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Madhubani News | Water Crisis | मधुबनी में पनघट अभी से सूना-सूना है

देशज टाइम्स की अपील : जल ही जीवन हैं... जल के बिना जीवन की कल्पना भी मुश्किल हैं। ...जल संचय करें। इसे व्यर्थ न करें...।

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देशज टाइम्स | Highlights -

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Madhubani News | water Crisis | मधुबनी में पनघट अभी से सूना-सूना है जहां बदला मौसम का मिजाज शहर तो शहर ग्रामीण क्षेत्रों में भी जल संकट से जूझने लगे लोग

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जिला भर में पूर्ण रूपेण खराब हो गए हजारों सरकारी चापाकल पीएचईडी के पास उखाड़ कर गाड़ने का नहीं है मद। जिला से भीषण गर्मी के समय चापाकल मरम्मती के लिए रवाना किए गए दल ने भी क्षेत्रों में की मजबूरन खानापूर्ति

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Water Crisis | सरकारी विज्ञापनों में मोटे अक्षरों में लिखा रहता है, जल ही जीवन है, इसे व्यर्थ न करें, मगर…ये फंसाने हैं

जहां, जल ही जीवन है। जल है तो कल है। यह कथन अरसों से सभी लोगों को सुनने के लिए मिलता है। कई सरकारी विज्ञापनों में स्पष्ट और मोटे अक्षरों में लिखा रहता है, जल ही जीवन है, इसे व्यर्थ न करें। सरकार भी जल संचय को लेकर कई योजनाओं को धरातल पर लाने का काम किया। इसमें जल जीवन हरियाली एक मुख्य योजना है।

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Water Crisis | सात निश्चय जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं  धरातल पर, मगर यकीं कौन करेगा…

वर्तमान बिहार सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विगत के वर्षों में ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में सात निश्चय जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को धरातल पर उतरवाने की पुरजोर कोशिश किए। हालांकि यह किसी से छुपा नहीं है कि नलजल योजना के कार्य का आरंभ से लेकर वर्तमान में क्या हश्र है। जिस समय नलजल योजना का कार्य वार्ड क्रियान्वयन समिति की ओर से करवाने का काम किया गया।

Water Crisis | अनियमितता, लूट खसोट के कारण प्रायः वार्डो में योजना का कार्य अभी तक अधर में…अपवाद छोड़कर

उस समय उक्त योजना में हुई अनियमितता व लूट खसोट के कारण प्रायः वार्डों में योजना का कार्य अभी तक अधर में है। वहीं अपवाद स्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों व शहरी क्षेत्रों में नलजल योजना से जल का लाभ कुछ वार्ड के लोगों को मिल भी रहा है। फिलहाल उक्त योजना को पीएचईडी को सुपुर्द कर दिया गया है।

Water Crisis | जिले भर में हजारों सरकारी चापाकल पूर्ण रूपेण हो गया है बंद

जिले भर में हजारों की संख्या में ऐसे सरकारी चापाकल है जो कई वर्षो से पूर्ण रूपेण बंद हो चूका है। वहीं कुछ ऐसे है जो चार पांच वर्ष भी नहीं बीते और बालू आने के कारण चॉक होकर बंद हो गया। उक्त चापाकलों की मरम्मती को लेकर जिला द्वारा अधिकृत मरम्मती दल को कई जगहों से ग्रामीणों ने सूचना कर जानकारी दी, लेकिन उनके द्वारा उखाड़ कर गाड़ने का मद विभाग में नहीं रहने का हवाला देकर चापाकल को उसी स्थिति में छोड़ दिया गया।

Water Crisis | कई जगहों पर पीएचईडी के दस वर्ष पूर्व का भी चापाकल ख़राब है तो कई जगहों पर विधायक व मुखिया अनुशंसित…टपक नहीं रहा पानी

क्षेत्र में खराब परे चापाकल में से अधिकांश दशक पहले पीएचईडी विभाग द्वारा व विधायकों की अनुशंसा पर गड़वाया हुआ है। वहीं कुछ पंचायत के मुखिया व समिति के माध्यम से। जिसमें कई चापाकल का पाईप लोहे वाला है जिसे उखाड़ कर दुबारा गड़वाया जा सकता है, लेकिन इस पर सरकार व संबंधित विभाग का कोई ध्यान नहीं है।

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Water Crisis | भूजल संकट आने वाले समय में ले सकती है भयावह रूप

विगत कुछ वर्षो से उत्पन्न भयंकर भू जल संकट आने वाले समय में भयावह रूप लें सकता हैं। विगत कई वर्षो से महानगरों में जल संकट व्याप्त है। उक्त शहरों में जल संचय कर सप्ताह से ज्यादा समय तक रखा जाता हैं। वर्तमान समय में देश के कई बड़े शहरों में जल संकट का आगाज हो चुका है। ऐसे में अगर जल संचय को लेकर आम आवाम व सरकार की ओर से सही पहल नहीं किया गया तो आने वाला समय बहुत ही कष्टप्रद होगा।

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Water Crisis | गर्मी के मौसम में उत्पन्न जल संकट के अधिकारियों की खुलती है नींद

गर्मी के मौसम में शहर तो शहर ग्रामीण इलाकों में भी जलस्तर बहुत नीचे चले जाने के कारण बहुत सारा चापाकल बंद हो जा रहा है। ऐसे में ना तो ग्रामीणों को नलजल योजना से लाभ प्राप्त हो रहा और और न ही चापाकल से। साथ ही शहरी क्षेत्रों में प्रायः जगह समर्सिबल लगवाया जा चुका है।

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Water Crisis | चापाकल से पानी आना बंद

इसके कारण साधारण चापाकल से पानी आना बंद हो चुका हैं। गर्मी के समय में उत्पन्न होने वाली इस विकट जल संकट की स्थिति में जिलाधिकारी व पीएचईडी विभाग के अधिकारी पूर्व की भांति नींद से जगते हैं और चापाकल मरम्मती दल को जिले से हरी झंडी दिखा कर विभिन्न क्षेत्रों में रवाना करते हैं।

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