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फ़रवरी, 14, 2026
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दिल्ली में भावुक मिलन: जब अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स कल्पना चावला के परिवार से मिलीं, नम हुईं आंखें

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अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स कल्पना चावला: कुछ रिश्ते सिर्फ खून के नहीं होते, वे सपनों और आसमान की ऊंचाइयों को छूने की साझा चाहत से भी बुने जाते हैं। ऐसा ही एक भावुक संगम तब हुआ जब अंतरिक्ष की दो पथप्रदर्शक महिलाओं का अदृश्य बंधन जीवंत हो उठा। मंगलवार को दिल्ली में, भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने दिवंगत कल्पना चावला के परिवार से मुलाकात की, जो केवल दो परिवारों का नहीं, बल्कि यादों और एक गौरवशाली अंतरिक्ष विरासत का भावुक मिलन था। यह मिलन केवल दो परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि यादों और साझा विरासतों का एक भावुक संगम था, जो अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स कल्पना चावला के नाम से जुड़ी गहरी भावनाओं को दर्शाता है।

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अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स कल्पना चावला: यादों और सम्मान का पल

सुनीता विलियम्स, जो वर्तमान में भारत यात्रा पर हैं, दिल्ली में कल्पना चावला की 90 वर्षीय मां संजोगता खरबंदा और उनकी बहन दीपा से मिलने पहुंचीं। जैसे ही सुनीता ने कल्पना की मां को गले लगाया, कमरे में एक पल के लिए सन्नाटा छा गया और सभी की आँखें नम हो गईं। यह मुलाकात बेहद भावुक और गर्मजोशी से भरी रही, जिसने पुरानी यादों को ताजा कर दिया।

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भारत में जन्मीं अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला उन सात चालक दल सदस्यों में से एक थीं, जिनकी फरवरी 2003 में अंतरिक्ष शटल कोलंबिया के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के कारण मृत्यु हो गई थी। यह दुर्घटना तब हुई जब अंतरिक्ष यान पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश के दौरान टूटकर नष्ट हो गया था। कल्पना अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला थीं और उनकी दुखद मृत्यु पर पूरे भारत में गहरा शोक व्यक्त किया गया था। उनका योगदान हमारी अंतरिक्ष विरासत का एक अमिट हिस्सा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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यह भी पढ़ें:  रक्षा प्रमुख अनिल चौहान ने खोले भारत चीन संबंध पर पंचशील समझौते के अनछुए पहलू... पढ़िए स्वतंत्रता के बाद भारत

विलियम्स (60) ने मंगलवार को दिल्ली स्थित ‘अमेरिकन सेंटर’ में आयोजित ‘आँखें सितारों पर, पैर जमीं पर’ नामक एक संवाद सत्र में भाग लिया था। लगभग एक घंटे के इस कार्यक्रम के समाप्त होते ही, विलियम्स मंच से नीचे उतरीं और सभागार में पहली पंक्ति में बैठी चावला की मां संजोगता चावला की ओर बढ़ीं। उन्होंने उन्हें गर्मजोशी से गले लगाया। विलियम्स इस दौरान अपने चिरपरिचित अंतरिक्ष यात्री के लिबास में थीं। दोनों की मुलाकात ने पुरानी यादों को ताजा कर दिया और विलियम्स ने जाने से पहले संपर्क में बने रहने की इच्छा व्यक्त की।

परिवार के सदस्य की तरह हैं सुनीता विलियम्स

विलियम्स ने कल्पना चावला की बहन दीपा से भी मुलाकात की, जो इस कार्यक्रम में अपनी मां के साथ आई थीं। सुनीता विलियम्स वर्तमान में भारत यात्रा पर हैं। वह 22 जनवरी से शुरू होने वाले केरल साहित्य महोत्सव (केएलएफ) के नौवें संस्करण में भाग लेने वाली हैं, जिसकी घोषणा आयोजकों ने दिसंबर के अंत में की थी।

अमेरिकी नौसेना की पूर्व कप्तान विलियम्स का जन्म 19 सितंबर, 1965 को अमेरिका के ओहायो के यूक्लिड में हुआ था। उनके पिता दीपक पंड्या गुजराती थे और मेहसाणा जिले के झुलासन के रहने वाले थे, जबकि उनकी मां उर्सुलिन बोनी पंड्या स्लोवेनियाई थीं। अपने प्रारंभिक संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि भारत आने पर उन्हें घर वापसी जैसा महसूस हो रहा है, क्योंकि यह वह देश है जहां उनके पिता का जन्म हुआ था।

बाद में, चावला की मां ने कार्यक्रम के दौरान बातचीत में कहा,

“वह (विलियम्स) परिवार के सदस्य की तरह हैं।”

उन्होंने बताया कि कोलंबिया हादसे के बाद “वह तीन महीने तक हमारे घर आती रहीं”, नियमित रूप से सुबह से रात तक रुकती थीं और “शोक में डूबे हमारे परिवार” को सांत्वना देती थीं। उन्होंने यह भी याद किया कि विलियम्स और चावला अंतरिक्ष यात्री के तौर पर एक-दूसरे को अपने साझा पेशे में और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया करती थीं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अपनी बेटी के जीवन को याद करते हुए संजोगता चावला ने कहा,

“वह अपने साथ अनमोल खजाना लेकर आई थी। उसने हमें बहुत कुछ सिखाया। हम क्या कह सकते हैं?”

संयोगिता चावला ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को उसके सपनों को पूरा करने में पूरा समर्थन दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने कहा,

“वह (कल्पना) अक्सर कहा करती थी, ‘मानवता ही एकमात्र धर्म है’ और उसने कभी कोई दूसरा नाम नहीं लिया। जब हम उससे पूछते थे, तुम्हारा धर्म क्या है? तो वह कहती थी, ‘मेरा धर्म कर्म है’।”

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