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दरभंगा में मातृशक्ति की अद्भुत, ऐतिहासिक भोज, पंगत एक मगर थाल व व्यंजन अलग-अलग

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दरभंगा में मातृशक्ति की अद्भुत, ऐतिहासिक भोज, पंगत एक मगर थाल व व्यंजन अलग-अलग
आरएसएस के शिविर में मातृ-भोजन का आयोजन

ऐसा सामूहिक भोज शायद ही कहीं देखने को मिले जैसा बुधवार को म.अ.रमेश्वरलता संस्कृत महाविद्यालय परिसर में दिखा। भोजन के लिए पंक्तिबद्ध बैठे लोगों की थाली में अलग-अलग सामग्री थी। किसी की थाली में रोटी-सब्जी तो किसी की थाली में पूरी-सब्जी। कोई भात-दाल खा रहे थे। कोई दही-पराठे के साथ मिठाइयां भी खा रहे थे। परिवेशन में माताएं-बहनें थीं। कही माताएं लड्डू परोस रही थीं तो कहीं आग्रहपूर्वक खीर परोस रही थीं। अद्भत और शायद दरभंगा के इतिहास में पहली बार…शानदार भोज। पूरी रिपोर्ट…सबसे पहले देशज टाइम्स पर…कोई नहीं है ऐसा…खबरों का गरम भांप बिहार का नंबर 1 हिंदी डिजी न्यूज नेटवर्क।

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दरभंगा, देशज न्यूज। जी हां, यह नजारा था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्राथमिक संघ शिक्षा वर्ग (आइटीसी)का जिसका संचालन रमेश्वरलता संस्कृत महाविद्यालय परिसर में 21 दिसंबर से किया जा रहा है। यहां मातृ-भोजन का आयोजन किया गया था। माताएं-बहनें अपने घर से भोजन बनाकर स्वयंसेवकों के लिए लाई थीं। यहां सभी ने स्नेहपूर्वक स्वयंसेवक बंधुओं को खिलाया। मातृशक्ति ने स्वयंसेवकों को उसी प्रकार ममता व वात्सल्य भाव के साथ आग्रहपूर्वक भोजन कराया जैसे अपनी संतान व पिता या भाई को कराती हैं।

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दरभंगा में मातृशक्ति की अद्भुत, ऐतिहासिक भोज, पंगत एक मगर थाल व व्यंजन अलग-अलग
यूं तो प्रतिदिन शिविर में ही भोजन पकाकर स्वयंसेवकों के जलपान-भोजन की व्यवस्था है। आज विशेष आयोजन किया गया था। मकसद था, मातृशक्ति और संघ का परिचय बने। मातृशक्ति निकट से संघ को समझें। पारस्परिक स्नेह प्रगाढ़ हो सके। इस तरह के आयोजन से समाज में मातृशक्ति के प्रति आदर भाव विकसित करने का भी प्रभावी प्रयास किया गया।

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इससे पहले माताओं के समक्ष संघ का संक्षिप्त परिचय और राष्ट्र के निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका विषय को वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अमलेन्दु शेखर पाठक ने रखा। मौके पर माताओं-बहनों ने समवेत रुप से राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण संघ गीत भी गाए। विभाग प्रचारक राजारामजी ने इस मौके पर उपस्थित जिला संघचालक डॉ. अशोक कुमार, विधान पार्षद अर्जुन सहनी, समाजसेवी पवन सुरेका व डॉ. अमलेन्दु शेखर पाठक से मातृशक्ति को परिचित कराया गया।

स्वयंसेवकों को खिलाने के बाद मातृशक्ति को भी आदरपूर्वक भोजन कराया गया। इस आइटीसी वर्ग का समापन आगामी 28 दिसंबर को समारोहपूर्वक होगा। इस बीच लगभग डेढ़ सौ स्वयंसेवकों को यहां शारीरिक व बौद्धिक प्रशिक्षण देने के साथ ही उनका चरित्र-निर्माण और उनमें राष्ट्र-प्रेम का गुण विकसित करने का प्रयास हो रहा है।दरभंगा में मातृशक्ति की अद्भुत, ऐतिहासिक भोज, पंगत एक मगर थाल व व्यंजन अलग-अलग

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