
बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर की नई न्यास समिति, नया अंदाज, मगर कुछ ‘पारदर्शिता पर’ सवाल उठ रहे हैं! क्या बाबा कुशेश्वर नाथ मंदिर की नई समिति में वे लोग भी हैं जिनपर पहले से कुछ दाग हैं यानि केस-मुकदमा है और यह नियम विरूद्ध है या सही है?! लोगों की नजर में आस्था के केंद्र में नया विवाद यह है कि मंदिर की नई समिति बनी, लेकिन नियम क्या टूट गया, ग्यारह की जगह सिर्फ आठ…तीसरी बात, पंडा समाज कहां है? यह सवाल पूछे जा रहे हैं! केस वालों को भी मिला पद, लेकिन तीन पद रह गए खाली या जानकर उसे छोड़ा गया? बाबा कुशेश्वर नाथ मंदिर में क्या बड़ा बदलाव होने वाला है? उम्मीद तो यही है!@कुशेश्वरस्थान,देशज टाइम्स।
नई समिति का अंदाज बिल्कुल नया होगा, यही उम्मीद
बाबा कुशेश्वर नाथ मंदिर की पारदर्शिता पर उठे सवाल श्रावणी मेले से पहले मंदिर समिति में भूचाल! पुराने हटे, केस वाले नए लोग टीम में क्या इस बार भक्तों को मिलेगी बेहतर सुविधा? नई समिति की पहली अग्निपरीक्षा श्रावणी मेला! वैसे SDM अध्यक्ष हैं और DSP सुरक्षा देखेंगे तो निसंदेह – पूरी टीम श्रद्धालुओं को पुरानी सुविधाओं के साथ नई सुविधा मुहैया कराने में सक्षम होंगी? नई समिति का अंदाज बिल्कुल नया होगा, यही उम्मीद की जा रही है? @कुशेश्वरस्थान,देशज टाइम्स।
एसडीओ अध्यक्ष, डीएसपी उपाध्यक्ष नियुक्त, दिखेगा नव प्रयोग
एसडीओ अध्यक्ष, डीएसपी उपाध्यक्ष नियुक्त। कुल 8 सदस्यीय समिति का गठन। केस-मुकदमा वाले लोगों को समिति में शामिल किए जाने से उठे सवाल। पूर्व अधिकतर सदस्यों को नहीं मिला मौका,खैर यह तो अपना अंदाज है काम करने का। मगर, श्रावणी मेले में नई समिति के कामकाज पर सबकी नजर। पंडा समाज को समिति में शामिल नहीं किया गया।
मांग – समिति में पारदर्शी, स्थानीय प्रतिनिधियों को मिलनी चाहिए जगह
स्थानीय लोगों की जगह बाहरी चेहरों को दी गई प्राथमिकता। ऐसे में, समिति के राजनीति करण पर उठे सवाल। श्रावणी मेला की व्यवस्था पर अभी से दिखने लगीं चिंता।मांग – समिति में पारदर्शी और स्थानीय प्रतिनिधियों को मिलनी चाहिए जगह@कुशेश्वरस्थान,देशज टाइम्स।
बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर के संचालन को बनी नई न्यास समिति, पारदर्शिता पर उठे सवाल
कुशेश्वरस्थान/दरभंगा, देशज टाइम्स। मिथिलांचल की आस्था का प्रमुख केंद्र बाबा कुशेश्वर नाथ महादेव मंदिर अब नई न्यास समिति के नेतृत्व में संचालित होगा। मंदिर की व्यवस्था और संचालन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से इस समिति का गठन किया गया है, लेकिन इसके गठन को लेकर विवाद और सवाल भी सामने आ रहे हैं।
एसडीओ अध्यक्ष, डीएसपी उपाध्यक्ष बनाए गए
बिरौल के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) को न्यास समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे मंदिर की धार्मिक गतिविधियों और विकास कार्यों की निगरानी करेंगे। बिरौल डीएसपी को समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है, जो मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेंगे।
गोपाल नारायण चौधरी बने सचिव, विकास योजनाओं की जिम्मेदारी
गोपाल नारायण चौधरी को समिति का सचिव बनाया गया है। वे दस्तावेजों का संधारण, बैठकों का समन्वय और प्रशासन-सदस्यों के बीच समन्वय स्थापित करेंगे।
इन पांच सदस्यों को मिली समिति में जगह
रविंद्र कुमार चौधरी, मणिकांत झा, कविता कुमारी, शंकर चौपाल, विमल चंद्र खां शामिल हैं। इन सदस्यों को मंदिर की गतिविधियों में भागीदारी और विकास कार्यों में सहयोग का दायित्व सौंपा गया है।
पूर्व सदस्यों को नहीं मिला मौका, चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस बार पूर्व सदस्यों को समिति में शामिल नहीं किया गया, सिर्फ पूर्व सचिव विमल चंद्र खां को दोबारा मौका मिला है। नियमों के अनुसार, किसी भी दागी व्यक्ति या केस-मुकदमा वाले को समिति में शामिल नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन इस बार ऐसे व्यक्तियों को भी शामिल कर लिया गया है, जिससे समिति की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
श्रावणी मेला की तैयारी में नई टीम की अग्निपरीक्षा
श्रावण माह में लगने वाला एक माह का विशाल मेला निकट है। नई समिति की पहली बड़ी परीक्षा यही होगी कि वह भक्तों को कैसी सुविधाएं उपलब्ध कराती है। पिछली टीम ने व्यवस्थित सेवा और साफ-सफाई के मानकों पर अच्छा प्रदर्शन किया था, अब नई टीम से अपेक्षाएं और भी अधिक हैं।
बाबा कुशेश्वरनाथ न्यास समिति पर उठे सवाल, पंडा समाज और स्थानीय लोगों को नहीं मिली जगह
मिथिलांचल की आस्था का केंद्र बाबा कुशेश्वरनाथ धाम मंदिर की नई गठित न्यास समिति को लेकर विवाद शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों और पंडा समाज ने समिति की संरचना पर गंभीर आपत्ति जताई है।
पंडा समाज को किया गया नजरअंदाज
मंदिर के दैनिक धार्मिक कार्यों में अहम भूमिका निभाने वाले पंडा समाज को इस बार न्यास समिति से बाहर कर दिया गया है। स्थानीय जनों और पंडा समुदाय का कहना है कि परंपरानुसार समिति में पंडा समाज का प्रतिनिधित्व होना अनिवार्य होता है, लेकिन इस बार एक भी सदस्य को नहीं शामिल किया गया।
स्थानीय लोगों को नहीं, बाहरी और राजनीतिक चेहरों को मिली जगह
लोगों का आरोप है कि इस बार समिति में स्थानीय लोगों की उपेक्षा करते हुए राजनीतिक सिफारिशों के आधार पर बाहरी लोगों को शामिल किया गया है। इससे यह भी आशंका जताई जा रही है कि समिति का राजनीतिकरण हो गया है, जो धार्मिक न्यास जैसे संवेदनशील संस्थान के लिए ठीक नहीं।
विकास के लिए हो स्वच्छ छवि वाले सदस्यों का चयन – स्थानीय लोग
स्थानीय नागरिकों का स्पष्ट मत है कि समिति में उन्हीं लोगों को जगह मिलनी चाहिए जो पारदर्शिता, ईमानदारी और सेवा-भाव के साथ कार्य कर सकें। उनका कहना है कि “बाबा कुशेश्वरनाथ धाम का विकास तभी संभव है जब राजनीति से ऊपर उठकर, निष्पक्ष और कर्मठ लोगों को समिति में शामिल किया जाए।”
श्रावणी मेला को लेकर उठीं चिंताएं
आगामी श्रावणी मेला को लेकर भी लोगों में चिंता है कि नई समिति की अयोग्य संरचना से श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर असर पड़ सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन स्थानीय जनभावनाओं का सम्मान करता है या नहीं। वजह यह है, लोग पूछ रहे हैं, जो लोग मंदिर आते नहीं, वैसे लोगों को न्यास का सदस्य बनाया गया है। ऐसे में, विकास की उम्मीद और आगामी श्रावणी मेले में जुटने वाली भीड़ अग्नि परीक्षा होगी।