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7 सितंबर को लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण! भारत में दिखेगा – 3 घंटे 28 मिनट तक ब्लड मून,क्या न करें –ज्योतिष और विज्ञान दोनों में क्यों है बेहद खास? जानिए विस्तार से

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7 सितंबर का चंद्र ग्रहण: 7 सितंबर को लगेगा साल का अंतिम चंद्र ग्रहण! भाद्रपद पूर्णिमा पर लगेगा चंद्र ग्रहण! पितृपक्ष की शुरुआत से पहले क्यों है बेहद खास? लालिमा लिए चमकेगा चांद! 7 सितंबर की रात दिखेगा ‘ब्लड मून’, NASA ने दी जानकारीदेखें भारत में कहां-कहां दिखेगा ‘ब्लड मून’।

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भारत में दिखेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण – 3 घंटे 28 मिनट तक रहेगा ब्लड मून

भारत में दिखेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण – 3 घंटे 28 मिनट तक रहेगा ब्लड मून। सूतक कब से शुरू होगा? गर्भवती महिलाओं और बच्चों को चंद्र ग्रहण में क्या सावधानी रखनी चाहिए। चंद्र ग्रहण 2025: कब से लगेगा सूतक, क्या करें और क्या न करें –ज्योतिष और विज्ञान दोनों में क्यों है बेहद खास? जानिए विस्तार से- जानिए पूरा टाइमिंग

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7 सितंबर को लगेगा वर्ष का अंतिम पूर्ण चंद्र ग्रहण: सूतक काल, धार्मिक महत्व और वैज्ञानिक पहलू

नई दिल्ली/देशज टाइम्स। 7 सितंबर 2025 को साल का आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण भारत सहित एशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका, फिजी और अंटार्कटिका के कई हिस्सों से दिखाई देगा। इसकी वजह से यह घटना वैज्ञानिकों और ज्योतिषाचार्यों दोनों के लिए बेहद खास मानी जा रही है।

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कब और कितनी देर रहेगा ग्रहण?

ग्रहण शुरू: रात 9:58 बजे, ग्रहण समाप्त: रात 1:26 बजे (8 सितंबर), कुल अवधि: 3 घंटे 28 मिनट, विशेष स्थिति: यह ग्रहण कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में लगेगा।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण: क्यों दिखता है ‘ब्लड मून’?

जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तब सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती। इस दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। चंद्रमा लालिमा लिए दिखाई देता है, जिसे ‘ब्लड मून’ कहते हैं। यह नजारा केवल पूर्ण चंद्र ग्रहण में ही संभव होता है।

सूतक काल और धार्मिक महत्व

चूंकि ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य होगा। सूतक प्रारंभ: 7 सितंबर दोपहर 12:57 बजे, समाप्ति: ग्रहण खत्म होते ही (8 सितंबर रात 1:26 बजे)।

सूतक काल में क्या न करें

मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं। पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान वर्जित रहते हैं। गर्भवती महिलाएं नुकीले औजार, सब्जी काटना या सिलाई-बुनाई न करें। बच्चों और बुजुर्गों को बाहर जाने से बचना चाहिए।

पितृपक्ष और श्राद्ध का विशेष महत्व

यह ग्रहण भाद्रपद पूर्णिमा की रात को होगा। इसी दिन से पितृपक्ष की शुरुआत मानी जाती है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि श्राद्ध कर्म व पितृ पूजन ग्रहण से पहले ही कर लेना चाहिए।

पूर्ण चंद्र ग्रहण केवल खगोलीय घटना ही नहीं

7 सितंबर 2025 का यह पूर्ण चंद्र ग्रहण केवल खगोलीय घटना ही नहीं, बल्कि धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह वर्ष का अंतिम चंद्र ग्रहण है, जिसे भारत समेत कई देशों में प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकेगा।

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