

Robot Dog: हाल ही में एआई समिट में गलगोटियाज यूनिवर्सिटी द्वारा एक ‘अद्भुत’ रोबोट डॉग ‘ओरियन’ का प्रदर्शन विवादों के घेरे में आ गया है। इस प्रदर्शन ने तकनीकी जगत में पारदर्शिता और ब्रांडिंग को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जब यह सामने आया कि जिस रोबोट को ‘ओरियन’ बताया जा रहा था, वह दरअसल चीन की जानी-मानी कंपनी यूनिट्री (Unitree) का लोकप्रिय मॉडल Go2 था।
Robot Dog: एआई समिट में ‘ओरियन’ के नाम पर चीनी रोबोट Go2 का प्रदर्शन, क्या है सच?
गलगोटियाज यूनिवर्सिटी ने हाल ही में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट (AI Impact Summit) में अपने नवीनतम इनोवेशन के तौर पर एक अत्याधुनिक रोबोट डॉग ‘ओरियन’ को प्रदर्शित किया था। विश्वविद्यालय ने दावा किया था कि यह रोबोट उनके छात्रों और फैकल्टी द्वारा विकसित किया गया है। शुरुआती तौर पर इसे एक बड़ी उपलब्धि माना गया, लेकिन जल्द ही सोशल मीडिया और तकनीकी जानकारों के बीच इसकी वास्तविकता को लेकर सवाल उठने लगे।
भारत में Robot Dog ‘ओरियन’ की हकीकत: यूनिट्री Go2 का अनावरण
जांच में पता चला कि जिसे ‘ओरियन’ कहा जा रहा था, वह वास्तव में शंघाई स्थित यूनिट्री रोबोटिक्स कंपनी (Unitree Robotics Company) द्वारा निर्मित ‘यूनिट्री Go2’ मॉडल था। यह कोई सामान्य स्मार्ट रोबोट नहीं है, बल्कि एक उच्च-तकनीकी चार-पैरों वाला रोबोट है जो अपने उन्नत नेविगेशन, संतुलन और एआई क्षमताओं के लिए जाना जाता है। इस खुलासे के बाद गलगोटियाज यूनिवर्सिटी को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा। इस घटना ने भारत में तकनीकी नवाचारों के दावों की प्रामाणिकता पर एक महत्वपूर्ण प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
**यूनिट्री Go2 के प्रमुख फीचर्स:**
* एडवांस्ड मोबिलिटी: यह रोबोट विभिन्न प्रकार की सतहों पर आसानी से चल सकता है, दौड़ सकता है और कूद सकता है।
* एआई-पावर्ड नेविगेशन: इसमें LiDAR सेंसर और विजुअल सेंसिंग क्षमताएं हैं जो इसे बाधाओं से बचने और अपने परिवेश को समझने में मदद करती हैं।
* लंबी बैटरी लाइफ: एक बार चार्ज करने पर यह कई घंटों तक काम कर सकता है।
* मॉड्यूलर डिजाइन: इसे विभिन्न उद्देश्यों के लिए एक्सेसरीज और मॉड्यूल के साथ कस्टमाइज किया जा सकता है।
* इंटेलिजेंट इंटरैक्शन: यह आवाज कमांड और जेस्चर को समझ सकता है।
यूनिट्री Go2 एक शक्तिशाली स्मार्ट रोबोट है जिसका उपयोग अनुसंधान, शिक्षा और यहां तक कि कुछ औद्योगिक अनुप्रयोगों में भी किया जाता है। भारत में इसकी अनुमानित कीमत लगभग 3 से 5 लाख रुपये के बीच है, जो इसकी तकनीकी क्षमताओं और फीचर्स पर निर्भर करती है। विश्वविद्यालय द्वारा इसे अपने खुद के उत्पाद के रूप में पेश करना गलत जानकारी देने जैसा था।
तकनीकी दावों और पारदर्शिता का महत्व
यह घटना भारतीय शिक्षण संस्थानों में तकनीकी नवाचारों को प्रस्तुत करने के तरीके पर गहन विचार-विमर्श का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों को वास्तविक परियोजनाओं पर काम करने के लिए प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी भी उत्पाद या तकनीक को प्रस्तुत करते समय उसकी वास्तविक उत्पत्ति और योगदान को स्पष्ट रूप से स्वीकार करना अनिवार्य है। ऐसी घटनाओं से संस्थानों की विश्वसनीयता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और नवाचार के प्रति लोगों का विश्वास डगमगाता है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
गलगोटियाज यूनिवर्सिटी ने इस विवाद पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन यह मामला निश्चित रूप से तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर करता है। देशज टाइम्स बिहार का N0.1 आपको ऐसी ही विश्वसनीय खबरें देता रहेगा।



