

टीईटी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमित विक्रम को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, अब अमित सरकार के खिलाफ बगावत पर उतर आए हैं। उन्होंने अपने निलंबन को वोट की राजनीति से जोड़ते हुए कहा है कि 6 लाख शिक्षक मिलकर 30 लाख से अधिक वोट की संख्या रखते हैं। इसकी ताकत लोकसभा और विधानसभा में दिखाई देगी। इतिहास बताएगा।
निलंबन के बाद अमित विक्रम ने बिहार सरकार को खुली चुनौती दी है। अगर सरकार शिक्षक की मांग पूरी नहीं करती है, निलंबन वापस नहीं लेती है, तो हम शिक्षक सरकार को मिट्टी में मिला देंगे। जिस वोट की ताकत से हमनें तेजस्वी की पार्टी को बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनाया है, उसे वोट की ताकत से हम मिट्टी में मिला देंगे।
साथ ही वह यह भी आशंका जाहिर करते हैं कि हमारे संघ के पदाधिकारियों और नेताओं को निलंबित किया जा रहा है। ना तो मुझे कोई नोटिस दिया गया ना स्पष्टीकरण पूछा गया, सीधा निलंबित कर दिया गया है। यह आदेश पूरी तरह हिटलर शाही और तानाशाही है। यह हमारे मौलिक अधिकारों का हनन है।
उन्होंने कहा है कि गैर कानूनी ढंग से शिक्षकों को निलंबित किया जा रहा है। मुझे भी निलंबित किया गया है। कहीं भी सेवा संहिता में ऐसा नहीं लिखा गया है कि हम शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन नहीं कर सकते, उग्र प्रदर्शन करना और हिंसक प्रदर्शन करना अवैध है। लेकिन हम पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन करने पर भी कार्रवाई की गई। और जो निलंबन पत्र जारी किया गया है उसमें लिखा गया है की नियमावली के खिलाफ प्रदर्शन करने गए थे।
6 लाख शिक्षक मिलकर 30 लाख से अधिक वोट की संख्या रखते हैं। इसकी ताकत लोकसभा और विधानसभा में दिखाई देगी। और इसका गूंज इतिहास में दिखाई देगा कि किस तरह से शिक्षक नेताओं पर जब गैर कानूनी ढंग से कार्यवाही की गई, तो इसका जवाब शिक्षकों ने किस प्रकार से दिया। हम सत्ता पलटने की हिम्मत रखते हैं।

