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31 अगस्त, 2024
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बिहार सरकार का बड़ा फैसला: अब मुखिया-सरपंच-वार्ड सदस्य भी रख सकेंगे –लाइसेंसी हथियार!, जानिए कौन-कौन पात्र हैं!

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बिहार में पंचायत प्रतिनिधियों को मिला हथियार रखने का अधिकार! सरकार का ऐतिहासिक फैसला। अब मुखिया-सरपंच भी रख सकेंगे लाइसेंसी हथियार! बिहार सरकार ने दी मंजूरी।पंचायत प्रतिनिधियों को मिली बड़ी ताक़त! सुरक्षा के लिए मिल सकेगा शस्त्र लाइसेंस। जनप्रतिनिधियों को अब डरने की ज़रूरत नहीं! शस्त्र लाइसेंस के लिए सरकार ने खोला रास्ता। बढ़ते हमलों के बीच बिहार सरकार का बड़ा फैसला – अब पंचायत नेताओं को मिल सकेगा हथियार।@पटना,देशज टाइम्स।

लाइसेंसशुदा हथियार रखने की मिली इजाजत

पटना, देशज टाइम्स। बिहार सरकार ने एक ऐतिहासिक और अहम निर्णय लेते हुए पंचायत प्रतिनिधियों को शस्त्र (हथियार) रखने की वैध अनुमति देने का रास्ता साफ कर दिया है। अब मुखिया, सरपंच, पंच, वार्ड सदस्य, जिला परिषद सदस्य और प्रखंड समिति सदस्य जैसे त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि सुरक्षा कारणों से लाइसेंसशुदा हथियार रख सकेंगे।

क्यों लिया गया यह फैसला?

बिहार में पंचायत प्रतिनिधियों को अक्सर धमकियां, चुनावी रंजिश, भूमि विवाद और सामाजिक टकराव का सामना करना पड़ता है। कई बार मुखिया और सरपंचों की हत्या या हमला जैसी घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में सरकार ने प्रतिनिधियों की आत्मरक्षा के अधिकार को मान्यता देते हुए यह फैसला लिया।

कैसे मिलेगा शस्त्र लाइसेंस? आवेदन की प्रक्रिया जानें

पंचायत प्रतिनिधि को आवेदन पत्र जिला पदाधिकारी (DM) के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। आवेदन की जांच स्थानीय थाना, खुफिया रिपोर्ट और आपराधिक पृष्ठभूमि के आधार पर की जाएगी। यदि उचित कारण पाया गया तो DM द्वारा लाइसेंस जारी किया जाएगा। लाइसेंसधारी को शस्त्र अधिनियम 2016 (Arms Act, 2016) के तहत सभी नियमों का पालन करना होगा।

सरकारी अधिकारियों ने क्या कहा?

गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया:

“सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि पंचायत प्रतिनिधियों के लाइसेंस आवेदन पर समयबद्ध और निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। यह मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप है।”

पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने 18 जून 2025 को गृह विभाग को पत्र भेजकर कार्रवाई का अनुरोध किया था।

कौन-कौन पात्र हैं?

इस फैसले से राज्यभर के करीब 2.5 लाख पंचायत प्रतिनिधि लाभान्वित हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं, मुखिया, सरपंच, पंच, वार्ड पार्षद, जिला परिषद सदस्य समेत प्रखंड समिति सदस्य।

सुरक्षा बनाम कानून: सरकार की संतुलित पहल

यह निर्णय जहां एक ओर जनप्रतिनिधियों को आत्मरक्षा का वैध साधन देता है, वहीं शस्त्र नियंत्रण कानून का पालन सुनिश्चित करके कानून व्यवस्था बनाए रखने का संतुलन भी साधता है।

 पंचायत सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस और व्यावहारिक पहल

यह निर्णय पंचायत व्यवस्था में कार्यरत जनप्रतिनिधियों को न केवल मानसिक सुरक्षा देगा बल्कि उन्हें जनता के बीच मजबूती से काम करने में भी सक्षम बनाएगा। सरकार का यह कदम पंचायत सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस और व्यावहारिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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