

MS Dhoni: भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी का साल 2017 में अचानक टेस्ट और वनडे कप्तानी से इस्तीफा देना हर क्रिकेट प्रेमी के लिए एक बड़ा झटका था। आखिर वो कौन सा राज था, जिसने माही को ऐसा अप्रत्याशित फैसला लेने पर मजबूर किया? अब उस दिन का एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसे सुनकर आप भी चौंक जाएंगे।
MS Dhoni: आखिर क्यों छोड़ी थी माही ने अचानक कप्तानी? सामने आया बड़ा खुलासा!
MS Dhoni का चौंकाने वाला फैसला
जनवरी 2017 में एमएस धोनी ने भारतीय क्रिकेट की वनडे और टी20 कप्तानी छोड़ दी थी, जिससे पूरे क्रिकेट जगत में हलचल मच गई थी। तब किसी को इसकी पुख्ता वजह नहीं पता चली थी, लेकिन अब पूर्व राष्ट्रीय चयनकर्ता जतिन परांजपे ने उस ऐतिहासिक दिन की इनसाइड स्टोरी साझा की है, जब धोनी ने खुद ही कप्तानी छोड़ने का मन बनाया था। परांजपे ने बताया कि कैसे एक प्रैक्टिस सेशन के बाद धोनी ने एक बड़े फैसले से सबको चौंका दिया था।
पूर्व सेलेक्टर जतिन परांजपे के मुताबिक, धोनी ने उन्हें फोन करके सूचित किया था कि वह अब भारतीय टीम की सीमित ओवरों की कप्तानी छोड़ना चाहते हैं। धोनी ने बताया था कि यह विराट कोहली के लिए टीम की बागडोर संभालने का सही समय है, खासकर 2019 विश्व कप को ध्यान में रखते हुए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह महेंद्र सिंह धोनी की दूरदर्शिता ही थी कि उन्होंने समय रहते ही नए कप्तान को तैयार करने की जिम्मेदारी ले ली।
धोनी की दूरदर्शिता और कप्तानी का हस्तांतरण
परांजपे ने कहा, “धोनी ने मुझे फोन किया और कहा कि वह कप्तानी छोड़ना चाहते हैं। मुझे याद है कि वह एक प्रैक्टिस मैच खेल रहे थे। मैंने उनसे पूछा, ‘क्या यह सच है?’ उन्होंने कहा, ‘हां, यह सही समय है। विराट के लिए टीम की कमान संभालने का यह सबसे अच्छा वक्त है।'” यह घटना भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई, जब एक युग का अंत हुआ और दूसरे की शुरुआत। धोनी हमेशा से ही ऐसे खिलाड़ी रहे हैं, जो टीम हित को सबसे ऊपर रखते हैं, और उनका यह फैसला भी इसी सोच का परिणाम था।
यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि धोनी ने कभी भी अपने फैसलों को लेकर ज्यादा शोर-शराबा नहीं किया। उन्होंने हमेशा शांत रहकर बड़े और साहसिक निर्णय लिए। कप्तानी छोड़ने का यह निर्णय भी उनकी इसी शैली का हिस्सा था। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सुनिश्चित किया कि टीम का भविष्य सुरक्षित हाथों में रहे।
भारतीय क्रिकेट पर असर
धोनी के इस कदम ने विराट कोहली को सीमित ओवरों में पूरी तरह से टीम की बागडोर संभालने का अवसर दिया, जिससे उन्हें 2019 विश्व कप की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिला। धोनी ने कप्तान के रूप में अपना शानदार कार्यकाल समाप्त करने के बाद, एक अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज और मेंटोर के रूप में टीम में अपनी भूमिका निभाई। यह भारतीय क्रिकेट के लिए एक सुचारु परिवर्तन था, जिसने टीम को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ने में मदद की। खेल जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें।
यह स्पष्ट है कि धोनी का यह फैसला केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं था, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए एक रणनीतिक कदम था। उनकी यह सोच और बलिदान उन्हें truly एक महान खिलाड़ी बनाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनमें 2007 का टी20 विश्व कप, 2011 का वनडे विश्व कप और 2013 की चैंपियंस ट्रॉफी शामिल है।


