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फ़रवरी, 19, 2026
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AI Technology: शिक्षा में क्रांति या चुनौती? ChatGPT से बदल रहा मूल्यांकन का भविष्य

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AI Technology: आधुनिक शिक्षा प्रणाली एक अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता प्रभाव अवसरों और चुनौतियों, दोनों के द्वार खोल रहा है। जहां एक ओर यह शिक्षकों और छात्रों के लिए सीखने और सिखाने के नए रास्ते बना रहा है, वहीं दूसरी ओर यह पारंपरिक मूल्यांकन पद्धतियों के समक्ष जटिल प्रश्न भी खड़े कर रहा है।

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AI Technology: शिक्षा में क्रांति या चुनौती? ChatGPT से बदल रहा मूल्यांकन का भविष्य

AI Technology और नए शैक्षणिक कौशल

शिक्षा के क्षेत्र में AI Technology के बढ़ते कदम ने शिक्षकों को प्रॉम्प्टिंग, आलोचनात्मक चिंतन और मौलिक लेखन को नए और आवश्यक कौशलों के रूप में देखने पर मजबूर कर दिया है। छात्रों को अब केवल जानकारी रटने की बजाय, AI उपकरणों का प्रभावी ढंग से उपयोग करना और उनसे प्राप्त जानकारी का विश्लेषण करना सीखना होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह बदलाव शिक्षकों के लिए पाठ्यक्रम डिजाइन और मूल्यांकन रणनीतियों में मौलिक परिवर्तन की मांग करता है।

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शिक्षक अब ऐसे मूल्यांकन तरीके विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो AI की मदद से तैयार किए गए उत्तरों और छात्र के वास्तविक ज्ञान एवं समझ के बीच अंतर कर सकें। जेनरेटिव एआई (Generative AI) जैसे उपकरण छात्रों को असाइनमेंट तैयार करने में सहायता कर सकते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि छात्र केवल कॉपी-पेस्ट न करें, बल्कि अवधारणाओं को गहराई से समझें। इस चुनौती के बीच, असली शिक्षा का सार—मानवीय आलोचनात्मक सोच और रचनात्मकता—को बचाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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तकनीक का दोहरा प्रभाव

ChatGPT और अन्य AI-आधारित उपकरणों ने शिक्षा में व्यक्तिगत सीखने, सामग्री निर्माण और प्रशासनिक कार्यों को स्वचालित करने जैसे कई अवसर प्रदान किए हैं। ये उपकरण शिक्षकों को दोहराए जाने वाले कार्यों से मुक्ति दिलाकर छात्रों के साथ अधिक व्यक्तिगत जुड़ाव बनाने का समय दे सकते हैं। हालांकि, इसके साथ ही मशीन पर अत्यधिक निर्भरता, साहित्यिक चोरी और छात्रों की मौलिक सोच के विकास में बाधा जैसी चिंताएं भी उभर रही हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें पूरी तरह से मशीनों पर नहीं छोड़ा जा सकता, जैसे कि मानवीय भावनाएं, नैतिकता, सहानुभूति और रचनात्मक समस्या-समाधान। जेनरेटिव एआई (Generative AI) की क्षमताएं बढ़ रही हैं, लेकिन ये मानवीय अनुभव और अंतर्ज्ञान का विकल्प नहीं बन सकतीं। इसलिए, शिक्षा में AI का उपयोग एक संतुलित दृष्टिकोण के साथ होना चाहिए, जहां तकनीक एक सहायक उपकरण के रूप में कार्य करे, न कि मानव बुद्धि का प्रतिस्थापन। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि हम प्रौद्योगिकी को कैसे अपनाते हैं ताकि यह छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करे, न कि केवल उन्हें स्वचालित उत्तरों पर निर्भर बनाए।

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