Uttarakhand High Court News: सरकारी महकमों की सुस्त चाल पर एक बार फिर न्यायपालिका का चाबुक चला है। पहाड़ से लेकर मैदान तक सरकारी तंत्र में रिक्त पड़े पदों को भरने की कवायद में उदासीनता अब नहीं चलेगी।
उत्तराखंड हाईकोर्ट न्यूज़: सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर सख्त हुई अदालत, मुख्य सचिव को तलब किया पूरा ब्योरा
उत्तराखंड हाई कोर्ट न्यूज: रिक्त पदों पर क्यों नहीं हो रही नियमित भर्ती?
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को सभी विभागों से स्वीकृत रिक्त पदों का पूरा डेटा हलफनामे के माध्यम से न्यायालय में पेश करने का सख्त निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने विभिन्न विभागों में स्वीकृत पदों पर नियमों के अनुसार भर्तियां नहीं किए जाने से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान जारी किया। अदालत की इस सख्ती से उन लाखों युवाओं में उम्मीद जगी है जो सरकारी नौकरी भर्ती की आस में बैठे हैं।
न्यायालय ने सरकारी कार्यालयों में भर्तियों से जुड़ी प्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। नौ जनवरी को पारित अपने आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया कि कई याचिकाओं से यह तथ्य सामने आया है कि विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में रिक्तियां होने के बावजूद राज्य सरकार सामान्य भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। यह स्थिति सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
न्यायालय ने सीधे तौर पर सवाल किया कि जब पद स्वीकृत और उपलब्ध हैं, तो सरकार उन्हें क्यों नहीं भर रही है? याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि राज्य सरकार स्वीकृत स्थायी पदों के बावजूद अनुबंध, संविदा और अस्थायी व्यवस्थाओं के माध्यम से रिक्तियों को भरने का प्रयास कर रही है, जो पूरी तरह अनुचित है और संवैधानिक सिद्धांतों के विरुद्ध है। यह एक ऐसा कदम है जो युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
अनुबंध पर नियुक्तियां: शोषणकारी और मनमाना!
याचिका में इस व्यवस्था को ‘‘शोषणकारी, मनमाना, तर्कहीन’’ और संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का उल्लंघन बताया गया है। साथ ही इसे संविधान के भाग चार में निहित निदेशक सिद्धांतों के भी विरुद्ध कहा गया है। यह स्पष्ट करता है कि सरकार की यह कार्यप्रणाली न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि कानूनी रूप से भी सवालों के घेरे में है।
याचिका के दायरे को व्यापक करते हुए और युवा पीढ़ी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने कहा कि बड़ी संख्या में योग्य और पात्र युवा नियमित नियुक्तियों की प्रतीक्षा में हैं। न्यायालय ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि रिक्तियां मौजूद हैं, लेकिन संबंधित अधिकारी नियमित भर्ती प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा रहे हैं, जो राज्य प्रशासन की निष्क्रियता और उदासीनता को दर्शाता है। इससे प्रदेश के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी भर्ती का रास्ता और कठिन हो जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि प्रत्येक विभाग में स्थायी और स्वीकृत रिक्तियों की बड़ी संख्या होने के बावजूद नियमित चयन प्रक्रिया अपनाने के बजाय इन पदों को अनुबंध, दैनिक वेतनभोगी और तदर्थ कर्मचारियों के माध्यम से भरा जा रहा है, जिसे अदालत ने गंभीर चिंता का विषय बताया। इसने यह भी चिंता व्यक्त की कि समय बीतने के साथ योग्य युवाओं की आयु सीमा पार हो जाती है, जिससे उनके सपनों पर पानी फिर जाता है।
अपने विस्तृत आदेश में न्यायालय ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे सभी विभागों से स्वीकृत रिक्तियों का पूरा ब्योरा एकत्र कर हलफनामा दाखिल करें। साथ ही यह भी स्पष्ट करें कि स्थायी, नियमित और स्वीकृत पदों के उपलब्ध होने के बावजूद नियमित भर्ती प्रक्रिया क्यों शुरू नहीं की जा रही है। न्यायालय ने यह भी पूछा कि श्रेणी-चार के पदों को ‘डेड कैडर’ क्यों घोषित किया गया है, जिससे उन पदों पर भी भर्ती रुक गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी, जिस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

