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फ़रवरी, 19, 2026
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यूजर डेटा प्राइवेसी पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: मेटा और व्हाट्सऐप को सख्त चेतावनी

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User Data Privacy: डिजिटल युग में हर क्लिक, हर शेयर और हर मैसेज के साथ हमारी निजी जानकारी का एक विशाल जाल बुन रहा है। ऐसे में यूजर डेटा की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं, खासकर जब बात सोशल मीडिया दिग्गजों की हो। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मेटा और व्हाट्सऐप को कड़ी फटकार लगाते हुए इस संवेदनशील मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है, जो करोड़ों भारतीयों के डिजिटल अधिकारों को सीधे प्रभावित करेगा।\n\n

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यूजर डेटा प्राइवेसी पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: मेटा और व्हाट्सऐप को सख्त चेतावनी

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यूजर डेटा प्राइवेसी: अदालत का सख्त रुख

\nभारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मेटा (Meta) और उसकी मैसेजिंग सेवा व्हाट्सऐप (WhatsApp) को सीधे तौर पर चेताया है कि वे अपने यूज़र्स का निजी डेटा विज्ञापन उद्देश्यों के लिए किसी भी कीमत पर साझा नहीं कर सकते। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, अदालत ने दोनों कंपनियों को एक शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया है, जिसमें स्पष्ट रूप से यह बताया जाए कि वे भविष्य में यूजर डेटा का उपयोग कैसे करेंगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं या अदालत के आदेशों का पालन नहीं करते हैं, तो मामले को सीधे तौर पर खारिज कर दिया जाएगा।\n\nयह विवाद तब शुरू हुआ जब व्हाट्सऐप ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव की घोषणा की थी, जिससे यूजर्स के डेटा को मेटा के अन्य प्लेटफॉर्म्स के साथ साझा करने की आशंका बढ़ गई थी। इस नीति के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गईं थीं, जिसमें डेटा सुरक्षा और निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया गया था। अदालत ने इस बात पर जोर दिया है कि यूजर्स की सहमति के बिना डेटा साझा करना उनके मूलभूत अधिकारों का हनन है।\nरियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/business/\n\n

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यूजर डेटा सुरक्षा: आगे की राह और प्रभाव

\nन्यायालय ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया है कि डेटा विज्ञापन के लिए साझा नहीं किया जा सकता है। यह आदेश लाखों भारतीय यूजर्स के लिए एक बड़ी राहत है, जिनके निजी डेटा के दुरुपयोग का डर बना रहता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस फैसले से अन्य तकनीकी कंपनियों पर भी दबाव बढ़ेगा कि वे अपनी डेटा प्राइवेसी नीतियों को अधिक पारदर्शी और यूजर-अनुकूल बनाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत में डिजिटल अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो यूजर्स को अपनी जानकारी पर अधिक नियंत्रण रखने का अधिकार देगा। सुप्रीम कोर्ट का यह सख्त रुख यह दर्शाता है कि अदालतें नागरिकों की निजता के अधिकार को कितनी गंभीरता से लेती हैं।\n\nव्हाट्सऐप और मेटा को अब इस शपथपत्र में अपनी डेटा साझाकरण नीतियों को विस्तार से समझाना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई तक, यह देखना दिलचस्प होगा कि ये तकनीकी दिग्गज इस चुनौती का सामना कैसे करते हैं। यह केवल एक कंपनी का मुद्दा नहीं, बल्कि सभी प्लेटफॉर्म्स के लिए एक मिसाल कायम करेगा जो यूजर डेटा का प्रबंधन करते हैं। देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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