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Success Story of Dheeraj Kamat | न नौकरी, न पैसा – Darbhanga के इस युवक ने झाड़ू बनाकर खड़ा किया अपना साम्राज्य!

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न नौकरी, न पैसा – दरभंगा के इस युवक ने झाड़ू बनाकर खड़ा किया अपना साम्राज्य! गरीबी से लड़कर बना कारोबारी – सरकारी मदद से खड़ा हुआ झाड़ू उद्योग, दरभंगा के इंटर पास धीरज कामत की कहानी आपको भी देगी हौसला। धीरज कामत की सफलता से सीखें बिजनेस का मंत्र।@मनोरंजन ठाकुर।

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Success Story of Dheeraj Kamat: बहुत ही प्रेरणा दायक दरभंगा की लोकल स्टोरी है

बहुत ही प्रेरणादायक दरभंगा की लोकल स्टोरी है — यह ग़रीबी से उठकर स्वावलंबी बनने और सरकारी योजनाओं से कारोबार खड़ा करने की जिद वाली कहानी है, जो युवाओं, बेरोजगारों और छोटे शहरों के लोगों के लिए हाई क्लिक ट्रिगर इमोशन पैदा करती है।

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Success Story of Dheeraj Kamat: उद्यमी योजना से मिला सहारा, अब झाड़ू व्यवसाय से बना लिया मुकाम

दरभंगा, देशज टाइम्स | बहादुरपुर प्रखंड के मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले धीरज कामत आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उद्यमी योजना (Udyami Yojana) का लाभ उठाकर उन्होंने झाड़ू निर्माण (Broom Manufacturing) जैसे परंपरागत कार्य को व्यवसाय का रूप दिया और आत्मनिर्भर बन गए।

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Success Story of Dheeraj Kamat: शुरुआत में नहीं था पैसा, पर थी आगे बढ़ने की लगन

धीरज कामत ने बताया कि इंटरमीडिएट (Intermediate) तक की पढ़ाई के बाद रोजगार की तलाश में जुट गए थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी।कोई पूंजी नहीं थी हमारे पास, जिससे अपना व्यवसाय शुरू कर सकें। इसी दौरान उन्होंने गांव के कुछ लोगों को झाड़ू बनाते देखा, और वहीं से उन्हें यह व्यवसाय करने की प्रेरणा मिली।

Success Story of Dheeraj Kamat: उद्योग केंद्र पहुंचकर मिली सही दिशा

धीरज ने बताया कि जब उन्होंने उन ग्रामीणों से इस कार्य के बारे में जानकारी ली तो उन्होंने जिला उद्योग केंद्र, दरभंगा (District Industries Centre, Darbhanga) जाकर संपर्क करने की सलाह दी। वहां उन्हें न सिर्फ व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया समझाई गई, बल्कि उद्यमी योजना के अंतर्गत ऋण (Loan under Udyami Yojana) की जानकारी भी दी गई।

Success Story of Dheeraj Kamat: प्रशिक्षण और ₹1.50 लाख की सहायता से मिली नई उड़ान

चयनित होने के बाद उन्हें जिला उद्योग केंद्र से प्रशिक्षण मिला, जिसमें कच्चा माल (Raw Material), निर्माण विधि (Production Process) और बाजार में बिक्री (Sales Techniques) की पूरी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण पूरा होते ही उन्हें ₹1.50 लाख का ऋण मिला जिससे उन्होंने झाड़ू निर्माण का कार्य शुरू किया।

Success Story of Dheeraj Kamat: शुरुआती चुनौतियां आईं, लेकिन नहीं मानी हार

धीरज कामत ने कहा कि शुरुआत में उन्हें कारीगर (Skilled Labor) नहीं मिले और बिक्री (Sales) में भी परेशानी आई। लेकिन उन्होंने खुद स्थानीय बाजार जाकर लोगों से मिलना शुरू किया। इस दौरान जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों ने भी उनकी मदद की।

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Success Story of Dheeraj Kamat: अब कर रहे हैं विभिन्न प्रकार की झाड़ू का निर्माण

वर्तमान में श्री कामत की ओर से फूल झाड़ू (Phool Broom), सिक झाड़ू (Sick Broom) सहित अन्य प्रकार की झाड़ू बनाई जा रही है। उनके व्यवसाय में अब स्थिरता और विस्तार दोनों हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं के सही लाभ और मार्गदर्शन से ही वे इस मुकाम तक पहुंच पाए।

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