
दरभंगा न्यूज़: मिथिलांचल की धरती पर बसा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है। कोर्ट के एक आदेश के बाद विश्वविद्यालय का संगीत एवं नाट्य विभाग खाली कराने पहुंची प्रशासनिक टीम और छात्रों के बीच जमकर तनातनी देखने को मिली। सवाल यह है कि दशकों से विश्वविद्यालय के अधीन रहा यह विभाग अचानक क्यों खाली कराया जा रहा है और क्या है इस पूरे मामले की जड़?
यह पूरा मामला सात कट्ठा जमीन से जुड़ा है, जिस पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय का संगीत एवं नाट्य विभाग संचालित होता है। व्यवहार न्यायालय दरभंगा ने हाल ही में इस जमीन पर महाराज कामेश्वर धार्मिक न्यास के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि यह भूमि राज परिवार के स्वामित्व में है, जिसके बाद न्यास इस पर अपना अधिकार जता रहा है।
अदालती आदेश के आलोक में, रविवार को सदर एसडीओ विकास कुमार भारी पुलिस बल के साथ संगीत एवं नाट्य विभाग को खाली कराने मौके पर पहुंचे। उनका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया का पालन करते हुए न्यास को जमीन का कब्जा दिलाना था, लेकिन उन्हें वहां अप्रत्याशित विरोध का सामना करना पड़ा।
छात्रों और विभागाध्यक्ष का विरोध
पुलिस बल की तैनाती की खबर जैसे ही विश्वविद्यालय परिसर में फैली, संगीत एवं नाट्य विभाग के विभागाध्यक्ष और बड़ी संख्या में छात्र मौके पर जमा हो गए। छात्रों ने एकजुट होकर प्रशासन की कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। इस दौरान हंगामे और नारेबाजी का माहौल बन गया, जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों को हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत कराना पड़ा।
विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार दिव्या रानी हांसदा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि विभाग में 26 दिसंबर तक परीक्षाएं चल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग को खाली कराने से संबंधित कोई पूर्व सूचना उन्हें नहीं मिली थी। रजिस्ट्रार ने एसडीओ से 26 दिसंबर तक का समय मांगा, ताकि छात्र अपनी परीक्षाएं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कर सकें और विभाग को स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जा सके।
राज परिवार का दशकों पुराना दावा
महाराज कामेश्वर धार्मिक न्यास और राज परिवार लंबे समय से इस सात कट्ठा जमीन पर अपने स्वामित्व का दावा कर रहे हैं। न्यास के प्रबंधक पवन कुमार दत्ता के अनुसार, अदालत के कई फैसलों के बाद न्यास ने कई बार जमीन का कब्जा प्राप्त करने का प्रयास किया है, लेकिन हर बार विश्वविद्यालय और छात्रों के विरोध के चलते उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। रविवार को भी, जब परीक्षा का हवाला दिया गया, तो प्रशासनिक टीम को वापस लौटना पड़ा।
सदर एसडीओ विकास कुमार ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि वे कोर्ट के निर्देशानुसार ही कार्रवाई कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय द्वारा मांगे गए समय के बाद, यानी 26 दिसंबर को परीक्षाएं समाप्त होने के उपरांत, विभाग को नियमानुसार खाली कराया जाएगा।




