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फ़रवरी, 17, 2026
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Bihar की लाडली बेटी बनीं Prime Minister…कमला प्रसाद-बिसेसर बनीं Trinidad और Tobago की PM

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बिहार आज दोबारा गर्व से गौरवान्वित है। कमला प्रसाद-बिसेसर का दोबारा त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री बनना न सिर्फ प्रवासी भारतीयों की राजनीतिक सफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भारत, विशेष रूप से बक्सर जिले के भेलूपुर गांव की अंतरराष्ट्रीय पहचान को भी मज़बूत करता है।

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बिहार के बक्सर जिले की मूल निवासी कमला प्रसाद-बिसेसर एक बार फिर त्रिनिदाद और टोबैगो (Trinidad and Tobago) की प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं। कमला इससे पहले 2010 से 2015 तक इस पद पर रह चुकी हैं। अब यूएनसी पार्टी की जीत के साथ वे फिर इस पद पर काबिज होंगी।

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  • बिहार से रिश्ता: उनके पूर्वज 1889 में बक्सर जिले के भेलूपुर गांव से कोलकाता होते हुए ब्रिटिश शासन के अंतर्गत मजदूरी के लिए त्रिनिदाद पहुंचे थे।

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  • अपनी जड़ों की तलाश: 2012 में कमला ने अपने गांव भेलूपुर का दौरा किया, स्थानीय मंदिर में पूजा की और रिश्तेदारों से मिलीं।

    त्रिनिदाद में प्रवास करने से पहले उनके पूर्वज भेलूपुर से थे। उनके परदादा राम लखन 1889 में कोलकाता छोड़कर त्रिनिदाद चले गए थे। ब्रिटिश शासन के दौरान, विदेश यात्रा करने वाले मजदूरों के रिकॉर्ड में भेलूपुर का नाम शामिल था, जिससे कमला को अपनी जड़ों का पता लगाने में मदद मिली।

  • विकास में योगदान का वादा: उन्होंने गांव के स्कूल और सामुदायिक केंद्र के लिए आर्थिक सहयोग की बात कही थी।

    2010 में प्रधानमंत्री बनने के बाद कमला ने अपनी विरासत को तलाशने का फैसला किया। 2012 में, वह अपने पैतृक गांव भेलूपुर गईं और दूर के रिश्तेदारों से मिलीं। इस यात्रा के दौरान गांव वालों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने स्थानीय मंदिर में पूजा-अर्चना की और अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी।

  • भावनात्मक जुड़ाव: कमला ने कहा था कि भेलूपुर उनकी आत्मा का हिस्सा है और वहां की मिट्टी से उनका अटूट संबंध है।

यह भी पढ़ें:  Buxar Railway Station: बक्सर रेलवे स्टेशन को मिलेगी 'एयरपोर्ट' जैसी चमक, 130 करोड़ से बदलेगी तस्वीर

प्रवासी भारतीयों के लिए संदेश: कमला की यह यात्रा और राजनीतिक सफर दुनियाभर के भारतीय मूल के लोगों के लिए यह संदेश देता है कि जड़ें कहीं भी हों, पहचान और सफलता की राह वैश्विक हो सकती है

कमला ने गांव के स्कूल और सामुदायिक केंद्र के लिए वित्तीय सहायता देने, वहां शिक्षा और आवश्यक सेवाओं में सुधार करने का भी वादा किया। उस समय, उन्होंने कहा था कि यह यात्रा उनकी जड़ों से भावनात्मक जुड़ाव थी और भेलूपुर हमेशा उनके दिल में एक खास जगह रखेगा।

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