
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज मोतिहारी के गांधी मैदान में दीप प्रज्ज्वलित कर समाज सुधार अभियान की शुरुआत की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के साथ समाज सुधार होगा तो समाज, राज्य और देश आगे बढ़ेगा हमारी सरकार बिहार में लगातार विकास के काम कर रही है।
निरंतर विकास, बिहार को बढ़ाना है

नीतीश कुमार ने शराबबंदी, दहेज व बाल विवाह के खिलाफ बोतले-बोलते उन्होंने बड़ी घोषणा कर दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले देखते थे कि शादी के कार्ड पर लिखा रहता था कि हम इस शादी में दहेज नहीं ले रहे हैं। लेकिन अब लोग ये लिखते ही नहीं हैं। ये बात ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि मैं बता दे रहा हूं कि चाहे कोई भी कितना भी करीबी क्यों ना हो, जिस कार्ड पर अब ये नहीं लिखा होगा, मैं उस शादी में नहीं जाउंगा। आप भी इस बात का प्रण लीजिए। नीतीश ने शराबबंदी को लेकर पुरानी बातों पर ही जोर दिया और कहा कि शराबबंदी महिलाओं के कहने पर किया। इससे अब समाज की स्थिति काफी सुधर गई है। आप लोग भी साथ दें और प्रण लें कि शराबबंदी, दहेज और बाल विवाह के खिलाफ खड़ा रहेंगे।
नीतीश ने शराबबंदी कानून की चर्चा करते हुए कहा कि कितना भी अच्छा काम कर लीजिए, कोई ना कोई गड़बड़ी करने वाला रहेगा ही। जब हमने शराबबंदी कानून लागू की थी तो बहुत सारे लोग खुश थे। हमने तो पहले ग्रामीण क्षेत्रों में शराबबंदी की थी, लेकिन कितनी खुशी की बात है कि शहरी इलाकों में भी लोगों नें इसे स्वीकार किया। अब गड़बड़ी हो रही है लेकिन इसे लागू तो करना ही करना है, इसमें कोई दो राय नहीं है।
उन्होंने कहा कि समाज के हर तबके के उत्थान के साथ-साथ समाज के हाशिए पर के व्यक्ति को मुख्य धारा में लाने के लिए काम किया जा रहा है। महिलाओं, एससीएसटी, अतिपिछड़े, अल्पसंख्यकों के उत्थान के साथ-साथ सभी वर्गों के लिये काम किया गया, किसी की उपेक्षा नहीं की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के साथ-साथ हमलोग समाज सुधार के लिए भी काम कर रहे हैं। आपको पता है हमलोग शराब को लेकर वर्ष 2011 से अभियान चला रहे हैं। कर्पूरी ठाकुर जी जब वर्ष 1977 में मुख्यमंत्री बने थे, तो उन्होंने शराबंदी लागू की। इसे दो वर्ष बाद फिर से शुरु कर दिया गया। सभी प्रमण्डलों में महिलाओं के साथ, जीविका दीदीयों के साथ हमने बैठक की। निरंतर यह अभियान चल रहा है। 21 जनवरी, 2017 को शराबबंदी के पक्ष में मानव श्रृंखला बनी, जिसमें चार करोड़ से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया।
अधिकारियों के साथ हम शराबबंदी के क्रियान्वयन को लेकर नौ बार बैठक कर चुके हैं। बड़े पैमाने पर लोगों ने शराब पीना छोड़ दिया है। महिलाओं के एक कार्यक्रम में एक महिला ने कहा कि मेरे पति काम से लौटते थे दारू पीकर आते थे, परिवार में सभी को बुरा लगता था, देखने में खराब लगते थे। अब जब शराबबंदी हो गई तो बाजार से सब्जी, फल लेकर आते हैं और घर में आते हैं तो मुस्कुराते हैं। अब देखने में अच्छे लगते हैं, यह कितना बड़ा परिवर्तन हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी कोई काम कीजिएगा तो कुछ लोग गड़बड़ करने वाले होते हैं। किसी मजहब, धर्म के मानने वाले लोग हों पूरे इतिहास को उठाकर देख लीजिए, कितना भी अच्छा काम कीजिएगा कुछ लोग तो गड़बड़ी करेंगे ही। शराबबंदी का कितना असर पड़ा है, आप खुद ही देख लीजिए। 01 अप्रैल, 2016 को पहले ग्रामीण इलाके में देशी और विदेशी शराब पर हमलोगों ने रोक लगायी, जबकि शहरी इलाकों में विदेशी शराब बंद नहीं किया गया था।
शहरों में महिलाएं, पुरुष, लड़के-लड़कियों ने शराब के आवंटित दुकानों के खोले जाने पर कड़ा विरोध जताया। इसके बाद 05 अप्रैल, 2016 को राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गई। आपको याद होगा कि पटना के गांधी मैदान में मानव श्रृंखला बनी थी, सभी ने शपथ ली थी। मीडिया के साथी जो हैं उन लोगों ने भी शपथ ली थी। बहनों की इच्छा से ये सारा काम हो रहा है। कितने लोगों ने शराब पीना छोड़ दिया। कई लोग इधर-उधर करके शराब पी रहे हैं और उन्हें गलत चीजें मिलाकर पिलाये जाने से उनकी मौतें भी हो रही हैं। इस पर सोचिए की शराब कितनी खराब चीज है।
बाल विवाह से बेटियों का जीवन बर्बाद होता है
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल विवाह करने से तरह-तरह की परेशानी होती है, बेटियों की जिंदगी बर्बाद हो जाती है। किसी भी स्तर पर बाल विवाह मत करने दीजिए। हम सभी पुरुष, स्त्री यहां हैं। महिलाओं की देन है कि हमको ये जीवन मिला है। इसलिए पुरुष-स्त्री समाज के दोनों अंग है, इन दोनों के वगैर समाज का विकास संभव नहीं। महिलाओं और लड़कियो के प्रति अच्छी भावना रखें, तभी हम आगे बढ़ पाएंगे। बाल विवाह की शिकार लड़कियों के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है और जन्म लेने वाले बच्चे भी अस्वस्थ रहते हैं।
दहेज प्रथा को मिटाने के लिए मिलकर करें काम
मुख्यमंत्री ने कहा कि दहेज प्रथा खराब है। कई जगह पर लोग शादी के बाद लड़की को तंग करते हैं कि और पैसे मिलने चाहिए। कानूनी रूप से दहेज लेना अपराध है। सभी लोगों से आग्रह है कि प्रचार कीजिए की दहेज प्रथा बहुत खराब काम है। हमने कहा था कि जिस कार्ड पर दहेज मुक्त लिखा होगा उसी शादी में हम जाएंगे, आज फिर इस बात को दोहराते हैं कि मेरा कितना भी कोई नजदीकी होगा, अगर कार्ड पर दहेज मुक्त शादी नहीं लिखा होगा तो हम उस शादी में नहीं जाएंगे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 24 दिसंबर को गोपालगंज जाएंगे। इस अभियान के तहत मुख्यमंत्री 12 जिलों में जाएंगे और वहीं से आस-पास के जिलों के विकास कार्यों की भी समीक्षा करेंगे। सभी जगहों पर मुख्यमंत्री जनसभा को भी संबोधित करेंगे। उनकी कुल पांच सभाएं होंगी।
सीएम नीतीश 27 को सासाराम, 29 को मुजफ्फरपुर और 30 दिसंबर को समस्तीपुर जाएंगे। इसके बाद जनवरी में चार को गया जाएंगे। अंतिम सभा पटना में 15 जनवरी को होनी है। सीएम की जनसभाओं में जिलों के जीविका समूह की महिलाएं भाग लेंगी, जिसमें पूर्ण शराबबंदी अभियान, दहेज प्रथा उन्मूनल, बाल विवाह मुक्त अभियान से संबंधित राज्य सरकार की महत्वपूर्ण नीतियों और निर्णयों पर विचार रखे जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने जीविका समूह को बनाया। वर्ष 2006 में मुजफ्फरपुर के 2-3 जगहों पर जाकर हमने इनके कार्यों को देखा था। स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाएं काम कर रही थीं। फिर हमने विदेश से कर्जा लेकर 5 ब्लॉक में इसको शुरू कराया। हमलोगों का 01 लाख स्वयं सहायता समूह बनाने का लक्ष्य था। अब तो एक लाख के लक्ष्य को भी पूरा कर लिया गया है। 01 करोड़ 27 लाख महिलाएं इससे जुड़ गई हैं। बिहार में ही जीविका नामकरण किया गया। उस समय की केंद्र सरकार ने पूरे देश में आजीविका के नाम से इसको शुरू किया गया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत 4.5 करोड़ की राशि मुख्यमंत्री ने जीविका की दीदीयों को डमी चेक के रूप में प्रदान कर किया। 7,252 स्वयं सहायता समूह को बैंकों द्वारा प्रदत 95 करोड़ पांच लाख रुपये की राशि का डमी चेक मुख्यमंत्री ने प्रदान किया। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत दो जलाशयों के रखरखाव के लिए के लिए 21 लाख 29 हजार रुपये का डमी चेक मुख्यमंत्री ने प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने जीविका दीदीयों कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टरों की चाभी जीविका दीदीयों को सौंपा। अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत कुछ लाभार्थियों को तथा सड़क दुर्घटना के अंतर्गत मिलने वाली मुआवजे की राशि कुछ आश्रित परिवारों को सांकेतिक रूप से प्रदान किया गया।







