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30 अगस्त, 2024
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Gyanvapi Survey: 26 जुलाई तक Supreme Court ने ज्ञानवापी सर्वे पर लगाई रोक

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ज्ञानवापी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई के सर्वे पर 26 जुलाई शाम पांच बजे तक रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मस्जिद में कोई तोड़फोड़ नहीं होनी चाहिए।

इस पर उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एएसआई के आज के सर्वे के दौरान कोई तोड़फोड़ नहीं की गई है। ना ही इसकी कोई योजना है। अभी सिर्फ सर्वे में मस्जिद की नपाई का काम किया जा रहा है। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने सर्वे के काम को दो-तीन दिन टालने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत के निर्देश पर सोमवार की सुबह से शुरू ज्ञानवापी परिसर के एएसआई सर्वे पर सुप्रीम कोर्ट ने 26 जुलाई तक रोक लगा दी है।

उधर, सुबह से ज्ञानवापी में एएसआई के सर्वे में मस्जिद परिसर की नापजोख के साथ फोटोग्राफी की गई। नींव के पास खोदाई कर मिट्टी और ईंट-पत्थर के टुकड़े सैंपल के तौर पर एएसआई ने लिया। मशीनों से दीवारों को स्कैन करने के साथ कागज लगा कर उनका सैंपल भी टीम ने लिया।

43 सदस्यीय एएसआई टीम ने शुरुआती दौर में परिसर के हर पत्थर और ईंट की ऊंचाई भी नापी। सर्वे के लिए टीम झाड़ू और फावड़े से लेकर अत्याधुनिक मशीनों का प्रयोग भी किया। सर्वे के दौरान मुस्लिम पक्ष का कोई सदस्य नहीं पहुंचा था। मुस्लिम पक्ष की गैरमौजूदगी में सर्वे के काम में सहयोग के लिए पीडब्ल्यूडी और बिजली विभाग की टीम को लगाया गया था।

जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश के आदेश पर सोमवार की सुबह ज्ञानवापी परिसर स्थित सील वजूखाने को छोड़कर शेष अन्य स्थानों का वैज्ञाानिक सर्वे के लिए एएसआई की टीम कड़ी सुरक्षा के बीच ज्ञानवापी परिसर पहुंची थी।

ज्ञानवापी परिसर में पुरातत्व सर्वे को लेकर देर रात एएसआई के एडिशनल डिप्टी डायरेक्टर प्रोफेसर आलोक त्रिपाठी ने पुलिस आयुक्त मुथा अशोक जैन और जिलाधिकारी एस राजलिंगम सहित जिला प्रशासन के अफसरों संग बैठक की थी।

बैठक में तय हुआ कि पुरातत्व सर्वे के दौरान ज्ञानवापी परिसर में एक समय में वादी व प्रतिवादी के साथ केवल एक-एक अधिवक्ता समेत 10 लोग मौजूद रहेंगे। इसके लिए रात में ही 20 लोगों के नाम से पास जारी भी हो गए। अधिकारियों ने बैठक में सर्वेक्षण की तैयारियों पर चर्चा की।

सर्वे टीम ने सुरक्षा, संसाधन आदि कई बिंदुओं पर सहयोग मांगा। जिला प्रशासन ने सभी संसाधन उपलब्ध करा दिए। एएसआई के कहने पर पुलिस आयुक्त और डीएम ने रविवार की देर रात ही अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी और हिंदू पक्ष के साथ अलग-अलग बैठक की।

जानकारी के अनुसार, ज्ञानवापी में सोमवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) ने सर्वे किया। एएसआई के सर्वे के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में ज्ञानवापी मस्जिद मैनेजमेंट कमेटी, अंजुमन इंतजामिया मस्जिद ने वाराणसी की जिला अदालत के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है।

अंजुमन इंतजामिया मस्जिद की तरफ से वरिष्ठ वकील हुजैफा अहमदी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। वाराणसी की जिला अदालत ने ही ज्ञानवापी का सर्वे करने का आदेश दिया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद मैनेजमेंट कमेटी से कहा है कि वह वाराणसी जिला अदालत के फैसले पर रोक के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील करें।

देश के उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने मुस्लिम पक्ष अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी को हाईकोर्ट जाने के लिए भी कहा है। हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के दो दिन के स्टे पर कहा है कि हम भी हाईकोर्ट जाएंगे और मसाजिद कमेटी की याचिका पर आपत्ति दर्ज कराएंगे।

इस संबंध में वाराणसी कमिश्नर कौशलराज शर्मा ने पत्रकारों को बताया कि हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे। उन्होंने बताया कि उच्चतम न्यायालय के ज्ञानवापी सर्वे केस में एएसआई को 26 जुलाई तक सर्वे रोकने का निर्देश प्राप्त हुआ है। इसके क्रम में सर्वे की कार्यवाही 26 जुलाई की शाम तक तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है।

मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि एएसआई सर्वे सोमवार को शुरु हुआ है और हमारी अपील है कि इसे दो-तीन दिन तक टाल दिया जाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि एएसआई की ओर से कोई खुदाई या तोड़फोड़ नहीं की जा रही है, ऐसे में मस्जिद में प्रार्थना कैसे प्रभावित हो सकती है?

इस पर मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी मस्जिद में मिली शिवलिंग जैसी संरचना की कार्बन डेटिंग पर भी रोक लगा दी थी तो अब सर्वे की क्या जल्दी है। यह जगह 1500 के दशक से एक मस्जिद रही है। अहमदी ने सुप्रीम कोर्ट से यथास्थिति बरकरार रखने की मांग की।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 26 जुलाई यानी बुधवार तक ज्ञानवापी परिसर के सर्वे पर रोक लगा दी और यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया। साथ ही मुस्लिम पक्ष को वाराणसी जिला अदालत के फैसले पर रोक के लिए हाईकोर्ट जाने को कहा। वहीं हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने भी हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल करने की बात कही है।

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