

Union Cabinet Decisions: किसी माली की तरह, केंद्र सरकार ने देश के विकास के उपवन में कई नए बीज बोए हैं, जो अब विशाल वृक्षों का रूप लेने को तैयार हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रशासन, अवसंरचना, नगरीय विकास, नवाचार और संपर्क के मोर्चे पर कई दूरगामी फैसलों को मंजूरी दी है। इन फैसलों का स्पष्ट संदेश है कि शासन की कार्यशैली को सेवा भाव से जोड़ते हुए देश को तीव्र विकास के पथ पर आगे बढ़ाना है।
Union Cabinet Decisions: केंद्रीय मंत्रिमंडल के ऐतिहासिक निर्णय और उनका प्रभाव
सबसे प्रतीकात्मक फैसला नॉर्थ और साउथ ब्लॉक स्थित सरकारी कार्यालयों को नए परिसरों, ‘सेवातीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरित करने का है। लगभग एक सदी से सत्ता संचालन के केंद्र रहे ये ऐतिहासिक भवन अब ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ का अभिन्न अंग बनेंगे। मोदी सरकार का कहना है कि औपनिवेशिक काल में निर्मित इन भवनों को विरासत के रूप में संरक्षित करते हुए, प्रशासन को आधुनिक, तकनीक समर्थ और पर्यावरण अनुकूल परिसरों में ले जाना समय की मांग है। इससे कार्यकुशलता में वृद्धि होगी, डिजिटल शासन को गति मिलेगी और कर्मियों के लिए बेहतर कार्य परिवेश का निर्माण होगा। साथ ही, संग्रहालय के रूप में विकसित होने पर ये परिसर भारत की सभ्यता यात्रा, स्वतंत्रता संघर्ष और लोकतांत्रिक विकास की गाथा आने वाली पीढ़ियों को सुनाएंगे।
जहाँ तक मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों की बात है, तो आपको बता दें कि रेल क्षेत्र में तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिनकी कुल लागत लगभग 18,509 करोड़ रुपये है। कसारा-मनमाड, दिल्ली-अंबाला और बल्लारी-होसापेट खंडों पर तीसरी और चौथी लाइन बिछाई जाएगी। करीब 389 किलोमीटर नेटवर्क बढ़ेगा और निर्माण के दौरान 265 लाख मानव-दिवस का रोजगार सृजित होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन मार्गों पर वर्तमान में भीड़ और देरी एक बड़ी समस्या है। अतिरिक्त लाइनों से यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही सुगम होगी, समयपालन सुधरेगा और रसद लागत में कमी आएगी। कोयला, इस्पात, अनाज, उर्वरक जैसे सामान की ढुलाई तेज होने से उद्योग और कृषि दोनों को लाभ होगा। अनुमान है कि तेल आयात में कमी और कार्बन उत्सर्जन में गिरावट भी होगी, जिससे पर्यावरण को सहारा मिलेगा। कई तीर्थ और पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।
सड़क अवसंरचना विकास में भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। महाराष्ट्र के घोटी-त्र्यंबक-मोखाडा-जव्हार-मनोर-पालघर खंड के उन्नयन को मंजूरी मिली है। 154 किलोमीटर से अधिक लंबाई वाली इस परियोजना पर 3,320 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह मार्ग औद्योगिक क्षेत्रों को द्रुतमार्गों और तटीय पट्टी से जोड़ेगा। नासिक शहर पर दबाव घटेगा, यात्रा समय कम होगा और आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास होगा। इस परियोजना से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से लाखों मानव-दिवस का रोजगार बनेगा। इसी तरह गुजरात में राजमार्ग 56 के दो खंडों को चार लेन बनाने पर 4,583 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। यह परियोजना आदिवासी बहुल जिलों की पहुंच बढ़ाएगी और ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ जैसे पर्यटन केंद्र तक आवागमन सुगम करेगी। यात्रा समय में बड़ी कमी का भी अनुमान है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
पूर्वोत्तर में संपर्क क्रांति और नगरीय जीवन में सुधार
असम में ब्रह्मपुत्र के नीचे सड़क-सह-रेल सुरंग परियोजना को हरी झंडी मिली है, जिसकी कुल लंबाई 33.7 किलोमीटर है और लागत 18,662 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह गोहपुर और नुमालीगढ़ को जोड़ेगी और मौजूदा लंबे घुमावदार मार्ग का एक विकल्प बनेगी। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए यह रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। तेज संपर्क से व्यापार, उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भी होगा। देश में इस तरह की यह पहली परियोजना होगी, जो हमारी तकनीकी क्षमता का भी प्रदर्शन है। इसके अलावा, तेलंगाना में हैदराबाद-पणजी आर्थिक गलियारे पर राजमार्ग 167 को चार लेन बनाने की परियोजना को 3,175 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। इससे नगरों से गुजरने वाली भीड़भाड़ कम होगी, माल ढुलाई तेज होगी और क्षेत्रीय विकास को बल मिलेगा।
साथ ही, दिल्ली-एनसीआर में नोएडा मेट्रो के सेक्टर 142 से बॉटनिकल गार्डन तक 11.56 किलोमीटर के विस्तार को स्वीकृति दी गई है। आठ नए स्टेशन बनेंगे और नोएडा-ग्रेटर नोएडा का सक्रिय मेट्रो नेटवर्क 61 किलोमीटर से अधिक हो जाएगा। आईटी पार्क, शिक्षण संस्थान, अस्पताल और व्यापारिक केंद्र सीधे जुड़ेंगे। सड़क जाम में कमी, समय की बचत और प्रदूषण में गिरावट इसके प्रमुख लाभ होंगे। वहीं, नवाचार और उद्यमिता के मोर्चे पर ‘स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0’ के लिए 10,000 करोड़ रुपये के कोष को मंजूरी दी गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह उद्यम पूंजी को गति देगा, खासकर डीप-टेक और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में। शुरुआती चरण के उद्यमियों को सहारा मिलेगा और बड़े शहरों से बाहर भी निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। पिछले चरण के अनुभव से स्पष्ट है कि सरकारी एंकर पूंजी निजी निवेश को आकर्षित करती है। इससे उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार और वैश्विक स्तर के उत्पाद तैयार करने में मदद मिलेगी।
इसी क्रम में, नगरीय विकास के लिए एक लाख करोड़ रुपये के ‘नगरीय चुनौती कोष’ का एलान भी अहम है। यह अनुदान-आधारित मॉडल से हटकर बाजार से संसाधन जुटाने, सुधारों को बढ़ावा देने और परिणाम-आधारित ढांचे पर जोर देता है। नगर निकायों को बॉन्ड, बैंक ऋण और साझेदारी के जरिये परियोजनाएं खड़ी करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। छोटे शहरों के लिए ऋण अदायगी गारंटी भी दी जाएगी ताकि उन्हें पहली बार बाजार से धन मिल सके। पानी, सफाई, पुनर्विकास और जलवायु अनुकूल ढांचे पर विशेष ध्यान रहेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
देखा जाए तो, आज के ये फैसले यह संकेत देते हैं कि विकास का अगला चरण केवल खर्च बढ़ाने से नहीं, बल्कि ढांचे और सोच बदलने से आएगा। ‘सेवातीर्थ’ की ओर बढ़ना सत्ता से सेवा की भाषा गढ़ने का प्रयास है। रेल, सड़क और मेट्रो परियोजनाएं बताती हैं कि संपर्क ही आधुनिक अर्थव्यवस्था की धमनियाँ हैं। स्टार्टअप और नगरीय कोष यह मानते हैं कि सरकार अकेले सब नहीं कर सकती, उसे निजी पूंजी और स्थानीय निकायों को भागीदार बनाना होगा।


