम कारावास कर दी है। इससे पहले कोर्ट ने अपने आदेश में एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। उधर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नवजोत सिंह सिद्धू ने ट्वीट कर कहा कि कानून की महानता के आगे नतमस्तक हूं।

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वहीं, इससे पहले पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान सिद्धू ने हाथी पर सवार होकर मंहगाई के खिलाफ प्रोटेस्ट किया। उनके साथ इस प्रदर्शन में काफी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भी शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने केंद्र और पंजाब की भगवंत मान सरकार के खिलाफ जमकर हमला बोला।

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’50 फीसदी तक महंगी हुई चीजें’
क्रिकेटर से पॉलिटीशियन बने नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा, “मौजूदा सरकार के दौरान जरूरी चीजों में 50 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है।” उन्होंने तंज कसते हुआ कहा, “जिस तरह हाथी का आकार बढ़ता है उसी तरह पंजाब में महंगाई बढ़ रही है।” यही संदेश देने के लिए सिद्धू ने हाथी पर सवार होकर प्रदर्शन किया।

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इससे पहले, कोर्ट ने 25 मार्च को सिद्धू की सज़ा बढ़ाने से जुड़ी अर्ज़ी पर आदेश सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को केवल एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी थी। मारपीट में जिस बुजुर्ग गुरनाम सिंह की मौत हुई थी, उनके परिवार ने सजा पर दोबारा विचार करने की मांग की है।नवजोत सिंह सिद्धू ने हाथी पर बैठकर महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन कियागुरनाम सिंह के परिजनों ने नई अर्जी दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ मारपीट की बजाय ज्यादा संगीन धाराओं के तहत मामला बनता है। 12 सितंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने नवजोत सिंह सिद्धू की सजा बढ़ाने की मांग करने वाली पीड़ित पक्ष की ओर से दाखिल याचिका पर सिद्धू को नोटिस जारी किया था।

15 मई, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने नवजोत सिंह सिद्धू को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाया था लेकिन धारा 323 का दोषी पाया था और उन पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। कोर्ट ने सह अभियुक्त रुपिंदर सिंह संधू को भी बरी कर दिया था।

मामला 1988 में पटियाला में हुई मारपीट की एक घटना का है। ट्रायल कोर्ट ने सिद्धू को बरी कर दिया था जबकि हाई कोर्ट ने नवजोत सिंह सिद्धू और रुपिंदर सिंह संधू दोनों को गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए 3 साल की सजा सुनाई थी। सिद्धू के वकील ने ये दावा किया था कि 1988 में गुरनाम की मौत की वजह सिद्धू का घूंसा नहीं बल्कि दिल का दौरा था। निचली अदालत ने सिद्धू को बरी कर दिया था लेकिन पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उन्हें 3 साल की सजा सुनाई थी।

सिद्धू की तरफ से कहा गया था कि इस मामले में कोई भी गवाह खुद से सामने नहीं आया। जिन भी गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं उनको पुलिस सामने लाई थी। गवाहों के बयान विरोधाभासी हैं। सिद्धू के वकील ने चश्मदीद गवाह की सच्चाई पर सवाल उठाए। गुरनाम के भतीजे ने कहा था कि पुलिस ने उनकी कार को तुरंत कब्जे में लिया था परन्तु जांच अधिकारी इससे मना कर चुके हैं।

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वहीं, आज पंजाब कांग्रेस में अलग-थलग पड़ चुके पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू गुरुवार को नए अंदाज में नजर आए। सिद्धू पटियाला में हाथी पर सवार होकर निकले और समर्थकों समेत आप सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। सिद्धू ने महंगाई व कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरा।

नवजोत सिद्धू ने यहां धर्मपुरा बाजार में हाथी पर चढ़कर आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। सिद्धू ने कहा कि जहां मौजूदा सरकार के दौरान विभिन्न जरूरी वस्तुओं के दामों में 50 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है, वहीं आम व्यक्ति की आय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि महंगाई इस तरीके से बढ़ी है जैसे हाथी का आकार बढ़ता है। यही संदेश देने के लिए वह हाथी पर सवार हुए हैं।

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सिद्धू ने कहा कि इस दौरान जो महंगाई बढ़ी है, उससे गरीब व्यक्ति का बजट अस्त-व्यस्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ 120 रुपये किलो के हिसाब से दाल मिल रही है तो दूसरी तरफ पंखों समेत मुर्गी 130 रुपये में मिल रही है। ऐसे में दाल रोटी खाओ वाली कहावत को कैसे लागू किया जा सकता है।

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सिद्धू ने कहा कि खाद्य तेलों का रेट 75 रुपये लीटर से बढ़कर 180 रुपये लीटर हो गया है। इसी तरह गैस सिलेंडर के दाम 400 से बढक़र 1000 रुपये तक हो गए हैं । फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में महज 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है जबकि खादों इत्यादि की कीमतों में 40 फ़ीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। सिद्धू बोले कि भगवंत मान सरकार महंगाई कम करने की स्थिति में ही नहीं है, क्योंकि यह सरकार दस हजार करोड़ का कर्ज उठा चुकी है।

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