
दरभंगा | जिले में श्रम संसाधन विभाग की टीम ने बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत विशेष छापेमारी अभियान चलाते हुए दो बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया।
छापेमारी अभियान और बचाए गए बालक
गहन छापेमारी में विभागीय धावा-दल ने दो जगहों से नाबालिग बच्चों को मुक्त किया।
करिश्मा बेकर्स, सुरहाचट्टी (बहेड़ी रोड, पेट्रोल पंप के सामने) से एक बाल श्रमिक को छुड़ाया गया।
सौरव बिरयानी एंड रेस्टोरेंट, सुरहाचट्टी (हायाघाट) से भी एक नाबालिग मजदूर को मुक्त कराया गया।
इस कार्रवाई में कुल दो बाल श्रमिकों की मुक्ति हुई है।
दोषी नियोजकों पर कड़ी कार्रवाई
श्रम अधीक्षक किशोर कुमार झा ने बताया कि दोषी नियोजकों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
प्रत्येक बाल श्रमिक के मामले में 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जिसे जिला बाल श्रमिक पुनर्वास कल्याण कोष में जमा करना अनिवार्य होगा।
अधिनियम की धारा 3 और 3A का उल्लंघन करने वाले नियोजकों से 20,000 से 50,000 रुपये तक जुर्माना वसूला जाएगा।
न्यूनतम मजदूरी और मुआवजा
श्रम अधीक्षक ने यह भी स्पष्ट किया कि नियोजकों ने बच्चों को न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wages Act, 1948 – ) से भी कम भुगतान किया था। इस पर:
नियोजकों से 10 गुना मुआवजा वसूला जाएगा।
सक्षम न्यायालय में दावा पत्र दाखिल कर दिया गया है।
जिले में अब तक 19 बाल श्रमिकों की मुक्ति
श्रम अधीक्षक झा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में दरभंगा जिले से अब तक कुल 19 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया जा चुका है। यह संख्या बताती है कि जिले में अभी भी बाल श्रम की समस्या मौजूद है, लेकिन विभाग निरंतर कार्रवाई कर रहा है।
आज की टीम में कौन-कौन थे?
इस अभियान में विभाग के कई अधिकारी शामिल रहे, जिनमें प्रमुख रूप से:
साधना भारती, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, हायाघाट
स्मृति भारद्वाज, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, अलीनगर
नीतीश कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, किरतपुर
रजत राउत, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, तारडीह
नवचन्द्र प्रकाश, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, बेनीपुर
बाल श्रम पर भारत सरकार की नीति
भारत में बाल श्रम (Child Labour in India) को अपराध माना गया है।
14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी खतरनाक उद्योग में काम कराना गैर-कानूनी है।
भारत सरकार समय-समय पर राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (NCLP) जैसी योजनाओं के माध्यम से बच्चों को शिक्षा और पुनर्वास की सुविधा देती है।
सामाजिक प्रभाव और संदेश
इस छापेमारी ने स्पष्ट कर दिया कि बाल श्रम अपराध है, और समाज को इसके खिलाफ खड़ा होना होगा। ऐसे अभियानों से न केवल बच्चों को शिक्षा का अधिकार (Right to Education ) मिलता है, बल्कि उनका बचपन भी सुरक्षित होता है।
बच्चों से काम कराना — कानूनन अपराध
दरभंगा श्रम विभाग की यह कार्रवाई बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में सराहनीय कदम है। इससे समाज को यह संदेश जाता है कि नाबालिग बच्चों से काम कराना कानूनन अपराध है और इसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।