आज से नए संसद भवन में कामकाज की शुरुआत हो गई है। संसद के इस विशेष सत्र को और विशेष बनने के लिए एक बड़ा ऐलान सरकार की तरफ से कर दिया गया है। आज संसद में महिला आरक्षण बिल पेश होगा। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बिल को नया नाम ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ दिया।
इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सांसदों के साथ पुराने संसद भवन, जिसे अब ‘संविधान भवन’ के नाम से जाना जाएगा, वहां से नई संसद भवन इमारत की तरफ मार्च किया। इसके बाद उन्होंने लोकसभा को संबोधित किया।
उन्होंने इस दौरान कहा कि इस पावन दिवस पर हमारा ये शुभारंभ संकल्प से सिद्धि की ओर एक नए विश्वास के साथ यात्रा आरंभ करने का है। नए संसद भवन में सदन की पहली कार्यवाही शुरू हुई। इस दौरान पीएम मोदी ने ‘महिलाओं के नेतृत्व में विकास’ की सोच को आगे बढ़ते हुए एक प्रमुख संविधान संशोधन विधेयक प्रस्तुत करने का ऐलान किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन में संबोधन के दौरान कहा कि बीते दिन को केंद्रीय कैबिनेट में इस अधिनियम को पारित कर दिया गया है। इस उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी को विस्तार देना है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इस माध्यम से हमारा लोकतंत्र और मजबूत होगा।
मैं देश की माताओं, बहनों और बेटियों को नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं सभी माताओं, बहनों, बेटियों को आश्वस्त करता हूं कि हम इस विधेयक को अमल में लाने के लिए संकल्पित हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हर देश की विकास यात्रा में ऐसे पत्थर के मील आते हैं, जब वो गर्व से कहता है कि आज के दिन हम सबने नया इतिहास रचा है। उन्होंने कहा कई नए सदन के प्रथम सत्र के प्रथम भाषण में वो बड़े विश्वास और गर्व से कह रहे हैं कि आज का ये पल, आज का ये दिवस इतिहास में नाम दर्ज कराने वाला है।
उन्होंने कहा कि सिर्फ महिलाओं के विकास की बात पर्याप्त नहीं है, हमें मानव जाति की विकास यात्रा में नए पड़ाव को अगर प्राप्त करना है, राष्ट्र की विकास यात्रा में नई मंजिलों को अगर पाना है, तो ये आवश्यक है कि ‘Women Led Development’ को हम बल दें।
उन्होंने बताया कि कैसे महिला सशक्तिकरण की उनकी सरकार ने हर योजना ने महिला नेतृत्व करने की दिशा में बहुत सार्थक कदम उठाए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि ईश्वर ने पवित्र कार्य के लिए उन्हें चुना है।
उन्होंने कहा, “अनेक वर्षों से महिला आरक्षण पर बहुत चर्चाएँ और वाद-विवाद हुए हैं। 1996 में इससे जुड़ा बिल पहली बार पेश हुआ था। अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में कई बार महिला आरक्षण बिल पेश किया गया, लेकिन उसे पास कराने के लिए आंकड़ें नहीं जुटा पाए। जिस वजह से वो सपना अधूरा रह गया।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि महिला आरक्षण बिल पर काफी चर्चा हुई हैं, बहुत वाद-विवाद भी हुए हैं। अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में कई बार महिला आरक्षण बिल पेश किया गया लेकिन बिल को पारित कराने के लिए पर्याप्त बहुमत नहीं था और इस कारण यह सपना अधूरा रह गया।
ईश्वर ने शायद ऐसे कई कामों के लिए मुझे चुना है. कल ही कैबिनेट में महिला आरक्षण बिल को मंजूरी दी गई है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। हमारी सरकार आज दोनों सदनों में महिलाओं की भागीदारी पर एक नया बिल ला रही है।
उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में नारी शक्ति का विस्तार करने का है। उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को संसद में पेश किए जाने का ऐलान किया।
उन्होंने इसके लिए देश की सभी माताओं-बहनों-बेटियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि इस बिल को कानून बनाने के लिए हम संकल्पबद्ध हैं। उन्होंने सभी सांसदों से आग्रह किया कि वो सर्वसम्मति से पारित किया जाए। उन्होंने कहा कि जब ये बिल कानून बनेगा तो सभी महिलाओं को इसका फायदा होगा।






