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मार्च, 25, 2026
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पश्चिम बंगाल चुनाव: ओवैसी संग हुमायूँ कबीर का ‘अटूट’ गठबंधन, ममता को कितनी चुनौती?

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पश्चिम बंगाल चुनाव: सियासी बिसात पर नए मोहरे बिछने लगे हैं, जहां हर चाल 2026 के चुनावी संग्राम की कहानी लिख रही है। तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूँ कबीर ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के साथ मिलकर एक नया दांव खेला है, जिसने राज्य की राजनीतिक फिजा में अचानक हलचल मचा दी है। इस गठबंधन की घोषणा ने आने वाले चुनावों के लिए एक नई धुरी तैयार कर दी है, जहां कबीर ने ओवैसी को अपना “बड़ा भाई” बताते हुए राज्य की राजनीति में गहरे ध्रुवीकरण के संकेत दिए हैं।

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बुधवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए हुमायूँ कबीर भावुक और आक्रामक दोनों नजर आए। उन्होंने साफ कर दिया कि यह केवल एक चुनावी समझौता नहीं है, बल्कि एक लंबी और स्थायी राजनीतिक साझेदारी की नींव रखी गई है।

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पश्चिम बंगाल चुनाव: सीटों का बंटवारा और ओवैसी की जनसभाएं

कबीर ने बताया कि उनकी नवगठित पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (AJUP) राज्य की लगभग 182 से 192 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। इसमें से प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों जैसे मालदा, मुर्शिदाबाद और बीरभूम में एआईएमआईएम अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतारेगी। इस गठबंधन को और मजबूत करने के लिए असदुद्दीन ओवैसी बंगाल में कम से कम 20 बड़ी जनसभाएं करेंगे। इन रैलियों की शुरुआत 1 अप्रैल को बहरामपुर से होगी, जो गठबंधन के प्रचार अभियान का शंखनाद करेगी।

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हुमायूँ कबीर ने इस साझेदारी के प्रति अपनी अटूट निष्ठा दोहराते हुए कहा, “यह गठबंधन कभी नहीं टूटेगा। जब तक मैं जीवित हूँ, ओवैसी मेरे बड़े भाई रहेंगे और हम मिलकर बंगाल के हक की लड़ाई लड़ेंगे।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह बयान इस बात का संकेत देता है कि यह साझेदारी सिर्फ एक चुनाव तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि भविष्य की राजनीति में भी अपनी छाप छोड़ेगी।

विपक्षी दलों में खलबली: ‘वोट कटवा’ के आरोप

इस नए एआईएमआईएम गठबंधन की घोषणा ने तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के खेमे में खलबली मचा दी है। उन्होंने इस साझेदारी को ‘वोट कटवा’ राजनीति करार दिया है, जिसका सीधा आरोप है कि यह भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई है।

  • तृणमूल कांग्रेस का हमला: टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने इसे एक “बुरा घटनाक्रम” बताया। उन्होंने दावा किया कि ओवैसी की पार्टी असल में भाजपा की मदद कर रही है और इससे मुस्लिम जनता अलग-थलग पड़ जाएगी। रॉय ने यह भी कहा कि इस गठबंधन का कोई खास चुनावी असर नहीं होगा।
  • अन्य विपक्षी दलों का तर्क: कांग्रेस और अन्य धर्मनिरपेक्ष दल भी इस बात से सहमत हैं कि यह गठबंधन “धर्मनिरपेक्ष वोटों” को विभाजित करेगा, जिससे अंततः भारतीय जनता पार्टी को सीधा लाभ मिल सकता है।
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कबीर ने विपक्ष के इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा, “उन्हें बड़ा भाई मानकर मैं चुनाव में उनके साथ मिलकर लड़ रहा हूँ। मैंने अपने बड़े भाई से अपील की है, इसलिए मेरे बड़े भाई कम से कम 20 रैलियों में मेरे साथ होंगे।” AJUP प्रमुख ने जोर देकर कहा कि बंगाल का मुस्लिम समुदाय उनके साथ खड़ा है और दोनों पार्टियां मिलकर और भी ज्यादा ताकत के साथ चुनाव लड़ेंगी।

ओवैसी की रैलियों का विस्तृत खाका

ओवैसी की रैलियां मुर्शिदाबाद, उत्तरी बंगाल, मालदा, बीरभूम, उत्तर दिनाजपुर, आसनसोल और कोलकाता सहित राज्य के प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में आयोजित करने की योजना है। कबीर ने अपनी पहली रैली का विवरण देते हुए बताया, “हमारी पहली रैली 1 अप्रैल को बहरामपुर में ओवैसी के साथ होगी। मेरे बड़े भाई वहां दोपहर 1:00 बजे मौजूद रहेंगे। मैं बहरामपुर में अपने बड़े भाई के साथ लाखों लोगों की मौजूदगी में वह पहली जनसभा आयोजित करूँगा।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, जो आपको दे रहा है हर सियासी खबर का सबसे सटीक विश्लेषण। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

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‘यह गठबंधन कभी नहीं टूटेगा’, कबीर की दृढ़ प्रतिज्ञा

हुमायूँ कबीर ने यह भी बताया कि बाद की रैलियों की तारीखों की घोषणा जल्द ही की जाएगी, और यह भी जोड़ा कि बिहार और हैदराबाद के नेता इन रैलियों में उनके साथ शामिल होंगे। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, कबीर ने चुनाव प्रचार के हर पहलू में ओवैसी के दिखाए रास्ते पर चलने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

उन्होंने पूरी दृढ़ता से कहा, “इस गठबंधन के जरिए, मेरे भाई जो भी फैसला लेंगे और जो भी दिशा दिखाएंगे, आने वाले दिनों में मैं उसी का पालन करूंगा। यह गठबंधन कभी नहीं टूटेगा,” और इस तरह उन्होंने इस साझेदारी के प्रति अपनी निष्ठा को और मजबूत किया। कबीर ने यह भी साफ कर दिया कि यह गठबंधन सिर्फ 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए ही नहीं है, बल्कि भविष्य के चुनावों में भी जारी रहेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने आगे कहा, “जब तक मैं जिंदा हूं और राजनीति में हूं, 2026 में हमने जो सफर साथ मिलकर शुरू किया था, वह जारी रहेगा।”

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विपक्ष ने ओवैसी-हुमायूं कबीर के चुनावी गठबंधन पर साधा निशाना

इससे पहले सोमवार को, विपक्षी नेताओं ने एआईएमआईएम और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर के बीच हुए गठबंधन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह के कदम वोटों को बांट सकते हैं और “धर्मनिरपेक्ष पार्टियों” को कमजोर कर सकते हैं। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने इसे एक “बुरा घटनाक्रम” बताया और कहा कि इससे “मुस्लिम जनता अलग-थलग पड़ सकती है।” रॉय ने संसदीय परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था, “ओवैसी का संगठन असल में भाजपा की मदद कर रहा है। लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। उनके पास न तो ताकत है और न ही उन्हें वोट मिलेंगे।”

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