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मार्च, 6, 2026
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फ्लाइट में Airplane Mode: क्या सच में है यह इतना ज़रूरी?

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Airplane Mode: फ्लाइट में यात्रा करते समय, एक शब्द जो अक्सर हमारे कानों में गूंजता है, वह है ‘Airplane Mode’। क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर क्यों हर उड़ान से पहले हमें अपने मोबाइल फोन को इस मोड पर डालने को कहा जाता है? क्या वाकई स्मार्टफोन से निकलने वाली तरंगे विमान के संवेदनशील सिस्टम पर असर डाल सकती हैं, या यह सिर्फ एक पुरानी परंपरा का पालन है? आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, जो आपको इस सवाल का वैज्ञानिक और तकनीकी जवाब दे रहा है।

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फ्लाइट में Airplane Mode: क्या सच में है यह इतना ज़रूरी?

विमान यात्रा के दौरान, यात्रियों को अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को ‘एयरप्लेन मोड’ पर रखने का निर्देश दिया जाता है। यह निर्देश केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि विमानन सुरक्षा (विमान सुरक्षा) से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल है। आइए जानते हैं कि यह मोड कैसे काम करता है और क्यों इसकी अनदेखी खतरनाक हो सकती है।

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Airplane Mode: कैसे करता है काम और क्यों है ज़रूरी?

जब आप अपने स्मार्टफोन या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर ‘Airplane Mode’ सक्रिय करते हैं, तो यह डिवाइस के सभी वायरलेस संचार कार्यों को तुरंत बंद कर देता है। इसमें सेलुलर नेटवर्क (2G, 3G, 4G, 5G), वाई-फाई, ब्लूटूथ और जीपीएस शामिल हैं। आसान शब्दों में कहें तो, आपका फोन एक सिग्नल-उत्सर्जन करने वाले डिवाइस से एक निष्क्रिय गैजेट में बदल जाता है।

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इसका मुख्य कारण यह है कि स्मार्टफोन से निकलने वाले रेडियो सिग्नल, विशेष रूप से सेलुलर सिग्नल, विमान के संचार और नेविगेशन सिस्टम में हस्तक्षेप कर सकते हैं। हवाई जहाज, जमीन पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से लगातार संपर्क में रहते हैं और अपने मार्ग को ट्रैक करने के लिए कई संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग करते हैं। ये सभी सिस्टम विशिष्ट रेडियो फ्रीक्वेंसी पर काम करते हैं। जब कोई फोन सक्रिय होता है, तो वह लगातार नेटवर्क की तलाश में सिग्नल भेजता है, जिससे इन महत्वपूर्ण विमान प्रणालियों के साथ इंटरफेरेंस होने का खतरा बढ़ जाता है। कल्पना कीजिए कि यदि उड़ान के दौरान पायलट और एटीसी के बीच संचार में व्यवधान आ जाए, तो इसके परिणाम कितने गंभीर हो सकते हैं।

अनदेखी के गंभीर परिणाम और यात्रियों की जिम्मेदारी

हालांकि आधुनिक विमानों को ऐसे हस्तक्षेपों से बचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, लेकिन अनगिनत फोनों से निकलने वाले सिग्नल का सामूहिक प्रभाव, जिसे “क्यूमुलेटिव इंटरफेरेंस” कहा जाता है, जोखिम पैदा कर सकता है। विमानन नियामक संस्थाएं जैसे कि फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने विमान में ‘Airplane Mode’ के उपयोग को अनिवार्य किया है। इन नियमों का उल्लंघन करने पर न केवल भारी जुर्माना लग सकता है, बल्कि इससे उड़ान की सुरक्षा (विमान सुरक्षा) पर भी सवाल उठ सकते हैं। एक जिम्मेदार यात्री के तौर पर, हमें इन निर्देशों का पालन करना चाहिए ताकि हर उड़ान सुरक्षित रहे।

यह समझना महत्वपूर्ण है कि आपकी सुरक्षा और सभी यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए, जब आप अगली बार उड़ान भरें, तो अपने फोन को ‘Airplane Mode’ पर रखना न भूलें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें

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